
आयुर्वेदिक डॉ.रोहित गुप्ता
यकृत (LIVER) और आंतें हमारे पाचन तंत्र की दो सबसे महत्वपूर्ण कड़ियां हैं, जो मिलकर शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। लिवर द्वारा निर्मित पित्त (बाइल) आंतों में जाकर भोजन, खासकर वसा (फैट) के पाचन में मदद करता है। ऐसे में अगर लिवर सही ढंग से काम नहीं करता, तो इसका सीधा असर आंतों पर पड़ता है और पाचन प्रक्रिया बिगड़ने लगती है। नतीजतन गैस, कब्ज, पेट फूलना, अपच और अन्य पेट संबंधी समस्याएं सामने आने लगती हैं। यही वजह है कि लिवर और आंतों का संतुलन बनाए रखना अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। यकृत (लिवर) की आंत में दिक्कत क्या है। लिवर और आंतें आपस में जुड़ी होती हैं। लिवर ठीक से काम न करे तो पाचन, गैस, कब्ज, सूजन और पेट की अन्य समस्याएं होने लगती हैं।
यकृत की आंत में दिक्कत होने के कारण
- फैटी लिवर
- कब्ज और गैस की समस्या
- अधिक तला-भुना और बाहर का खाना
- शराब का सेवन
- दवाइयों का ज्यादा उपयोग
- हेपेटाइटिस
- संक्रमण (इन्फेक्शन)
- कम पानी पीना
- ज्यादा तनाव
यकृत की आंत में दिक्कत के लक्षण
- पेट फूलना और गैस
- कब्ज या दस्त
- भूख कम लगना
- पेट के दाहिने हिस्से में दर्द
- मुंह का स्वाद खराब
- जी मिचलाना
- कमजोरी
- त्वचा या आंखों में पीलापन (गंभीर स्थिति)
यकृत की आंत की दिक्कत का घरेलू इलाज
1 सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पिएं
2 गिलोय का काढ़ा दिन में 1 बार लें
3 त्रिफला चूर्ण 1 चम्मच रात को गुनगुने पानी के साथ लें
4 एलोवेरा जूस 20–30 ml रोज लें
5 चुकंदर, गाजर और मूली का सलाद खाएं
6 हल्दी वाला गुनगुना दूध रात को लें
7 छाछ में भुना जीरा डालकर पिएं
8 अधिक पानी पिएं (8–10 गिलास)
9 शराब और धूम्रपान पूरी तरह बंद करें
योग और प्राणायाम
- पवनमुक्तासन
- भुजंगासन
- धनुरासन
- कपालभाति (हल्का)
- अनुलोम-विलोम
खान-पान में सावधानी
- तला-भुना और जंक फूड न खाएं
- अधिक तेल और मसाले से बचें
- हरी सब्जियां और फल अधिक खाएं
- बाहर का खाना कम करें
- समय पर भोजन करें
कब डॉक्टर को दिखाएं
- पेट दर्द ज्यादा बढ़ जाए
- उल्टी या तेज बुखार हो
- आंख या त्वचा पीली होने लगे
- लगातार कमजोरी रहे
- लिवर रिपोर्ट खराब आए
सावधानी- यह सामान्य घरेलू जानकारी है। लिवर या आंत की गंभीर समस्या में डॉक्टर की जांच और सलाह जरूरी है।
























