Wednesday, March 18, 2026
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बांगरमऊ सीट 50 साल में नहीं जीत पायी भाजपा

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उन्नाव, उन्नाव जिले की बांगरमऊ सीट वही सीट है जहां पिछले 50 सालों से बीजेपी ने एक बार भी जीत हासिल नहीं की है. हालांकि बांगरमऊ से पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. लिहाजा वह बीजेपी के विधायक हो गए थे. उन्नाव जिले की बांगरमऊ सीट से भारतीय जनता पार्टी ने श्रीकांत कटियार को खड़ा किया है. वहीं समाजवादी पार्टी ने सुरेश कुमार पाल को, बहुजन समाजवादी पार्टी ने महेश प्रसाद को और कांग्रेस ने महिला उम्मीदवार आरती बाजपेई को मैदान में उतारा है.

कुलदीप सिंह सेंगर वर्तमान में बलात्कार मामले में जेल की सजा काट रहे हैं. बीजेपी के लिए इस सीट की जनता को अपने पक्ष में समझा पाना आसान नहीं होगा. हालांकि सेंगर के पक्ष में साक्षी महाराज खुलकर मैदान में हैं और ना सिर्फ यहां की कैंडिडेट श्रीकांत कटिहार के पक्ष में लगातार प्रचार कर रहे हैं बल्कि बीजेपी के जीतने की पूरी उम्मीद लगाए हैं. अबतक यहां की जनता ने 14 बार विधानसभा के चुनाव में मतदान कर प्रतिनिधियों का चुनाव किया है. जिसमें सबसे अधिक पांच बार कांग्रेस प्रतिनिधित्व को मौका मिला है. उसके बाद समाजवादी पार्टी और फिर बीएसपी को मौका मिला. 

आजादी के बाद प्रथम चुनाव में यह सीट सुरक्षित थी. उसके बाद से यह सामान्य सीट बनी रही है. परंतु बीजेपी नेताओं को एक बार भी बांगरमऊ सीट से विधानसभा जाने का मौका नहीं मिला है. 1962 में आजादी के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में बांगरमऊ की सीट को सुरक्षित रखा गया था. जिसमें कांग्रेस से सेवाराम को सर्वप्रथम सफलता मिली. जबकि कांग्रेस द्वारा आगामी चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिये घोषित प्रत्याशी शीला दीक्षित के ससुर गोपी नाथ दीक्षित ने 1969, 1980, 1985, 1991 में सबसे अधिक चार बार विधानसभा चुनाव में विजय प्राप्त किया था. इस सीट से तीन बार समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी चुने गए. जिसमें 1993 में अशोक कुमार सिंह, 2007 में कुलदीप सिंह सेंगर और 2012 में बदलू खां ने बाजी मारी. वर्तमान में भी यह सीट समाजवादी पार्टी के पास ही है. जबकि बीएसपी के राम शंकर पाल ने 1996 और 2002 में जीत हासिल की थी. 

बीजेपी के नजरिए से यह सीट उनके लिये ज्यादा उत्साहवर्धक नहीं रही है. अभी तक बीजेपी का कोई भी प्रत्याशी इस सीट पर अपनी फतह हासिल नहीं कर पाया है. सामान्य सीट होने के बाद भी बीजेपी का बांगरमऊ सीट पर कब्जा न कर पाना अपने आप में यक्ष प्रश्न है. बीजेपी को दो बार 1993 और 1996 में दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा. 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी बदलू खां ने बीएसपी के इरशाद खां को लगभग 13 हजार मतों से हरा कर जीत हासिल की थी, जबकि बीजेपी के रामशंकर पाल को तीसरा और कांग्रेस के अशोक कुमार सिंह बेबी को चौथा स्थान हासिल हुआ था.

विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं का जिक्र किया जाये तो बाढ़, कच्ची शराब, बिजली, बेरोजगारी और नागरिक सुरक्षा यहां की बड़ी समस्यायें हैं. बाढ़ की विभीषिका से कटरी क्षेत्र के लोगों की रात की नींद गायब रहती है. विगत लोकसभा चुनाव में बीजेपी सांसद ने अच्छी खासी बढ़त बना कर सफलता अर्जित की थी. साक्षी महाराज को बांगरमऊ विधानसभा से 80500 मत मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के अरूण कुमार शुक्ला को लगभग 35837, बृजेश पाठक को 33487 औरअन्नू टण्डन को 25096 वोट मिला था.बांगरमऊ विधानसभा में नरेन्द्र मोदी का सितारा बुलन्द था. लेकिन विधानसभा का गणित लोकसभा से अलग होता है. इसके साथ ही जनता की प्राथमिकताएं भी अलग होती हैं. इस चुनाव में फैसला मोदी की लोकप्रियता का नहीं बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन का होगा. 

उन्नाव जिले में बांगरमऊ सीट पर उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार ने तेजी पकड़ ली है, अपने दल के प्रत्याशी को जिताने के लिए राजनीतिक दल कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे.

मल्हनी सीट पर बाहुबली धनंजय सिंह और एसपी प्रत्याशी के बीच कांटे की टक्कर दिखायी देती है. इस सीट पर कुल 16 प्रत्याशी  होने के चलते  दो ईवीएम मशीनें लगायी जाएंगी. उपचुनाव में जौनपुर की मल्हनी सीट एसपी बीजेपी और बाहुबली धनंजय सिंह के लिए प्रतिष्ठा की सीट बन गई है. इस सीट पर अभी तक के आकलन में पूर्व सांसद धनंजय सिंह और एसपी प्रत्याशी लकी यादव के बीच  सीधी लड़ाई दिखाई दिखाई दे रही है. निर्दलीय प्रत्याशी धनंजय सिंह को बीजेपी का वोट बैंक माना जाने वाला अति पिछड़ा, अति दलित, क्षत्रिय और कुछ ब्राह्मणों से वोट मिलने के आसार हैं. इस वजह से यहां बीजेपी पीछे दिखाई दे रही है. 

यह सीट एसपी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव के निधन से खाली हुई है. इसलिए समाजवादी पार्टी ने उनके पुत्र लकी यादव को सहानुभूति मतों के चलते मैदान में उतारा है. पारसनाथ यादव एसपी के संस्थापक  सदस्य और  मुलायम सिंह यादव  के करीबी  रहे हैं. करीबी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव से नाराजगी के बावजूद मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश की 2 विधानसभा सीटों पर प्रचार किया था, जिसमें एक शिवपाल यादव के लिए जसवंत नगर में और दूसरी मल्हनी सीट पर पारसनाथ यादव के लिए वोट मांगा था. पारसनाथ यादव दो बार सांसद चार बार मंत्री और छठवीं बार विधानसभा के लिए चुने गए थे.