
गलत प्रमोशन देने वाले जेल मुख्यालय अफसरों का कारनामा फारगो कर प्रमोशन लेने वाले कार्मिक से वसूली रोकने की कवायद शुरू जांच कमेटी के एक सदस्य को मुख्यालय से हटाकर बाहर भेजा। मामले की शिकायत करने वाले का पटल परिवर्तन कर कराया शांत।
राकेश यादव
लखनऊ। फारगो कर गलत तरीके से प्रमोशन लेने वाले वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को वसूली से बचाने की कवायद शुरू हो गई है। कारागार मुख्यालय के अधिकारी इस कार्मिक से रिकवरी करना तो दूर की बात इसको संविदा पर रखकर पुनः काम में लगाने की फ़िराक़ में जुटे हुए हैं। अधिकारियों ने इस सनसनीखेज मामले में लीपापोती शुरू कर दी है। मुख्यालय अधिकारियों ने इस मामले की जांच के लिए गठित कमेटी के एक अधिकारी को रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं करने पर मुख्यालय से हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित कर और शिकायतकर्ता को एक महत्वपूर्ण पटल पर भेजकर मामले को दबाने में जुटा है। जिससे फ़ार्गो कर प्रमोशन लेने वाले कार्मिक से वसूली नहीं की जा सके। मामला विभागीय कार्मिकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2002 और 2003 में प्रमोशन फारगो कर प्रमोशन लेने वाले मुख्यालय कार्मिकों की मुख्यालय के ही एक कार्मिक ने आला अफसरों से शिकायत की। शिकायत की जांच के लिए मुख्यालय के विभागाध्यक्ष ने एक कमेटी गठित की। डीआईजी लखनऊ परिक्षेत्र रामधनी की अगुवाई में गठित तीन सदस्यीय कमेटी में वरिष्ठ अधीक्षक शशिकांत सिंह और अकाउंट अफसर शशिकला को शामिल किया गया। सूत्र बताते है कि प्रमोशन फारगो कर प्रमोशन लेने का मामला सत्य पाए जाने पर कमेटी के एक सदस्य ने जब साइन करने से मना किया तो उसे मुख्यालय से हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया। यही नहीं प्रमोशन लेने वाले कार्मिक से वसूली नहीं होने पाए इसके लिए शिकायतकर्ता को पटल परिवर्तन कर अच्छे पटल पर भेजकर गलत तरीके से चार प्रमोशन लेने वाले वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमिताभ मुखर्जी को वसूली से बचाया जा रहा है।
प्रमोशन फारगो कर गलत तरीके से चार प्रमोशन लेकर कनिष्ठ लिपिक से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बना अमिताभ मुखर्जी 31 मई 2026 को सेवानिवृत हो रहा है। सरकार को करोड़ो रुपए के राजस्व का चुना लगाने वाले इस कार्मिक से सेवानिवृत्ति से पूर्व वसूली नहीं होने पाए इसके लिए मुख्यालय के एआईजी (अपर महानिरीक्षक कारागार) प्रशासन समेत अन्य अफसर तमाम तरह की कवायद करने में जुटे हुए है। सूत्रों की माने तो सरकार को करोड़ो के राजस्व का चुना लगाने वाले इस भ्रष्ट कामधेनु कार्मिक को सेवानिवृत होने के बाद संविदा पर नियुक्त कर आगे भी काम कराने की फ़िराक़ में जुटे हुए है। उधर इस धांधली के संबंध में जब एआईजी कारागार प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा।
मुख्यालय के पांच कार्मिक से होनी राजस्व की वसूली
वर्ष 2002-2003 में कनिष्ठ लिपिक से वरिष्ठ लिपिक पद पर प्रोन्नति पाने वाले करीब दो दर्जन कार्मिकों ने राजधानी लखनऊ में बने रहने के लिए प्रमोशन लेने से इनकार (फारगो) कर दिया था। इन 24 कार्मिकों में चार की मृत्यु हो गई 15 सेवानिवृत हो गए। फारगो के बाद प्रमोशन लेने वाली एक महिला से वसूली भी की गई। वर्तमान समय में पांच कार्मिक अमिताभ मुखर्जी, सुरेश कुमार, अलका जायसवाल, राजेश कुमार और राधेश्याम से वसूली होनी है वह आज मुख्यालय में कार्यरत है।
























