ओबीसी को समानुपातिक आरक्षण कोटा के बाद हो वर्गीकरण- लौटनराम निषाद

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भाजपा ईबीसी व एमबीसी को न्याय देने की पक्षधर नहीं, ओबीसी को लड़ाने में जुटी।ओबीसी को समानुपातिक आरक्षण कोटा के बाद हो वर्गीकरण।

लखनऊ। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले ईडब्ल्यूएस के नाम से 10 प्रतिशत आरक्षण कोटा संविधान संशोधन कर 48 घंटे में ही दे दिया। संवैधानिक व्यवस्थानुसार आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।परंतु राजनीतिक लाभ के लिए भाजपा सरकार ने मा. उच्चतम न्यायालय व संविधान से परे जाकर संविधान संशोधन कर सामान्य वर्ग की 8 लाख से कम आय वालों को 10 प्रतिशत कोटा दे दिया।ओबीसी कोटा के बंटवारे की चर्चा के मुद्दे पर विकास शील इंसान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चौ. लौटनराम निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में तेजी से घटते जनाधार से परेशान भाजपा ओबीसी कोटा वर्गीकरण करने की गुणा गणित कर रही है।उन्होंने कहा कि भाजपा का मकसद अतिपिछड़ों,अत्यंत पिछड़ों को सामाजिक न्याय देना नहीं, आपस में नफरत पैदा कर 2022 में राजनीतिक लाभ उठाना है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार वंचित वर्ग को वास्तव में सामाजिक न्याय देना चाहती है तो ओबीसी को पहले समानुपातिक आरक्षण कोटा की अधिसूचना जारी करे। उत्तर प्रदेश की 54 प्रतिशत से अधिक पिछड़ी जातियों को 27 प्रतिशत ही कोटा दिया गया है,जो संविधान के अनुच्छेद 15(4),16(4) व 16(4ए) के समुचित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था के प्रतिकूल है।वीआइपी प्रदेश अध्यक्ष लौटनराम निषाद पार्टी कार्यालय में युवा मोर्चा के लखनऊ मंडल के पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा पिछड़ों,अतिपिछड़ों वंचितों की हितैषी है तो मंडल कमीशन की सभी सिफारिशों को लागू करे।पिछड़ी जातियों को कार्यपालिका,विधायिका,न्यायपालिका,निजी क्षेत्र के उपक्रमों व संस्थानों में एससी, एसटी की तरह समानुपातिक आरक्षण कोटा दिए जाने की मांग किया।


निषाद ने सामाजिक न्याय समिति के हवाले से बताया कि सामान्य वर्ग की संख्या 20.94 प्रतिशत, एससी की 24.95 प्रतिशत, एसटी की 0.56 प्रतिशत व ओबीसी की संख्या 54.05 प्रतिशत है। जिसके अनुसार पिछड़ा/ यादव 10.49 प्रतिशत,अतिपिछड़ा 10.22 प्रतिशत व सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग 33.34 प्रतिशत है।अतिपिछड़ा वर्ग में लोधी,कुर्मी,कलवार,सोनार,अर्कवंशी,गोसाई,जाट,गुजर को रखा गया है।जस्टिस राघवेन्द्र कुमार की अध्यक्षता वाली उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट भी लगभग सामाजिक न्याय समिति से मिलती जुलती ही है।निषाद ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग को 3 या 4 उपश्रेणियों में विभक्त किया जाय,पहले ओबीसी को एससी, एसटी की भांति जनसंख्या के बराबर 54 प्रतिशत आरक्षण कोटा दिया जाय।उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ओबीसी को बीसी, ईबीसी व एमबीसी को आपस में लड़ाकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है।था आर एस एस व भाजपा की डिवाइड एंड रूल का हिस्सा है। [/responsivevoice]


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