Monday, February 9, 2026
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ज़िलाधिकारी को आगे करके चुनाव आयोग बच नहीं सकता:अखिलेश यादव

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ज़िलाधिकारी को आगे करके चुनाव आयोग बच नहीं सकता:अखिलेश यादव
ज़िलाधिकारी को आगे करके चुनाव आयोग बच नहीं सकता:अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनावों में नाम काटने को लेकर समाजवादी पार्टी ने जो 18 हज़ार शपथपत्र दिये थे, भाजपा सरकार उनमें से एक का भी जवाब सही तरीक़े से देना नहीं चाहती है। ज़िलाधिकारी को आगे करके चुनाव आयोग बच नहीं सकता। इस मामले की गहन जाँच-पड़ताल हो। डीएम साहब दिखाएं कि नाम काटते समय जो ‘मृतक प्रमाणपत्र’ लगाए गये थे वो कहाँ हैं। अगर ये झूठ नहीं है तो ये सफ़ाई देने में इतने साल क्यों लग गये..? ज़िलाधिकारी को आगे करके चुनाव आयोग बच नहीं सकता:अखिलेश यादव


अखिलेश यादव ने कहा कि डीएम लोगों से जनता का एक सवाल है, क्यों इतने सालों बाद जवाब आया है? उन्होंने कहा कि जिस तरह कासगंज, बाराबंकी, जौनपुर के डीएम हमारे 18,000 शपथपत्रों के बारे में अचानक अति सक्रिय हो गये हैं, उसने एक बात तो साबित कर दी है कि जो चुनाव आयोग कह रहा था कि ‘एफ़िडेविट की बात गलत है’ मतलब एफ़िडेविट नहीं मिले, उनकी वो बात झूठी निकली। अगर कोई एफ़िडेविट मिला ही नहीं, तो ये ज़िलाधिकारी लोग जवाब किस बात का दे रहे हैं।


अखिलेश यादव ने कहा कि सतही जवाब देकर ख़ानापूर्ति करने वाले इन ज़िलाधिकारियों की संलिप्तता की भी जाँच होनी चाहिए। कोर्ट संज्ञान ले, चुनाव आयोग या डीएम में से कोई एक तो गलत है। जो सीसीटीवी पर पकड़े गये हों उनके द्वारा अपने घपलों पर दी गयी सफ़ाई पर किसी को भी रत्ती भर विष्वास नहीं है। सपा अध्यक्ष ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है।उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जिलाधिकारियों को आगे करके अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। अखिलेश का आरोप है कि आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा और यह लोकतंत्र के लिए खतरे की बात है। क्या सच में चुनाव आयोग अपनी जवाबदेही से बच रहा है या यह केवल सियासी बयानबाज़ी है…?


उन्होंने कहा कि झूठ का गठजोड़ कितना भी ताकतवर दिखे पर आखि़रकार झूठ हारता ही है क्योंकि नकारात्मक लोगों का साझा-गोरखधंधा अपने-अपने स्वार्थों की पूर्ति करने के लिए होता है, ऐसे भ्रष्ट लोग न तो अपने ईमान के सगे होते हैं, न परिवार, न समाज के, तो फिर भला अपने साझेदारों के कैसे होंगे। ये बेईमान लोग देश और देशवासियों से ताउम्र दगा करते हैं और अंततः पकड़े जाने पर अपमान से भरी ज़िंदगी जीने की सज़ा काटते हैं। भाजपा सरकार, चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत वो ‘चुनावी तीन तिगाड़ा’ है, जिसने सारा काम बिगाड़ा है और देश के लोकतंत्र पर डाका डाला है। अब जनता इस ’त्रिगुट’ की अदालत लगाएगी। ज़िलाधिकारी को आगे करके चुनाव आयोग बच नहीं सकता:अखिलेश यादव