Friday, February 13, 2026
Advertisement
Home राजनीति यूपी में ब्राह्मणों के बाद बीजेपी से क्यों भड़का कुर्मी-लोधी समाज

यूपी में ब्राह्मणों के बाद बीजेपी से क्यों भड़का कुर्मी-लोधी समाज

82
अपने ही जाल में खुद फंसी भाजपा ?
अपने ही जाल में खुद फंसी भाजपा ?
राजू यादव
राजू यादव

    यूपी की सियासत में एक बार फिर उबाल है…महोबा से उठा विवाद अब सिर्फ मंत्री और विधायक की लड़ाई नहीं रहा, बल्कि कुर्मी बनाम लोधी समाज की सियासी ताकत का इम्तिहान बन चुका है। हर घर नल योजना फेल है, पाइपलाइन लीकेज,नल नहीं,टंकी टूटी, और जनता बेहाल। यहीं से शुरू हुआ यह टकराव, जिसने बीजेपी की अंदरूनी राजनीति को बेनकाब कर दिया।आइए विस्तार से समझते हैं बीजेपी में क्या हो रहा है।

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत और कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के बीच 30 जनवरी को टकराव हुआ। अब ये मुद्दा सोशल मीडिया और गांव-गली में कुर्मी बनाम लोधी समाज का रूप ले रहा है। लोग इसे दो जातियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई मान रहे हैं। भाजपा के लिए ये चिंता का विषय बन गया है। बृजभूषण राजपूत लोधी समाज से आते हैं,जबकि स्वतंत्र देव सिंह कुर्मी समाज से। दोनों समाज की ताकत क्या है जान लेते है। लोकसभा की 27 और विधानसभा की 128 सीटों पर कुर्मी समाज का प्रभाव है। यूपी में 40 कुर्मी विधायक है। जिसमें 27 भाजपा, 12 सपा, 1 कांग्रेस, कुर्मी सांसदों की संख्या 11 है। जिसमें 7 सपा, 3 भाजपा, 1 अपना दल, 5 कुर्मी एमएलसी है। यूपी सरकार में 3 कुर्मी कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, राकेश सचान व आशीष पटेल और 1 राज्यमंत्री संजय गंगवार मोदी सरकार में मंत्री पंकज चौधरी और अनुप्रिया पटेल है।

लोधी समाज के राजनीतिक ताकत की बात करे तो समाज की आबादी 1 करोड़ 10 लाख के करीब है। प्रदेश के 70 विधानसभा और 12 लोकसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका मोदी मंत्रिमंडल में समाज के मंत्री बी.एल. वर्मा केंद्रीय राज्यमंत्री, योगी सरकार में समाज के मंत्री,धर्मपाल सिंह पशुधन मंत्री,संदीप सिंह बेसिक शिक्षा मंत्री यूपी में लोधी समाज के 23 विधायक है। जिसमें 19 भाजपा 4 सपा लोधी समाज के 3 सांसद 2 भाजपा से साक्षी महाराज, मुकेश राजपूत,1 सपा से अजेंद्र राजपूत. इन आंकड़ों से आप अंदाजा लगा सकते है की बीजेपी क्यों चुप है। मंत्री और विधायक दोनों पर कार्रवाई करने से बच रही है। ब्राह्मण विधायक की बैठक से बीजेपी फूँक-फूँक कर कदम रख रही है लेकिन समाज में इसका आक्रोश बढ़ता जा रहा हैं।

मंत्री से भिड़ने के बाद विधायक ब्रजभूषण राजपूत तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी भिड़ने के लिए तैयार है। दरअसल 30 जनवरी को जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह महोबा में एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। वहां से निकले तो रास्ते में चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत ने उनका काफिला रोक लिया। बृजभूषण के साथ करीब 100 से अधिक ग्राम प्रधानों का आरोप था कि जल जीवन मिशन के काम पूरा नहीं किया गया है। पाइप लाइन लीकेज होने, नल कनेक्शन नहीं मिलने, टंकी टूटने और टंकी नहीं बनने से जनता परेशान है। इसको लेकर मंत्री और विधायक के बीच नोक-झोंक हुई। इसके बाद सोशल मीडिया पर स्वतंत्र सेना के पेज से बृजभूषण राजपूत को घेरा जा रहा है, कुर्मी समाज के युवा और नेता भी बृजभूषण राजपूत पर आरोप लगा रहे हैं। वहीं,बृजभूषण राजपूत के समर्थक और लोधी समाज के युवा,स्वतंत्र देव सिंह को कटघरे में खड़ा कर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं.पूरा विवाद कुर्मी बनाम लोधी समाज का होता जा रहा है, जिसने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी को फीडबैक मिल रहा है कि इससे दोनों जनप्रतिनिधियों से जुड़ी जातियों और समर्थकों में नाराजगी है। यही वजह है कि मंत्री का रास्ता रोककर घेराव करने वाले विधायक को पांच दिन बाद भी पार्टी की ओर से नोटिस तक जारी नहीं किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के प्रदेश महामंत्री धर्मपाल सिंह ने बृजभूषण राजपूत से फोन पर बात कर पूरे मामले की जानकारी ली है। बृजभूषण ने उन्हें बताया है कि इस घटना से पहले वह मंत्री को कई बार पत्र लिख चुके थे। इसके बाद भी हर घर नल योजना में कोई सुधार नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक पार्टी की चिंता है कि बृजभूषण राजपूत के बाद अब कई अन्य विधायक भी क्षेत्र में मंत्रियों के साथ ऐसी हरकत न कर दें। लोध समाज को बीजेपी का वोट बैंक माना जाता है। समाज के नेता पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह और केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के दावेदार थे। भाजपा ने लोधी की जगह कुर्मी समाज के पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। लोध समाज से प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाए जाने से समाज के नेता पहले से असंतुष्ट थे। उसके बाद अब विधायक बृजभूषण राजपूत विवाद के बाद समाज में नाराजगी भी है। भाजपा इस विवाद को लेकर जमीनी फीडबैक जुटा रही है। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरों और पोस्ट का भी आकलन किया जा रहा है। पार्टी की ओर से स्थानीय नेताओं को इस तरह के विवाद शांत कराने के लिए कहा गया है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि पूरे मामले में सरकार और संगठन को दखल देकर इसे समाप्त करना चाहिए। सीएम योगी आदित्यनाथ और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और विधायक बृजभूषण राजपूत को एक साथ बैठाकर बात करनी चाहिए। जानकारों का कहना है की विधायकों की क्षेत्र में जवाबदेही है। जनता को दिखाना होता है। बेहतर होता कि वह विधायक बंद कमरे में स्वतंत्र देव सिंह से बात करते। अपनी ही पार्टी के मंत्री को इस तरह रोकना उनका एक अंदाज हो सकता है, लेकिन बात मर्यादित ढंग से कही जा सकती थी। जहां तक दोनों समाजों के बीच टकराव की बात है तो कुर्मी और लोध का कोई टकराव अब तक नहीं रहा है।

तो भाजपा के एक पदाधिकारी की माने तो,बीते दिनों ब्राह्मण विधायकों को एक तरफा चेतावनी देकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ब्राह्मणों की नाराजगी झेल चुके हैं। इसलिए इस मामले में पार्टी एकतरफा कार्रवाई करने से बच रही है। यदि कार्रवाई हुई तो जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और विधायक बृजभूषण राजपूत दोनों पर करनी होगी। इसलिए पार्टी ने मामले को धीरे-धीरे शांत करने का मध्यम मार्ग अपनाया है।

जल जीवन मिशन के तहत यूपी में हर घर नल योजना के तहत घर-घर शुद्ध जल पहुंचाने के लिए 2024 तक समय अवधि निर्धारित थी। लेकिन यूपी में कामकाज की धीमी गति के चलते प्रोजेक्ट का समय लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। दिलचस्प बात है कि प्रोजेक्ट में अपर मुख्य सचिव से लेकर इंजीनियर तक सालों से इसी महकमें में काम कर रहे हैं, लेकिन फिर भी काम समय पर पूरा नहीं हो रहा है। बृजभूषण राजपूत का विवाद तो सुर्खियों में आ गया है,लेकिन बुंदेलखंड के दर्जनों विधायकों ने परियोजना को लेकर सरकार को शिकायती पत्र लिखे हैं। विधायक बृजभूषण राजपूत का कहना है कि वह बीते दो साल से विभागीय मंत्री और प्रमुख सचिव को हर घर नल योजना के घोटाले को लेकर पत्र लिख रहे हैं। विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाकर सीबीआई जांच की मांग कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा घोटाला है, जहां अधिकारियों ने फील्ड में काम नहीं किया,बिना काम के ही ठेकेदार को भुगतान कर दिया है। एक गांव में काम भी शुरू नहीं हुआ है और शत प्रतिशत काम पूरा बताया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिलाधिकारी जो दावा कर रही हैं, उसमें 50 फीसदी भी काम नहीं हुआ है। सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए। यदि जांच में जिलाधिकारी का दावा झूठा पाया जाता है तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। उनका कहना है कि 30 जनवरी के बाद गांव में काम शुरू हो गया है, लेकिन मामले की जांच अभी बाकी है। स्वतंत्र देव सिंह से मेरी कोई अनबन नहीं है, अब लोग इस मुद्दे को डायवर्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मुझे भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने पर पूरे प्रदेश से समर्थन मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में भाजपा अब ब्राह्मण समाज से आगे बढ़कर लोधी कुर्मी समाज तक पहुंच गयी है। एक तरफ कुर्मी समाज के युवा और नेता, तो दूसरी ओर लोधी समाज के समर्थक हैं। खास बात ये भी है कि— बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी लोधी समाज को नहीं मिली। लोधी नेताओं में पहले से नाराज़गी थी, और अब ये विवाद आग में घी डालने जैसा साबित हो रहा है।

बृजभूषण राजपूत का बड़ा आरोप— “हर घर नल योजना में बड़ा घोटाला हुआ है। बिना काम भुगतान हुआ, कागजों में 100% काम, लेकिन ज़मीन पर 50% भी नहीं। विधायक दावा करते हैं— उन्होंने विधानसभा में CBI जांच की मांग तक की। सवाल बड़ा है—  क्या बीजेपी दोनों पर कार्रवाई करेगी?  या फिर ये मामला ऐसे ही ठंडा कर दिया जाएगा?  और क्या हर घर नल योजना के आरोपों की होगी निष्पक्ष जांच? फिलहाल महोबा का ये टकराव बीजेपी के लिए सिर्फ एक विवाद नहीं, बल्कि 2027 से पहले की बड़ी चेतावनी है।