क्या पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर के जर्जर भवन की जानकारी प्रधानमंत्री को दी जाएगी….?
Nishpaksh Dastak - 0
05 नवंबर को प्रात: 9 बजे केदारनाथ धाम से पुष्कर वासियों से भी संवाद करेंगे पीएम मोदी।तो क्या पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर के जर्जर...
श्रीनगर के बहाने आप भारत के सबसे खूबसूरत राज्य जम्मू और कश्मीर में घूम सकते हैं। यहां जहां अमरनाथ, वैष्णोदेवी की गुफा है तो...
अक्टूबर का महीना घूमने के लिए बहुत अच्छा महीना साबित होता है क्योंकि इस समय ना ज्यादा गर्मी रहती है और ना ही सर्दी...
जम्मू को मंदिरों का शहर कहा जाता है। विश्वप्रसिद्ध तीर्थ स्थल वैष्णों देवी धाम, बहु फोर्ट, अमर महल आदि पर्यटन स्थलों की सुकून भरी...
सरयू नदी के तट पर स्थित अयोध्या एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है। यह हिंदुओं का लोकप्रिय धार्मिक स्थान है। यह शहर, भगवान राम से जुड़ा...
पर्यटन उद्योग जगत में कॉर्बेट पार्क इतना विश्वविख्यात और सुस्थापित नाम है कि इसमें किसी भी तरह का बदलाव व्यापक रूप से अपूरणीय क्षति...
मुख्यमंत्री के समक्ष जनपद गोरखपुर एवं वाराणसी में प्रस्तावित एकीकृत मण्डलीय कार्यालय की स्थापना के सम्बन्ध में दोनों मण्डलों के मण्डलायुक्तों द्वारा वर्चुअल माध्यम...
राज्यपाल ने की योगी सरकार की पर्यटन नीति की तारीफ पर्यटन उद्योग को रोजगार और गरीब कल्याण से जोड़े जाने पर जताई खुशी, लोक...
Popular Posts
विद्याथियों के लिए गीता का महत्व
डा. विनोद बब्बर
गीता केवल हमारे लिए नहीं, सम्पूर्ण विश्व के लिए है। मानवमात्र की हित चिंतक है गीता। उसे किसी काल विशेष से भी बांधा नहीं जा सकता क्योंकि सर्वकालीन है गीता।हर युग, हर देश, हर परिवेश, हर समाज, हर आयु वर्ग के समक्ष चुनौतियां अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहती हैं। कुछ लोग इन चुनौतियांे के समक्ष घुटने टेक देते हैं परंतु अधिकांश उनसे पार पाने का प्रयास करते हैं। न जाने क्यों, कर्म करने का उतना तनाव नहीं, जितना कर्म फल का होता है। कुछ तनावग्रस्त होते हैं तो कुछ तनावों पर नियंत्रण करते हुए केवल कर्म करते रहने के संकल्प पर दृढ़ रहते हैं।एक विद्यार्थी के लिए भी गीता का महत्व है। आज की शिक्षा प्रणाली में किसी भी विद्यार्थी की योग्यता, प्रतिभा को मांपने का एकमात्र तरीका परीक्षा में प्राप्त अंक हैं। अतः यह स्वाभाविक ही है कि परीक्षा, विशेष रूप से बोर्ड की परीक्षा में पहली बार भाग लेने वाले छात्रों की दशा अर्जुन जैसी होती है। पहली बार अपने विद्यालय से दूर, बिल्कुल अलग परिवेश, चारों ओर औपचारिकता जैसी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक निश्चित समय में अधिकतम अंक प्राप्त करने की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में उतरे एक किशोर की व्यथा को समझना मुश्किल नहीं है। नये तरह के ढेरो प्रश्न।
अधिकांश के उत्तर वह जानता है लेकिन उलझ जाता है कि किसे पहले? लेकिन कैसे आदि-आदि। उसे स्वयं की स्मरण शक्ति और क्षमता पर संदेह होने लगता है। तनावग्रस्त छात्र परेशान होता है क्योंकि वह नहीं जानता कि महात्मा गांधी ने कहा है, ‘जब शंकाएं मुझ पर हावी होती हैं, और निराशाएं मुझे घूरती हैं, आशा की कोई किरण नजर नहीं आती, तब मैं गीता की ओर देखता हूं।’प्रतियोगिता, परीक्षा और तनाव के संबंध में सभी जानते हैं। सबने अपने अपने समय में इसका अनुभव अवश्य किया है। तनाव होना तब तक सामान्य बात है जब तक तनाव का स्तर सामान्य रहे। असामान्य तनाव का अर्थ है- हमारी अपनी बुद्धि ही हमारी सबसे बड़ी दुश्मन हो जाये।बस इस संतुलन को बरकरार रखने की कला हमें गीता से ही मिल सकती है। वह शिक्षा व जीवन में व्यावहारिक बनने की प्रेरणा देती है। आज के प्रतियोगी जीवन में हमें एक प्रेरक चाहिए। जो हमें समय प्रबंधन सिखाये, तनाव नियंत्रण के गुर बताये। श्रीकृष्ण एक महान प्रेरक हैं। और उनके श्रीमुख से प्रवाहित गीताज्ञान अज्ञान के अंत के लिए ही है। सोशल मीडिया, स्मार्ट फोन, इंटरनेट आदि की तकनीकी तो अभी आई हैं लेकिन महाभारत काल में भी इसकी झलक मिलती है। परिस्थितियां प्रमाण है कि ‘टेलीपैथी’, ‘दिव्यदृष्टि’ प्राप्त की जा सकती है अगर हम अपने कर्तव्यों को लेकर गंभीर रहें, आत्मविकास करें। यही बात एक विद्यार्थी को समझनी है कि गीता हमें स्मार्ट बनना सिखाती है। ऐसा होकर ही हम अपने जीवन की मूर्खताओं को पहले ढकते हैं और फिर अनुभव से उनसे छुटकारा पाते हैं।
कृष्ण कोई और नहीं, बल्कि हमारी चेतना है और तनावों, शंकाओं, विकारों से घिरा हमारा मन अर्जुन है। जो प्रश्न तब थे, वही अब भी हैं। हमारे हर सवाल का जवाब हमारे विवेक के पास है लेकिन विवेक सोया है, तो जवाब नहीं मिल सकता। गीता विवेकवान बनाती है। जिसका विवेक जागृत हो जाता है, उसका जीवन सफलता और प्रेरणा का गीत बन जाता है।श्रीमद्भगवद् गीता हमें स्वयं में विश्वास और ईश्वर में आस्था की प्रेरणा देते हुए सिखाती है कि हमें मैदान छोड़कर भागना नहीं है, बल्कि रचनात्मक बनना है। परिणाम का तनाव छोड़कर अपने कर्तव्य पथ पर चलते रहने वाला ही जीवन का आंनद प्राप्त करता हैं। तकनीक के विकास को अपना विकास मानने के कारण ही तो हम अपना आंतरिक विकास करना भूल गये है। इसी कारण किशोर छात्र के सामने काम, क्रोध, मद, मोह, मत्सर और अहंकार रूपी भाव तो हैं ही, अपसंस्कृति, नशा, कामुकता, विदेशी शक्तियों के भ्रमजाल, देशद्रोही विचारधारा जैसे अनेक शत्रु प्रलोभन और आकर्षण के साथ विद्यमान हैं। आज भी एक अपरिपक्व युवा उस अर्जुन की तरह उन्हें अपना मानते हुए उनसे युद्ध करने को सहज तैयार नहीं है। उसे इस फिसलन भरे वातावरण से निकलने और बचाने का काम श्रीमद् भागवत गीता ही कर सकती है।विश्व के श्रेष्ठ ग्रंथों में शामिल गीता, न केवल सबसे ज्यादा पढ़ी, बल्कि कही और सुनी भी जाती है। द्वितीय अध्याय का 47 वां और सबसे अधिक प्रचलित श्लोक है-कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।चतुर्थ अध्याय का 39 वां श्लोक कहता है-श्रद्धावान्ल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः। ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति।।
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के दसवें अध्याय के 20वें श्लोक में कहा है -
अहमात्मा...
Breaking News
गंगोत्री से गंगासागर तक वेग के साथ बढ़ती बीजेपी की‘हिंदूधारा’
पश्चिम बंगाल में जीत के बाद एक नया ट्रेंड दिखाई दे रहा है। पहले जो बीजेपी कहा करती थी कि हमें मुसलमानों का वोट...
ससुराल से दूरी और पति पर पकड़ क्यों?
शादी कोई सत्ता-संघर्ष नहीं, बल्कि दो व्यक्तियों के बीच भरोसे, सम्मान और जिम्मेदारी का रिश्ता है। लेकिन हमारे समाज में कई बार विवाह को...
भाजपा की आखों में खटकती है आधी आबादी:अखिलेश यादव
राजेन्द्र चौधरी
भाजपा ने बंगाल में लोकतंत्र को तहस-नहस कर दिया है। भाजपा ने लोकतंत्र को बहुत नुकसान पहुंचाया है।...
उत्तर प्रदेश में विकास का मॉडल बनता सहारनपुर
मुख्यमंत्री ने जनपद सहारनपुर में 2,131 करोड़ रु0 लागत की 325 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। विकास का कोई विकल्प नहीं, आज...
अपने ही लटका रहें…
लगता खूब अजीब है, रिश्तों का संसार,
अपने ही लटका रहें, गर्दन पर तलवार॥
चेहरों पर मुस्कान है, भीतर गहरा वार,
मीठी बोली में छुपा, छल का...





















