Sunday, January 18, 2026
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जानें खिरियाबाग किसानों-मजदूरों का दर्द

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जानें खिरियाबाग किसानों-मजदूरों का दर्द
जानें खिरियाबाग किसानों-मजदूरों का दर्द

जानें खिरियाबाग किसानों-मजदूरों का दर्द

खिरिया बाग के किसानों-मजदूरों ने कहा- प्रशासन कानून और संविधान के खिलाफ जाकर कर रहा है कार्रवाई.प्रशासन का यह बयान गैरजिम्मेदाराना है और वार्ता के सिद्धांतों के विरुद्ध है जब आप कह रहे हैं कि आपके पास अधिकार नहीं है और शासन की बातों को हम तक और हमारी बातों को उन तक पहुंचाने का आपका काम है.

आज़मगढ़/खिरियाबाग – खिरिया बाग के धरने के 98 वें दिन किसानों-मजदूरों ने जिलाधिकारी आज़मगढ़ से कानून और संविधान के तहत कार्य करने की मांग की. भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ जाकर बिना सर्वे झूठी रिपोर्ट भेजकर ग्रामीणों का जीना मुश्किल कर दिया है. खिरिया बाग आंदोलन में 20 किसान जमीन-मकान जाने के सदमे से शहीद हो चुके हैं. हसनपुर के संदीप यादव के मोबाइल नम्बर 9044382636 पर 18 जनवरी को 2 बजकर 17 मिनट पर मोबाइल नम्बर 9415195498 से फोन आया और श्यामप्रीत को पूछते हुए कहा कि तुम्हारी जमीन एयरपोर्ट में जा रही है जमीन देने के लिए सहमत हैं, जब संदीप ने कहा कि नहीं और नाम पूछने पर फोन काट दिया. ट्रू कालर पर संतोष सिंह लेखपाल नाम बता रहा. प्रशासन की यह पूरी कार्रवाई अवैधानिक है क्योंकि आज़मगढ़ जिलाधिकारी ने खुद बताया है कि शासन से कोई निर्देश नहीं है और आरटीआई में बताया गया कि एयरपोर्ट का मामला शासन में विचाराधीन है. बिना ग्रामवासियों से बात किए जिस तरह से चोरी छिपे फोन पर तो कहीं एयरपोर्ट के भीतर ग्रामीणों को बुलाया जा रहा है ये पूरी तरह से गैरकानूनी है. कानून के खिलाफ जाकर सर्वे करने की कोशिश की गई और अब बिना नोटिस-नोटिफिकेशन के चोरी-छिपे सहमति की कार्रवाई बताती है कि सरकार जबरन जमीन छीनना चाहती है. ग्रामसभा के माध्यम से न जाकर संवैधानिक हनन कर रही है.

खिरिया बाग से महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, नागरिक उड्डयन मंत्री, पर्यावरण मंत्री, कृषि मंत्री, महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री, अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, जिलाधिकारी आज़मगढ़ को भेजे पत्र में मांग की गई है कि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट विस्तारीकरण परियोजना या किसी अन्य परियोजना के लिए हम जमीन-मकान नहीं देंगे, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का मास्टर प्लान रदद् किया जाए, अवैध सर्वे रिपोर्ट रदद् की जाए, किसान नेताओं का उत्पीड़न न किया जाए और आंदोलनकारियों पर से फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं, 12-13 अक्टूबर के दिन और रात में सर्वे के नाम पर एसडीएम सगड़ी और अन्य राजस्व अधिकारी व भारी पुलिसबल के द्वारा महिलाओं-बुजुर्गों के साथ हुए उत्पीड़न के दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए.

भेजे गए पत्र में कहा गया कि 30 दिसंबर 2022 को आपसे हुई वार्ता में हमने स्प्ष्ट किया कि गदनपुर हिच्छनपट्टी, जिगिना करमनपुर, जमुआ हरीराम, जमुआ जोलहा, हसनपुर, कादीपुर हरिकेश, जेहरा पिपरी, मंदुरी, बलदेव मंदुरी व आसपास के ग्रामवासी जो 13 अक्टूबर 2022 से अनवरत खिरिया की बाग, जमुआ में 98 दिन से धरने पर बैठे हैं, अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट विस्तारीकरण परियोजना या किसी परियोजना के लिए अपनी जमीन-मकान नहीं देंगे. जमीन जाने के सदमे से किसानों-मजदूरों की मौत हो रही है. वार्ता में कहा गया कि हमारी मांगों को शासन तक पहुंचाएंगे. हमने वार्ता में आपका पक्ष जानना चाहा तो कहा गया कि आपके पास निर्णय का अधिकार नहीं है और किसी भी प्रकार का लिखित या मौखिक कोई आश्वासन देने का भी नहीं. इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा जारी मीडिया बयान में कहा गया कि हमारी वार्ता से जो रुख दिया है उससे लगता है एक दो बार वार्ता करने के बाद समस्या का निस्तारण कर लिया जाएगा.

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प्रशासन का यह बयान गैरजिम्मेदाराना है और वार्ता के सिद्धांतों के विरुद्ध है जब आप कह रहे हैं कि आपके पास अधिकार नहीं है और शासन की बातों को हम तक और हमारी बातों को उन तक पहुंचाने का आपका काम है तो ऐसे में यह मीडिया में दिया बयान हमारी मांगों को दरकिनार करता है. हमने ऐसा कोई रुख नहीं दिया. हमने स्प्ष्ट कहा कि प्रशासन द्वारा जो सर्वे रिपोर्ट भेजी गई वह झूठी है क्योंकि की जब सर्वे हुआ ही नहीं तो सर्वे रिपोर्ट कैसे बन गई. ग्रामवासियों से बिना किसी वार्ता के सहमति के बगैर कैसे कोई सर्वे हो सकता है. वार्ता में कहा गया कि सर्वे ड्रोन और खतौनी के आधार पर सर्वे किया गया, अगर ड्रोन और खतौनी से ही सर्वे हो सकता था तो 12-13 अक्टूबर के दिन और रात में भारी पुलिस बल के साथ ग्रामीणों का उत्पीड़न करते हुए सर्वे करने की कोशिश क्यों कि गई. भूमि अधिग्रहण कानून के मुताबिक ग्राम प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सर्वे किया जाएगा, सर्वे प्रभावित क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर होगा, सर्वे रिपोर्ट को प्रकाशित कर जनसुनवाई की जाएगी पर ऐसा कुछ नहीं हुआ. ऐसे में यह सर्वे रिपोर्ट झूठी है. ग्रामीणों ने पूछा कि सर्वे का क्या आधार है कोई नोटिस, नोटिफिकेशन है क्या तो इसके जवाब में बताया गया कि ऐसा कुछ नहीं है एक दो लाइन का शासन की तरफ से आया है कि इन-इन जिलों में एयरपोर्ट के लिए जमीन ली जाएगी और हम उसी के आधार पर सर्वे कर रहे हैं.

जब उसकी प्रति को सार्वजनिक करने की मांग की गई तो कहा गया कि सबके पास है पर इसकी कोई प्रति हमको नहीं दी गई. जब यह पूछा गया कि यह कैसे निर्धारित किया गया कि यह जमीनें लेनी हैं तो उसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला. क्योंकि इससे पहले भी एक सर्वे किया गया और उसके बाद दूसरी बार सर्वे किया गया. भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनव्यरवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 में भू-स्वामियों तथा अन्य प्रभावित कुटुम्बों को कम से कम बाधा पहुंचाए बिना भूमि अर्जन के लिए कहा गया है. जबकि जो सर्वे दिखाया जा रहा है उसमें बड़े पैमाने पर लोगों के आशियाने हैं जिसमें दलित व पिछड़ी जातियों में ऐसे बहुतायत हैं जो भूमिहीन हैं या जिनके पास जमीन के कुछ टुकड़े हैं जिसमें बमुश्किल वो आशियानें बनाकर रहते हैं. किसी भी प्रकार का भूमि अधिग्रहण उनको सड़क पर ला देगा. इस क्षेत्र की जमीनें उपजाऊ और बहुफसली हैं किसी भी प्रकार का भूमि अधिग्रहण कृषि, पर्यावरण और अनाज का संकट उत्पन्न करेगा.

प्राथमिक विद्यालय, पंचायत भवन, जच्चा-बच्चा केंद्र, आंगनवाड़ी, चारागाह, खलिहान, कब्रिस्तान, घूरगड्ढा, बाग, नहर, जलाशय, कुएं भी प्रभावित हो रहे हैं. यह जैव विविधता वाला क्षेत्र है यहां विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु पाए जाते हैं. यहां बड़े पैमाने पर पेड़-पौधे हैं, एयरपोर्ट के नाम पर उनको नष्ट करने से पर्यावरण असंतुलित हो जाएगा. यहां छोटी जोत के गरीब किसान-मजदूर की जीविका खेती और मजदूरी पर आश्रित है. जो सर्वे बताया जा रहा उसमें कोई पारदर्शिता नहीं कि गई ग्रामीणों को अंधेरे में रखकर जबरन पुलिस के बल पर सर्वे करने की कोशिश की गई जो हुआ ही नहीं, जिसका हमने विरोध किया, क्योंकि जमीन नहीं देना चाहते तो ऐसे में सर्वे की कोई जरूरत नहीं है. सभी ग्रामसभाओं ने एक मत से निर्णय लिया है कि अपनी जमीन नहीं देंगे.धरने को अखिल भारतीय किसान सभा के रामाज्ञा यादव, दुखहरन राम, नरोत्तम यादव, राजीव यादव, राजेश आज़ाद, राम प्रवेश निषाद, राधेश्याम ने संबोधित किया. अध्यक्षता उदयराज यादव और संचालन रविन्द्र यादव ने किया।

जानें खिरियाबाग किसानों-मजदूरों का दर्द