Tuesday, January 20, 2026
Advertisement
Home राजनीति ओबीसी आरक्षण पर बवाल…

ओबीसी आरक्षण पर बवाल…

305

चौ.लौटनराम निषाद

गौरतलब है की सरकार द्वारा लोकसभा व राज्यसभा में संविधान के अनुच्छेद 342-ए और 366(26) सी के संशोधन विधेयक पारित होने से राज्यों के पास ओबीसी सूची में अपनी मर्जी से जातियों को अधिसूचित करने का अधिकार होगा। महाराष्ट्र में मराठा समुदाय, हरियाणा में जाट समुदाय, गुजरात में पटेल समुदाय और कर्नाटक में लिंगायत समुदाय को ओबीसी वर्ग में शामिल होने का मौका मिल सकता है।सब कुछ ठीक है लेकिन सरकार संवैधानिक न्याय के प्राविधान को नजरअंदाज कर पिछडों के अधिकारों का बंदरबाट ही कराने में जुटी हुई है।
क्या किसी दलित नेता ने लड़ी पिछड़ों के आरक्षण की लड़ाई? डॉ. भीमराव अम्बेडकर को बहुजन का मसीहा करार देने पर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है।क्योंकि आजादी के पूर्व कभी अम्बेडकर सम्पूर्ण शूद्र वर्ण के अधिकार के पक्ष में आवाज़ नहीं उठाए।बल्कि सिर्फ अछूत व शेड्यूल्ड कास्ट की ही बात करते थे और इन्हीं को केन्द्रित कर लड़ाई भी लड़े।हाँ,मान्यवर कांशीराम जी पिछडों वंचितों के अधिकार की लड़ाई ईमानदारी से लड़े।देश मे बहुजन के एकमात्र मसीहा मान्यवर कांशीराम जी ही हैं।मण्डल आयोग की सिफारिश लागू कराने में रामबिलास पासवान जी का भी अहम योगदान रहा।

ओबीसी उपवर्गीकरण कितना उचित-

केन्द्र सरकार ने ओबीसी उपवर्गीकरण के लिए 12013 में राष्ट्रीय पिछड़ावर्ग आयोग के अध्यक्ष वी.ईश्वरैया(पूर्व चीफ जस्टिस-आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय) के नेतृत्व में एक आयोग का गठन किया था।जिसने 2016 में अपनी रिपोर्ट सरकार को देते हुए 3 श्रेणियों में ओबीसी का उपवर्गीकरण कर 9-9 प्रतिशत कोटा की सिफारिश की।लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया।दूसरी तरफ अक्टूबर 2017 में दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस जी.रोहिणी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय ओबीसी उपवर्गीकरण जाँच आयोग का गठन किया।जिसका 6 जून,2022 को 13 विस्तार देते हुए 31 जनवरी,2023 तक का कार्यकाल दिया गया है।

यह आयोग ओबीसी को 4 उपश्रेणियों में बाँटने का खाका तैयार किया है।केन्द्रीय सूची में ओबीसी की 2699 जातियाँ शामिल हैं,जिनमे से 10 जातियों ने ही अधिक हिस्से पर कब्जा किया है।उत्तर प्रदेश सरकार ने 2001 में हुकुम सिंह गुर्जर की अध्यक्षता में सामाजिक न्याय समिति बनाया था।जिसने 2002 में अधिसूचना भी जारी किया जो न्याय की पेंच में फँस गया।जस्टिस राघवेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश पिछड़ावर्ग सामाजिक न्याय समिति का गठन 2018 में किया।जिसने 2019 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपते हुए पिछड़ी जाति, अतिपिछड़ी जाति व अत्यंत पिछड़ी जातियों को क्रमशः 7 प्रतिशत,11 प्रतिशत व 9 प्रतिशत कोटा देने की सिफारिश किया।

ओबीसी का उपवर्गीकरण कोई नई बात नई है।आन्ध्र प्रदेश में ओबीसी को 5 व केरल में 4 श्रेणियों में विभाजन है। तमिलनाडु, पुड्डुचेरी, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना, जम्मू कश्मीर में भी ओबीसी का 2 श्रेणियों में विभाजन है।आरक्षण के समान वितरण के लिए ओबीसी का उपवर्गीकरण करने के लिए ओबीसी की जातिगत जनगणना व आनुपातिक कोटा की व्यवस्था आवश्यक है।बिना जातिगत जनगणना के ओबीसी का उपवर्गीकरण न्यायसंगत व व्यवहारिक नहीं होगा।