
प्रमुख सचिव की तानाशाही से बहाल नहीं हो पा रहे जेल अधीक्षक! 13 और छह माह पूर्व निलंबित हुए अधीक्षक बहाली के लिए लगा रहे शासन के चक्कर। औपचारिकता के बाद तीन माह में बहाली का शासनादेश।
राकेश यादव
लखनऊ। प्रमुख सचिव कारागार की तानाशाही से निलंबित जेल अधीक्षक बहाल नहीं हो पा रहे है। यह सवाल कारागार विभाग के अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुए है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। चर्चा है कि निलंबन के बाद तीन माह के अंदर औपचारिक कार्यवाही पूरी कर निलंबित अधिकारी का बहाल किए जाने का शासनादेश है। इस आदेश के बाद भी कारागार विभाग के करीब 13 और छह माह पूर्व निलंबित किए गए जेल अधीक्षकों को अभी तक बहाल नहीं किया गया है। कारागार विभाग में इस शासनादेश का कोई मायने नहीं रह गया है।उधर शासन के अधिकारी इस मसले पर कोई भी टिप्पणी करने से बच रहे हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक करीब सवा साल पहले गाजीपुर जेल में अनधिकृत तरीके से संचालित हो रहे मोबाइल फोन मामले में जेल अधीक्षक अरुण प्रताप सिंह को निलंबित किया गया। इसी प्रकार बीते जनवरी माह में 24 दिन के अंतराल में कन्नौज और अयोध्या जेल से दो दो बंदियों की फरारी हो गई थी। इस फरारी में अयोध्या जेल अधीक्षक यूपी मिश्रा को तत्काल और कन्नौज जेल अधीक्षक भीमसेन मुकुंद को घटना के करीब डेढ़ माह बाद निलंबित कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक इस तीन निलंबित अधीक्षकों की बहाली के लिए लगभग सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके बाद भी बहाली की फाइल शासन में अधिकारियों ने दबा रखी है। इन अधीक्षकों को अभी तक बहाल नहीं किया गया है। सूत्रों की माने तो इस विभाग में बगैर चढ़ावे के बहाली की ही नहीं जाता है।
शासनादेश के मुताबिक निलंबन को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं रखा जा सकता है। निलंबन 90 दिन में रिव्यू होना चाहिए। सुप्रीमकोर्ट के निर्देशानुसार यदि 90 दिन के भीतर चार्जशीट नहीं दी जाती तो निलंबन जारी रखना उचित नहीं माना जाता जब तक विशेष कारण न हो। 90 दिन के अंदर चार्जशीट दी जानी चाहिए। चार्जशीट का जवाब देने के लिए 10 से 15 दिन का समय दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर समय बढ़ाया जा सकता है। जवाब संतोषजनक नहीं होनेबपर जांच अधिकारी नियुक्त हो सकता है। वह गवाहों की जांच के साथ दस्तावेजों का परीक्षण और कर्मचारी को अपना पक्ष का पूरा मौका दिया जाता है। निलंबन के दौरान कर्मचारी को भत्ता मिलता है। यदि आरोप गंभीर नहीं है तो लंबे निलंबन को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। इस प्रक्रिया के लिए लगभग तीन माह की समयावधि तय की गई है। विभाग में तीनों अधीक्षक को निलंबित हुए लंबी समयावधि बीत जाने के बाद भी चढ़ावे के इंतजार में अभी तक बहाल नहीं किया गया है। इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से बात करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा।
























