Tuesday, March 17, 2026
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भारत में धार्मिक स्वतंत्रता खतरे में-प्रमोद तिवारी

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भारत में धार्मिक स्वतंत्रता खतरे में-प्रमोद तिवारी
भारत में धार्मिक स्वतंत्रता खतरे में-प्रमोद तिवारी

लखनऊ। राज्यसभा में विपक्ष के उप नेता प्रमोद तिवारी ने एक बयान जारी कर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की वर्ष 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत की धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई गई है। श्री तिवारी के अनुसार, रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया है कि भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठन धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति भारत के संविधान में दिए गए धार्मिक अधिकारों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि आयोग ने इन संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश तक की है, साथ ही अमेरिका में इनसे जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई की बात कही गई है। तिवारी ने कहा कि रिपोर्ट में यह तक उल्लेख है कि “भारत में धार्मिक आजादी खतरे में है।” श्री तिवारी ने चिंता जताते हुए कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं। ऐसे में इस तरह की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट देश की छवि और गरिमा को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि कई राजनीतिक दलों ने भी इस पर चिंता व्यक्त की है और केंद्र सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति न केवल देश के संविधान में प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को भी नुकसान पहुंचा रही है।

भारत में विविध धर्मो को मानने वाले लोग रहते हैं, भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है, ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की यह रिपोर्ट गम्भीर चिन्ता का विषय है । बहुत से राजनैतिक दलों ने इस पर चिन्ता व्यक्त की है और कहा है कि आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी यह पुष्टि हो गयी है, कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता खतरे में है, इससे विदेेशों में भी भारत देेश की छवि धूमिल हो रही है और देेश की छवि और गरिमा दोनों पर प्रशन चिन्ह लग रहा है। इसके लिये भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार है, तथा यह भारत के संविधान में प्रदत्त अधिकार का खुला उल्लंघन है, जिसमें सभी धर्मो को मानने वाले लोगों को धार्मिक आजादी दी गयी है।