
डॉ.रोहित गुप्ता (आयुर्वेदिक)
भूमि आंवला प्रकृति की दी हुई एक ऐसी अनमोल औषधि है, जिसे आयुर्वेद में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। छोटा सा दिखने वाला यह पौधा औषधीय गुणों का खजाना है। इसे “भुई आंवला” या “भूम्यामलकी” के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में भूमि आंवला को एक बेहतरीन लीवर टॉनिक और “पथरी नाशक पौधा” कहा गया है। सदियों से इसका उपयोग लीवर की समस्याओं, किडनी स्टोन, पाचन संबंधी विकारों और मधुमेह जैसी बीमारियों के उपचार में किया जाता रहा है। प्राकृतिक औषधि होने के कारण यह शरीर को बिना अधिक दुष्प्रभाव के लाभ पहुंचाने के लिए भी जानी जाती है। आज भी आयुर्वेदिक चिकित्सा में भूमि आंवला को स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है और कई बीमारियों के घरेलू उपचार में इसका प्रयोग किया जाता है।
प्रकृति ने हमें बहुत सी अनमोल औषधियां दी है और उनमें से एक है भूमि आंवला। जिसे “भुई आंवला” या “भूम्यामलकी” भी कहा जाता है। यह पौधा छोटा जरूर होता है, लेकिन इसके औषधीय गुण बहुत बड़े हैं। आयुर्वेद में भूमि आंवला को बेहतरीन लीवर टॉनिक और “पथरी नाशक पौधा” कहा गया है। इसका उपयोग सदियों से लीवर की बीमारियों, किडनी स्टोन, पाचन विकार और मधुमेह जैसी समस्याओं के उपचार में किया जाता रहा है।
—– भूमि आंवला के लाभ —–
किडनी स्टोन में लाभकारी-भूमि आंवला का सबसे बड़ा गुण यह है कि यह गुर्दे की पथरी को गलाने और मूत्रमार्ग से बाहर निकालने में मदद करता है। यह पेशाब की रुकावट, जलन और मूत्र संबंधी संक्रमणों को भी दूर करता है।
लीवर को मजबूत बनाए- यह लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और हेपेटाइटिस, फैटी लिवर व जॉन्डिस जैसी बीमारियों में अत्यंत लाभकारी है। यह लीवर को विषैले पदार्थों से मुक्त करके शरीर को डिटॉक्स करता है।
पाचन तंत्र को सुधारने में- भूमि आंवला गैस, अपच, पेट दर्द और कब्ज जैसी समस्याओं में बहुत उपयोगी है। इसका नियमित सेवन पाचन शक्ति को मजबूत करता है और भोजन का सही अवशोषण सुनिश्चित करता है।
शरीर की गर्मी और त्वचा की समस्या में राहत- यह शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करता है, जिससे त्वचा पर निकलने वाले दाने, खुजली या एलर्जी जैसी समस्याएँ कम होती हैं।
ब्लड शुगर रखें नियंत्रित- इस पौधे में एंटी-डायबिटिक तत्व होते हैं जो रक्त शर्करा को नियंत्रित रखते हैं और इंसुलिन के स्तर को संतुलित करते हैं।
खून को साफ करने में- यह रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर त्वचा को स्वस्थ बनाए रखता है।
संक्रमण से बचाव- भूमि आंवला में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को इंफेक्शन से बचाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
भूमि आंवला का काढ़ा बनाने का तरीका
ताज़े पौधे से-
5–6 टहनियाँ (पत्ते और फल सहित) लें। उन्हें साफ पानी से धो लें, फिर 1 कप पानी उबालें और उसमें टहनियाँ डालें।लगभग 5–7 मिनट धीमी आँच पर पकाएँ। इसे छानकर गुनगुना पीएँ। स्वाद के लिए थोड़ा शहद या नींबू मिला सकते हैं।
सूखे पत्तों या पाउडर से 1 कप पानी में 1 चम्मच सूखा भूमि आंवला पाउडर डालें, 5 मिनट तक उबालें। इसे सुबह खाली पेट पीना सबसे ज्यादा लाभदायक होता है।
साधारण ढंग से ️ पत्तियों और फलों का उपयोग
पत्तियाँ- रोज सुबह 4–5 ताज़ी पत्तियाँ चबाना लीवर और पाचन के लिए बहुत लाभदायक है।
फल- छोटे हरे फलों का रस या पेस्ट बनाकर पीने से पेशाब की जलन, पथरी और मूत्र संक्रमण में राहत मिलती है।
सूखा पाउडर- 1 चम्मच सूखा पाउडर गुनगुने पानी के साथ रोज लेना शरीर को डिटॉक्स करता है और लीवर को मजबूत बनाता है।
ध्यान रखें
लगातार 15–20 दिन सेवन के बाद 5–7 दिन का ब्रेक लेना जरूरी है। अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर में ठंडक अधिक बढ़ सकती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ इसका सेवन आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह से ही करें। विशेष परिस्थितियों में कुशल वैद्य के परामर्श से ही सेवन करें।























