स्व. श्री योगी की स्मृति में नेत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन

‘अंधकार को क्यों धिक्कारें,अच्छा हो एक दीप जलाएं ‘ इस पंक्ति से प्रेरित होकर स्व श्री योगेश नंदन योगी की स्मृति में एक दिवसीय निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन का बीड़ा उठाया है।परम प्रिय मित्र स्व0 श्री योगेश नंदन योगी (लखनऊ )की प्रथम पुण्यतिथि पर उनकी पावन स्मृति में उनके अभिन्न मित्रों के बहुमूल्य सहयोग से एक दिवसीय निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन “श्री दीनबंधु नेत्र चिकित्सालय “अयोध्या में आयोजित किया गया. उनके मित्रों द्वारा उनको श्रद्धांजलि देने के लिए निर्धन नेत्र रोगियों के निशुल्क ऑपरेशन की व्यवस्था कर एक सार्थक पहल की है.किसी के अंधकारमय जीवन को पुनः ज्योतिर्मय प्रकाश से आलोकित करने से अच्छी और सच्ची श्रद्धांजलि कुछ हो ही नही सकती.इस ज्योति महायज्ञ में 51 निशुल्क ऑपरेशन का लक्ष्य निर्धारित था परन्तु भारी बारिश के कारण नेत्र रोगियों की संख्या प्रभावित रही.फिर भी प्रिय मित्र योगी को समर्पित इस शिविर में 61 नेत्ररोगियों का परीक्षण किया गया तथा उनमें से चयनित 17 नेत्र रोगियों का निशुल्क ऑपरेशन(मोतियाबिंद )सम्पन्न कराया गया.प्रिय मित्र को श्रद्धांजलि जहाँ रहो मित्र चिर शान्ति में रहो.

लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के सत्र 1992-93 में उपाध्यक्ष रहे, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, सामाजिक सरोकारी और एक बेहतरीन इंसान भाई योगेश नंदन योगी को सहपाठी मित्रों ने उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर अपनी भावांजलि, श्रद्धांजलि अर्पित की. अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए जनसरोकारों के पक्षकार एवं वरिष्ठ पत्रकार भाई नवल कांत सिन्हा ने योगी के जीवन दर्शन पर कहा की वो मित्रों को आगे बढ़ाने में सदैव अग्रणी रहे.वरिष्ठ पत्रकार रमेश प्रताप सिंह, पूर्व महामंत्री अनिल सिंह वीरू, जितेंद्र सिंह सहित कई मित्रों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये योगी को अपनी भावांजलि अर्पित की. योगी की स्मृति में राष्ट्र गौरव शर्मा के नेतृत्व में अयोध्या में निशुल्क नेत्र शिविर लगाया गया. ऐसे ही विजय श्री फाउंडेशन की भोजन प्रसादं सेवा लखनऊ के लोकप्रिय फ़ूडमैन विशाल सिंह ने केजीएमयू और लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में योगी को याद करते हुए समर्पित की.इस अवसर पर प्रमुखरूप से सौरभ सिंह बजरंगी,राजेश शर्मा ‘नाना’,नागेंद्र सिंह अधिवक्ता,राकेश त्रिपाठी रक्कू,समीर श्रीवास्तव आदि ने अपनी भावनाएं व्यक्त की,अलग-अलग स्मृतियों को साझा करते समस्त आयोजकों एवं शुभेक्षुओं को मित्र पवन उपाध्याय ने आभार व्यक्त किया एवं मानवता के ऐसे अनुष्ठानों में जनमानस से अपील की कि लोग आगे आएं, और सेवा सहयोग मानवता को जीवंत एवं जीवित रखें.

“अंधकार को ना धिक्कारे अच्छा हो एक दीप जला लें”.

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