
डॉ.सत्यवान सौरभ
पापा की गोदी गर्म-गर्म, जैसे धूप सुहानी।
बैठा हूँ मैं चिपक के उनसे, दुनिया लगे कहानी।
छोटी बोतल हाथ में मेरी, घूंट-घूंट मुझे पिलाते।
पापा हँसकर देख रहे हैं, मुझ पर प्यार लुटाते।
पापा संग जब खेलूँ मैं, दिल मेरा खिल जाता।
उनकी गोदी, उनका कंधा, सबसे प्यारा लगता।
मेरे पापा सबसे अच्छे, मुझको खूब हँसाते।
छोटा हूँ मैं, बड़ा बनूँगा, उन जैसा बन जाऊँगा।
पापा की गोदी प्यारी है, मुझको सबसे न्यारी है।
पापा मेरे सबसे अच्छे हैं, दुनिया में सबसे सच्चे हैं।
























