
आयुष्मान मरीज को बाहर की दवाएं लिखीं, दूसरी आंख की जांच।केजीएमयू में लापरवाही का आरोप। दूसरी जांच में खुली पोल, सेवा के नाम पर सिस्टम गोल।
त्रिनाथ शर्मा
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के नेत्र रोग विभाग में चिकित्सा लापरवाही और नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि आयुष्मान योजना की लाभार्थी को न केवल बाहर से महंगी दवाएं और लेंस खरीदने के लिए मजबूर किया गया, बल्कि गलत आंख की जांच कर रिपोर्ट भी तैयार कर दी गई।
काकोरी क्षेत्र के जेहटा निवासी 57 वर्षीय गीता कश्यप को दाहिनी आंख में मोतियाबिंद की शिकायत थी। उनके पति गणेश प्रसाद कश्यप के अनुसार, 20 मार्च को केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग में जांच कराई गई, लेकिन रिपोर्ट में बाईं आंख में खून के धब्बे का उल्लेख कर दिया गया। जबकि मरीज को समस्या दाहिनी आंख में थी।
जब यह रिपोर्ट बलरामपुर अस्पताल में दिखाई गई, तो वहां डॉक्टरों ने बाईं आंख को सामान्य बताया। इसके बावजूद केजीएमयू में ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी गई और डॉक्टरों ने कथित रूप से कहा कि रिपोर्ट पर ध्यान न दें, ऑपरेशन सही आंख का होगा।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि डॉक्टरों ने करीब 18 दवाओं की पर्ची लिखी और तय मेडिकल स्टोर से ही दवाएं व लेंस खरीदने को कहा। मेडिकल स्टोर पर लेंस सहित कुल खर्च लगभग 15 हजार रुपये बताया गया और नगद भुगतान का दबाव बनाया गया।
गणेश प्रसाद कश्यप ने बताया कि उनके पास आयुष्मान भारत योजना का कार्ड होने के बावजूद अस्पताल कर्मियों ने लाभ देने से इनकार कर दिया और कहा कि यहां योजना लागू नहीं है।
परिजनों का यह भी आरोप है कि रात करीब 11 बजे कॉल कर उन्हें जांच की फाइल तुरंत नेत्र विभाग में जमा करने के लिए कहा गया, जिससे वे परेशान होकर रात में ही अस्पताल पहुंचे।
वहीं, केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. के.के. सिंह ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि गलत जांच और बाहर की दवाएं लिखने के आरोपों की जांच कराई जाएगी।
गौरतलब है कि हाल ही में केजीएमयू प्रशासन ने बाहर की दवाएं लिखने वाले डॉक्टरों पर सख्ती के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद ऐसे मामले सामने आना अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
दूसरी जांच में फिर वही कहानी सामने आई, बाहर की दवाओं का दबाव, आयुष्मान योजना से मरीज वंचित, और रात में फाइल जमा कराने का फरमान। पहले भी सवाल उठे थे, पर जवाब हवा में उड़ गए। अब लगता है जांच नहीं, जुगाड़ की फाइलें तेज चल रही हैं, मरीज की राहत अब भी इंतज़ार में है।
























