Wednesday, January 28, 2026
Advertisement
Home समाज अन्य बड़ी खबरें थायराइड दूर करने का उपाय

थायराइड दूर करने का उपाय

180
थायराइड दूर करने का उपाय
थायराइड दूर करने का उपाय

आयुर्वेदिक डॉ.रोहित गुप्ता

थायराइड एक तितली के आकार की ग्रंथि होती है जो एडम एप्पल के ठीक नीचे गर्दन में स्थित होती है। इसे मुख्य ग्रंथि के रूप में जाना जाता है जो शरीर की ऊर्जा और चयापचय को नियंत्रित करने में मदद करती है। जब थायरॉयड अत्यधिक सक्रिय हो जाती है और थायरोक्सिन हार्मोन की अत्यधिक मात्रा में उत्पादन करने लगती है तो इस स्थिति को हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है। (और दूसरी तरफ, थायरोक्सिन हार्मोन के कम मात्रा में उत्पादन को हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है) थायराइड दूर करने का उपाय

हाइपरथायरायडिज्म के सामान्य कारणों में शामिल हैं ऑटोइम्यून डिसॉर्डर जिसे ग्रेव्स रोग कहा जाता है साथ ही थायरॉयड ग्रंथि की सूजन, थायरॉयड हार्मोन का असामन्य स्राव, आयोडीन का अत्यधिक सेवन या थायरॉयड में सौम्य गांठ या नोड्यूल आदि शामिल हैं। हाइपरथायरॉडीजम किसी को भी हो सकता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ये स्तिथि आठ गुना अधिक होती है। यह 30 की उम्र की शुरुआत में ही विकसित होने लगती है लेकिन इसके लक्षण 60 से अधिक महिलाओं में ज़्यादा सामान्य हैं।

कई तरह के संकेत

हाइपरथायरोडिज़्म के लक्षणों को बताते हैं जैसे वज़न का घटना, अनियमित दिल की धड़कन, घबराहट, अत्यधिक पसीना, मासिक धर्म चक्र में बदलाव, गर्दन के आधार पर सूजन, थकान, मांसपेशियों की कमजोरी और सोने में कठिनाई महसूस होना आदि शामिल हैं। हाइपरथायरायडिज्म के कई लक्षण अन्य स्थितियों के लिए भी बहुत आम है। इसलिए समस्या को जल्द पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है।

थायरॉयड का जल्द निदान दवाओं, सप्लीमेंट्स और जीवनशैली में बदलाव लाकर किया जा सकता है। हाइपरथायरायडिज्म का इलाज कुछ प्राकर्तिक तत्वों से भी किया जा सकता है। हालाँकि कोई भी उपचार लेने से पहले आप अपने डॉक्टर से सभी तरह की जानकारी ले लें।

तो आईये आज आपको बताते हैं कुछ थायराइड कम करने के घरेलू उपाय।

थायराइड खत्म करने का उपाय है ओमेगा 3 फैटी एसिड।

अगर आपके शरीर को पर्याप्त ओमेगा -3 फैटी एसिड नहीं मिल रहा है तो हार्मोनल असंतुलित हो सकता है जिसमें थायराइड हार्मोन शामिल हैं। ये आवश्यक फैटी एसिड हार्मोन के लिए बिल्डिंग ब्लॉक हैं जो प्रतिरक्षा फंक्शन और सेल की वृद्धि को नियंत्रित करते हैं।

आप अपने आहार में ओमेगा -3 फैटी एसिड की मात्रा को और अधिक मछली, फ्लेक्ससीड्स और अखरोट आदि को खाकर बढ़ा सकते हैं।

थायराइड कम करने में सहायक है ब्रोकली – ब्रोकोली एक क्रूसीफेरस सब्ज़ी है जिसमें आइसोथियोसाइनेट्स और गोईट्रोजन्स नामक पदार्थ होते हैं जो थायरॉयड को बहुत अधिक हार्मोन बनाने से रोकते हैं। इसलिए हाइपरथायरायडिज्म से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को जितनी ज्यादा हो सके बिना पके ब्रोकोली खाने की कोशिश करनी चाहिए। अन्य क्रूसीफेरस सब्ज़ियां जैसे फूलगोभी, शलजम, सरसों का साग और मूली आदि सहायक होती हैं।

थायराइड से बचाव का उपाय है एंटीऑक्सीडेंट

एंटीऑक्सिडेंट युक्त आहार हाइपरथायरायडिज्म को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। हाइपरथायरायडिज्म की वजह से थायरॉयड हार्मोन का स्तर बढ़ता है जिसकी वजह से शरीर में फ्री रेडिकल डैमेज और ऑक्सीडेटिव बढ़ने लगते हैं।

एंटीऑक्सिडेंट ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने के लिए फायदेमंद हैं। अपने आहार में विटामिन सी, विटामिन ई, बीटा कैरोटीन, सेलेनियम और मैग्नीशियम जैसे खाद्य पदार्थों को मिलाएं। इन पोषक तत्वों को प्राप्त करने के लिए अपने आहार में ताजे फल और सब्जियां शामिल करें जैसे जामुन, अंगूर, टमाटर और बेल मिर्च आदि। आप मल्टीविटामिन भी ले सकते हैं। इसके अलावा अपने आहार में अधिक प्रोटीन लेना न भूलें। एक अतिरक्त थायरॉयड आपकी मांसपेशियों को और अधिक आसानी से तोड़ने का कारण बनता है। प्रोटीन विशेष रूप से मांसपेशियों और ताकत को बढ़ाता है। प्रोटीन प्राप्त करने के लिए आप एक या दो चम्मच मट्ठा प्रोटीन पाउडर अपने आहार में जोड़ सकते हैं। इसके अलावा, अपने आहार में बीन्स, नट्स, अखरोट बटर, बीजों और दही को ज़रूर शामिल करें।

थायराइड दूर करने का उपाय है समुंद्री सब्ज़िया

समुंद्री सब्ज़ियां आयोडीन का एक अच्छा स्रोत होती हैं जो थायराइड स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज है। समुद्री सब्जियों में मौजूद प्राकृतिक आयोडीन थायरॉयड संबंधी विकारों जैसे वजन में उतार-चढ़ाव और लसीका प्रणाली में जमाव को सामान्य रखता है। इन सब्जियों में भी अच्छी मात्रा में विटामिन के, बी-विटामिन फोलेट, मैग्नीशियम, लोहा और कैल्शियम शामिल होता है। समुद्री सब्जियों में से कुछ जो आप हाइपरथायरायडिज्म के उपचार में उपयोग कर सकते हैं वो हैं केल्प, कोम्बु, हिजीकी, नोरि, आदि। ये आमतौर पर आपको दुकानों में सूखे पदार्थ के रूप में उपलब्ध हो जाएंगी।

आप इन सब्ज़ियों को क्रश या काट के सॉस, पिज़्ज़ा, चावल और सलाद आदि में इस्तेमाल कर सकते हैं।

पत्ता गोबी से थायराइड को करें कंट्रोल – पत्ता गोभी सबसे उपयोगी खाद्य पदार्थों में से एक है जो हाइपरथायरायडिज्म के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। गोभी में गोइट्रोजंस की मात्रा बहुत अधिक होती है जो थायराइड हार्मोन के उत्पादन को कम करने में मदद करता है। अच्छे परिणाम के लिए भुना हुआ पत्ता गोभी खाएं।

थायराइड कम करने के लिए बैरी का करें उपयोग- बैरी विटामिन और विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से समृद्ध होती हैं जो कि थायरॉयड ग्रंथि की सूजन को कम करने में मदद करती है। आप विभिन्न प्रकार के बैरी जैसे ब्लूबेरी, ब्लैकबेरी, स्ट्रॉबेरी, चेरी और अन्य खा सकते हैं।

आंवला के उपयोग से थायराइड से बचें

आंवला हाइपरथायरायडिज्म सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करता है। आंवला थायराइड हार्मोन के उत्पादन को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। शहद के साथ भारतीय आंवला के पाउडर को मिलाकर मोटा पेस्ट बनाकर सुबह को नाश्ते में खाएं। ये कुछ खाद्य पदार्थ हैं जो हाइपरथायरायडिज्म के उपचार में मदद करते हैं और थायरॉयड हार्मोन के उत्पादन को दबा देते हैं। इसके अलावा, हाइपरथोरायडिज्म को रोकने के लिए डेयरी उत्पादों और कैफीन का सेवन सीमित रखने की कोशिश करें।

Thyroid हाइपर और हाइपो थाइरोइड का घरेलु और सफल उपचार

आज कल की भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में ये समस्या आम सी हो गयी हैं, थायराइड की गोली निरन्तर लेने से उसके घातक साइड इफेक्ट। एलोपैथि में थाइरोइड ग्रंथी ठीक नहीं की जाती है बल्कि इस रोग को मैनेज किया जाता है। रोग के साथ जीना सिखाया जाता है।स्वयं थायराइड ग्रंथी नियमित तैयार हार्मोन मिलते रहने से निष्क्रिय हो जाती है।

थायराइड ग्रंथी एक महत्पूर्ण यदि उचित मात्रा में गोली न ले तो थकान,सरदर्द ,चिडचिडाहट ,पसीना आना ,धडकनों में अनियमितता, अनिंद्रा आदि हो सकते हैl अथार्त अपने डॉक्टर से डोस समय समय पर तय करा लें …

थायराइड की गोली उचित मात्रा में नियमित लेने से भी कैल्शियम की कमी हो जाती है,फलस्वरूप धीरे धीरे हड्डीया कमजोर होने से ओस्टीपोरोसिस हो जाता हैl इससे बदन में दर्द रहने लगता हैl कैल्शियम की कमी आगे चल कर गुर्दो को भी ख़राब करने लगती हैl नियमित थाइरोइड की गोली लेते रहने से मूड खराब होना, सरदर्द ,पसीना आना , धडकनों में अनियमितता, दस्त लगना व हाथों में कम्पन्न भी हो सकते हैंl लम्बे समय तक गोली लेने पर ह्रदय, अग्नाशय व जिगर खराब हो सकते है.

थायराइड मानव शरीर मे पाए जाने वाले एंडोक्राइन ग्लैंड में से एक है। थायरायड ग्रंथि गर्दन में श्वास नली के ऊपर एवं स्वर यन्त्र के दोनों ओर दो भागों में बनी होती है। इसका आकार तितली जैसा होता है। यह थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है जिससे शरीर के ऊर्जा क्षय, प्रोटीन उत्पादन एवं अन्य हार्मोन के प्रति होने वाली संवेदनशीलता नियंत्रित होती है। थॉयराइड ग्रंथि तितली के आकार की होती है जो गले में पाई जाती है। यह ग्रंथि उर्जा और पाचन की मुख्य ग्रंथि है। यह एक तरह के मास्टर लीवर की तरह है जो ऐसे जीन्स का स्राव करती है जिससे कोशिकाएं अपना कार्य ठीक प्रकार से करती हैं। इस ग्रंथि के सही तरीके से काम न कर पाने के कारण कई तरह की समस्यायें होती हैं। इस लेख में विस्तार से जानें थॉयराइड फंक्शन और इसके उपचार के बारे में। थॉयराइड को साइलेंट किलर माना जाता है, क्योंकि इसके लक्षण व्यक्ति को धीरे-धीरे पता चलते हैं और जब इस बीमारी का निदान होता है तब तक देर हो चुकी होती है। इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी से इसकी शुरुआत होती है लेकिन ज्यादातर चिकित्सक एंटी बॉडी टेस्ट नहीं करते हैं जिससे ऑटो-इम्युनिटी दिखाई देती है।

यह ग्रंथि शरीर के मेटाबॉल्जिम को नियंत्रण करती है यानि जो भोजन हम खाते हैं यह उसे उर्जा में बदलने का काम करती है। इसके अलावा यह हृदय, मांसपेशियों, हड्डियों व कोलेस्ट्रोल को भी प्रभावित करती है। आमतौर पर शुरुआती दौर में थायराइड के किसी भी लक्षण का पता आसानी से नहीं चल पाता, क्योंकि गर्दन में छोटी सी गांठ सामान्य ही मान ली जाती है। और जब तक इसे गंभीरता से लिया जाता है, तब तक यह भयानक रूप ले लेता है।

आखिर क्या कारण हो सकते है जिनसे थायराइड होता है..?

  • थायरायडिस- यह सिर्फ एक बढ़ा हुआ थायराइड ग्रंथि (घेंघा) है, जिसमें थायराइड हार्मोन बनाने की क्षमता कम हो जाती है।
  • इसोफ्लावोन गहन सोया प्रोटीन, कैप्सूल, और पाउडर के रूप में सोया उत्पादों का जरूरत से ज्यादा प्रयोग भी थायराइड होने के कारण हो सकते है।
  • कई बार कुछ दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव भी थायराइड की वजह होते हैं।
  • थायराइट की समस्या पिट्यूटरी ग्रंथि के कारण भी होती है क्यों कि यह थायरायड ग्रंथि हार्मोन को उत्पादन करने के संकेत नहीं दे पाती।
  • भोजन में आयोडीन की कमी या ज्यादा इस्तेमाल भी थायराइड की समस्या पैदा करता है।
  • सिर, गर्दन और चेस्ट की विकिरण थैरेपी के कारण या टोंसिल्स, लिम्फ नोड्स, थाइमस ग्रंथि की समस्या या मुंहासे के लिए विकिरण उपचार के कारण।
  • जब तनाव का स्तर बढ़ता है तो इसका सबसे ज्यादा असर हमारी थायरायड ग्रंथि पर पड़ता है। यह ग्रंथि हार्मोन के स्राव को बढ़ा देती है।
  • यदि आप के परिवार में किसी को थायराइड की समस्या है तो आपको थायराइड होने की संभावना ज्यादा रहती है। यह थायराइड का सबसे अहम कारण है।

ग्रेव्स रोग थायराइड का सबसे बड़ा कारण है। इसमें थायरायड ग्रंथि से थायरायड हार्मोन का स्राव बहुत अधिक बढ़ जाता है। ग्रेव्स रोग ज्यादातर 20 और 40 की उम्र के बीच की महिलाओं को प्रभावित करता है, क्योंकि ग्रेव्स रोग आनुवंशिक कारकों से संबंधित वंशानुगत विकार है, इसलिए थाइराइड रोग एक ही परिवार में कई लोगों को प्रभावित कर सकता है।

थायराइड का अगला कारण है गर्भावस्था, जिसमें प्रसवोत्तर अवधि भी शामिल है। गर्भावस्था एक स्त्री के जीवन में ऐसा समय होता है जब उसके पूरे शरीर में बड़े पैमाने पर परिवर्तन होता है, और वह तनाव ग्रस्त रहती है। रजोनिवृत्ति भी थायराइड का कारण है क्योंकि रजोनिवृत्ति के समय एक महिला में कई प्रकार के हार्मोनल परिवर्तन होते है। जो कई बार थायराइड की वजह बनती है।

थायराइड के लक्षण

कब्ज- थाइराइड होने पर कब्ज की समस्या शुरू हो जाती है। खाना पचाने में दिक्कत होती है। साथ ही खाना आसानी से गले से नीचे नहीं उतरता। शरीर के वजन पर भी असर पड़ता है।

हाथ-पैर ठंडे रहना– थाइराइड होने पर आदमी के हाथ पैर हमेशा ठंडे रहते है। मानव शरीर का तापमान सामान्य यानी 98.4 डिग्री फॉरनहाइट (37 डिग्री सेल्सियस) होता है, लेकिन फिर भी उसका शरीर और हाथ-पैर ठंडे रहते हैं।

प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना- थाइराइड होने पर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम़जोर हो जाती है। इम्यून सिस्टम कमजोर होने के चलते उसे कई बीमारियां लगी रहती हैं।

थकान- थाइराइड की समस्या से ग्रस्त आदमी को जल्द थकान होने लगती है। उसका शरीर सुस्त रहता है। वह आलसी हो जाता है और शरीर की ऊर्जा समाप्त होने लगती है।

त्वचा का सूखना या ड्राई होना- थाइराइड से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा सूखने लगती है। त्वचा में रूखापन आ जाता है। त्वचा के ऊपरी हिस्से के सेल्स की क्षति होने लगती है जिसकी वजह से त्वचा रूखी-रूखी हो जाती है।

जुकाम होना- थाइराइड होने पर आदमी को जुकाम होने लगता है। यह नार्मल जुकाम से अलग होता है और ठीक नहीं होता है।

डिप्रेशन- थाइराइड की समस्या होने पर आदमी हमेशा डिप्रेशन में रहने लगता है। उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता है, दिमाग की सोचने और समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है। याद्दाश्त भी कमजोर हो जाती है।

बाल झड़ना- थाइराइड होने पर आदमी के बाल झड़ने लगते हैं तथा गंजापन होने लगता है। साथ ही साथ उसके भौहों के बाल भी झड़ने लगते है।

मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और साथ ही साथ कमजोरी का होना भी थायराइड की समस्या के लक्षण हो सकते है।

शारीरिक व मानसिक विकास- थाइराइड की समस्या होने पर शारीरिक व मानसिक विकास धीमा हो जाता है।

अगर आपको ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई दे तो अपने डाक्टर से संपर्क करें आपको थाइराइड समस्या हो सकती है।

अति असरकारक घरेलु उपाय

सुबह खाली पेट लौकी का जूस पिए, घर में ही गेंहू के जवारों का जूस निकाल कर पिए, इसके बाद एक गिलास पानी में हर रोज़ 30 मिली एलो वेरा जूस और 2 बूँद तुलसी की डाल कर पिए, एलो वेरा जूस आपको किसी बढ़िया कंपनी का यूज़ करना होगा, जिसमे फाइबर ज़्यादा हो, सिर्फ कोरा पानी ना हो। बाजार से आज कल पांच तुलसी बहुत आ रही हैं, किसी बढ़िया कंपनी की आर्गेनिक पांच तुलसी ले। ये सब करने के आधे घंटे तक कुछ भी न खाए पिए, इस समय में आप प्राणायाम करे।

अखरोट और बादाम है फायदेमंद

अखरोट और बादाम में सेलेनियम नामक तत्व पाया जाता है जो थॉयराइड की समस्या के उपचार में फायदेमंद है। 1 आंउस अखरोट में 5 माइक्रोग्राम सेलेनियम होता है। अखरोट और बादाम के सेवन से थॉयराइड के कारण गले में होने वाली सूजन को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। अखरोट और बादाम सबसे अधिक फायदा

हाइपोथॉयराइडिज्म (थॉयराइड ग्रंथि का कम एक्टिव होना) में करता है। इसके साथ में रात को सोते समय गाय के गर्म दूध के साथ 1 चम्मच अश्वगंधा चूर्ण का सेवन करे। इसके साथ प्राणायाम करना हैं, जिसे उज्जायी प्राणायाम बोलते हैं। इस प्राणायाम में गले को संकुचित करते हुए पुरे ज़ोर से ऊपर से श्वांस खींचनी हैं।

सफ़ेद नमक है बहुत हानिकारक- आज कल जो बाज़ार में सफ़ेद नमक हमको आयोडीन के नाम से खिलाया जा रहा है, चाहे वो कितनी भी बड़ी कंपनी हो, सिर्फ आम जन को मुर्ख बनाने के लिए है. नमक सिर्फ सेंधा या काला ही इस्तेमाल करें।

काली मिर्च– थाइरोइड के लिए काली मिर्च का उपयोग बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। काली मिर्च का यथा संभव नियमित उपयोग चाहे वो किसी भी प्रकार से हो, थाइरोइड के लिए बहुत ही उपयोगी है।

अलसी है फायदेमंद- एक चम्मच अलसी को थोड़ा दरदरा कूट कर दही में डालकर, इनके साथ 5 पत्ते तुलसी के डाल कर सेवन करें। थायराइड दूर करने का उपाय