Wednesday, February 25, 2026
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न पक्ष न विपक्ष पत्रकार निष्पक्ष

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पत्रकार न पक्ष का होता है न विपक्ष का, वह तो जनपक्ष का होता है – कुशाग्र कौशल

कुशाग्र कौशल

उन्नाव। जनपद सें कई संस्थाओं में कार्यरत पत्रकार कुशाग्र कौशल नें अपनें मन की बात कही कि यह कहना सही नहीं कि आज पत्रकारिता के सामने अधिक कठिनाई है। वास्तविकता यह है कि पत्रकारिता में हर युग में चुनौतियां रही हैं। यदि लक्ष्मण रेखा को ध्यान में रखें तभी हम पत्रकारिता में खतरे उठा सकते हैं। आज पत्रकारिता इसलिए सुरक्षित है क्योंकि हमारे पत्रकारों एवं संपादकों ने लक्ष्मण रेखा नहीं लांघी।


‘पत्रकारिता की लक्ष्मण रेखा’ पर अपने विचार रखते हुए कौशल ने कहा कि सबसे बड़ा संकट विश्वसनीयता का है। पत्रकारों को विश्वसनीयता बचाए रखने के प्रयास करने चाहिए। उसे किसी का पक्षकार बनने से बचना चाहिए। जब कोई भरोसा करके आपको सूचना या समाचार देता है, तब उसे लीक नहीं करना चाहिए, उसकी जाँच करके प्रकाशित करना चाहिए।

बढ़ गई है डिजिटल मीडिया की खपत –

कौशल ने कहा कि कोरोना काल में डिजिटल मीडिया की उपयोगिता सामने आई और उसका दायरा भी बढ़ा। इस दौरान न केवल शहरों में बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल कंटेंट की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यदि देंखा जाए तों भारत में चीन के मुकाबले प्रति व्यक्ति डेटा की खपत अधिक है। आज समाचारों की दुनिया मोबाइल फोन में सिमट गई है। दुनिया में 91 प्रतिशत डेटा मोबाइल के माध्यम से उपयोग हो रहा है।

संचार के तरीकों को सरल बनाना है जनसंपर्क –

‘कोविड उपरांत व्यवसाय के लिए जनसंपर्क वैक्सीन’ पर अपनी बात रखते हुए कौशल ने कहा कि जनसंपर्क विधा में हम ब्रांड की छवि और उसके प्रति बनी अवधारणा का प्रबंधन करते हैं। अच्छे जनसंपर्क अधिकारी की विशेषता होती है कि वे संचार के तरीकों को सरल बनाते हैं। जनसंपर्क के क्षेत्र में हम संकट के समय में लोगों का उत्साह बढ़ाते हैं, उनको प्रेरित करते हैं। कोरोना के कारण व्यावसायिक क्षेत्र में अनेक प्रकार के संकट आए हैं, जिनसे बाहर निकलने में पीआर बहुत उपयोगी साबित होगा।

पत्रकारों के लगातार ऊपर हो रहे हमले की विषय पर –

कौशल ने कहा कि यदि कोई पत्रकार किसी व्यक्ति के द्वारा किए गए गलत कामों की पोल खोल दे और उसकी खबर प्रकाशित करना प्रारंभ कर दें, तो वह व्यक्ति उस पत्रकार के ऊपर दबाव बनाकर हमला कर आता है जो कि बहुत ही निंदनीय कार्य है मुझे लगता है इस विषय में हमारी केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों को कठोर निर्णय लेना चाहिए और जो पत्रकारों के ऊपर अत्याचार करें और कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए चाहे वह प्रशासन का अधिकारी वह सत्ता पक्ष का आदमी ही क्यों ना हो।

फर्जी पोर्टल चैनलों पर नाराजगी जाहिर की –

पत्रकार कौशल ने कहा कि आजकल के जिस प्रकार के फर्जी वेव पोर्टल चैनल(जो भारत सरकार एवं प्रसारण मंत्रालय से रजिस्टर्ड नहीं है) अपनी व्यवसाय का धंधा बना कर आजकल आम आदमियों को पत्रकार बनाने का कार्य रुपए लूटकर किए जा रहे हैं। भले ही वह व्यक्ति शिक्षित ना हो ऐसें लोगों को पत्रकार बनाना निंदनीय कार्य हैं। इस विषय पर मैंने राज्य सरकार व केंद्र सरकार को पत्र देकर अवगत कराया है जल्द ही मुलाकात भी इस विषय पर मा.मुख्यमंत्री जी से करूंगा।

जिला प्रशासन एवं समस्त अधिकारियों को पत्रकारों का सम्मान करना –

पत्रकारिता जगत को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया है और पत्रकार वही लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का हिस्सा है। जब पत्रकारिता जगत को इतना सम्मान दिया गया है तो पत्रकारों को सम्मान क्यों नहीं दिया जाता हैं। अधिकारियों को पत्रकारों की बात को सुनना चाहिए समझना चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए। पत्रकार सरकार की बातों को जनता तक पहुंचाने का कार्य करते हैं और जनता को आ रही समस्याओं को अधिकारी एवं सरकार तक पहुंचाने का कार्य करतें हैं। तों मुझे नहीं लगता है कि पत्रकारों को कोई रोक ठोक करनी चाहिए बल्कि पत्रकारों का सम्मान एवं उनकी बातों को सुनना व समझना चाहिए।