Monday, May 11, 2026
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आंगनबाड़ी से मंत्री तक कृष्णा पासवान की कहानी

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आंगनबाड़ी से मंत्री तक कृष्णा पासवान की कहानी
आंगनबाड़ी से मंत्री तक कृष्णा पासवान की कहानी

आंगनबाड़ी से मंत्री तक कृष्णा पासवान की कहानी ने UP की राजनीति हिला दी! फावड़ा चलाने वाली विधायक बनी मंत्री!….आंगनबाड़ी से योगी कैबिनेट तक कृष्णा पासवान का सफर….भाजपा का बड़ा दलित दांव….कृष्णा पासवान क्यों बनीं मंत्री? ….जिस महिला ने सड़क उखाड़ी… उसे योगी ने मंत्री बना दिया!…गरीबी से सत्ता तक! कृष्णा पासवान की फिल्मी कहानी!

योगी कैबिनेट का रविवार को दूसरी बार विस्तार हुआ। 6 नए मंत्री बनाए गए हैं। इनमें कृष्णा पासवान भी शामिल हैं। यूपी सरकार में राज्यमंत्री बनीं 60 साल की कृष्णा पासवान की निजी जिंदगी किसी फिल्मी कहानी जैसी है। एक गरीब दलित परिवार की लड़की… जो कभी गांव-गांव साइकिल चलाकर आंगनबाड़ी का काम करती थी… आज वही महिला योगी कैबिनेट में मंत्री बन चुकी है। नाम है — कृष्णा पासवान। ये कहानी है फतेहपुर की कृष्णा पासवान की… एक ऐसी महिला की, जिसने गरीबी, संघर्ष और राजनीति की कठिन राह पार कर सत्ता के गलियारों तक पहुंच बनाई।लेकिन सवाल ये है… आख़िर भाजपा ने कृष्णा पासवान पर इतना बड़ा भरोसा क्यों जताया? और क्या उनका मंत्री बनना यूपी की जातीय राजनीति का नया संदेश है?

कृष्णा पासवान का जन्म 1 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के पिलखिनी गांव में हुआ था। वो एक बेहद साधारण दलित यानी पासी परिवार से आती हैं। उनके पिता दर्शन पासवान खेतिहर मजदूर थे। घर की आर्थिक हालत इतनी कमजोर थी कि कई बार दो वक्त का खाना जुटाना भी मुश्किल हो जाता था। कृष्णा बचपन से पढ़ना चाहती थीं… लेकिन गरीबी ने उनके सपनों को सीमित कर दिया। वो सिर्फ 10वीं तक ही पढ़ पाईं। 17 साल की उम्र में शादी… और फिर परिवार चलाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नौकरी। कृष्णा पासवान साइकिल से गांव-गांव जाती थीं… बच्चों के पोषण से लेकर महिलाओं की समस्याएं सुनती थीं। यहीं से उन्होंने गरीबी, बेरोजगारी और सरकारी सिस्टम की सच्चाई को करीब से देखा। धीरे-धीरे गांव की महिलाओं के बीच उनकी पहचान बनने लगी… और फिर उन्होंने राजनीति में कदम रखा।”

– राजनीति में एंट्री –

“जिला पंचायत सदस्य से शुरू हुआ सफर… आज उन्हें चौथी बार विधायक बनने तक ले आया। फतेहपुर की खागा सीट से लगातार जीत… ये दिखाती है कि जमीन पर उनकी पकड़ कितनी मजबूत है। लेकिन असली चर्चा तब हुई… जब फरवरी 2026 में उन्होंने खुद फावड़ा उठाकर सड़क खोद डाली!” 38 लाख की लागत से बन रही सड़क… लेकिन गांववालों ने क्वॉलिटी पर सवाल उठाए। शिकायत मिलते ही कृष्णा पासवान मौके पर पहुंचीं… और अधिकारियों का इंतजार करने की बजाय खुद सड़क खोदने लगीं। सड़क इतनी खराब थी कि हाथ से ही उखड़ गई! वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया… लोग कहने लगे — ‘ऐसे नेता अगर हर जिले में हों, तो भ्रष्टाचार खत्म हो जाए। कृष्णा पासवान ने सड़क निर्माण रुकवाया… और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।”

–अब बात राजनीति की भाजपा का बड़ा राजनीतिक दांव –

यूपी में पासी समाज की आबादी करीब 1 करोड़ 20 लाख से ज्यादा मानी जाती है। करीब 35 से 40 सीटों पर इस समाज का सीधा असर है। लंबे समय तक पासी समाज बसपा का वोट बैंक माना जाता था… लेकिन 2014 के बाद भाजपा ने इस वर्ग में तेजी से पकड़ बनाई। अब कृष्णा पासवान को मंत्री बनाकर भाजपा ने साफ संदेश दिया है — दलित राजनीति में भाजपा अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है।”

कृष्णा पासवान के मंत्री बनने से किन जिलों में होगा असर?

पासी समाज का असर सिर्फ एक-दो जिलों में नहीं… बल्कि पूरे यूपी के कई बड़े इलाकों में है। लखनऊ… उन्नाव… रायबरेली… प्रतापगढ़… कौशांबी… प्रयागराज… फतेहपुर… बाराबंकी… अयोध्या… जौनपुर… वाराणसी… गाजीपुर और गोरखपुर तक… इन जिलों में पासी समाज राजनीति का बड़ा फैक्टर माना जाता है।” यानी ये सिर्फ मंत्री पद नहीं… बल्कि 2027 के चुनाव से पहले एक बड़ा सोशल और राजनीतिक मैसेज भी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी बांसगांव लोकसभा से आने वाले कमलेश पासवान मंत्री हैं। अब यूपी में भाजपा कृष्णा पासवान को मंत्री बनाकर अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है। वहीं, सपा अयोध्या सांसद अवधेश पासी के जरिए इस वर्ग को साधने की कोशिश में जुटी है।

उत्तर प्रदेश में पासी समाज दलितों में जाटव के बाद सबसे बड़ी आबादी माना जाता है। प्रदेश में करीब 1 करोड़ 20 लाख से ज्यादा पासी समाज के लोग हैं। करीब 35 से 40 विधानसभा सीटों पर ये समाज निर्णायक असर रखता है। लंबे समय तक पासी समाज बहुजन समाज पार्टी यानी BSP के साथ माना जाता था। लेकिन 2014 के बाद भाजपा ने इस समाज में तेजी से पैठ बनानी शुरू की। अब भाजपा ने कृष्णा पासवान को मंत्री बनाकर साफ संकेत दिया है कि वो दलित और खासकर पासी समाज को अपने साथ मजबूती से जोड़ना चाहती है। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी भी अवधेश पासी जैसे नेताओं के जरिए इस वोट बैंक को साधने में लगी हुई है।”

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से मंत्री बनने तक का सफर… कृष्णा पासवान की कहानी सिर्फ राजनीति नहीं… बल्कि संघर्ष, मेहनत और जमीन से जुड़ी नेतृत्व क्षमता की कहानी है। अब देखना होगा कि मंत्री बनने के बाद वो जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती हैं।आपको क्या लगता है? क्या ऐसे नेताओं की राजनीति में जरूरत है?