Thursday, March 12, 2026
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गठबंधन की मर्यादा में शक्ति

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गठबंधन की मर्यादा में शक्ति
गठबंधन की मर्यादा में शक्ति

डा.भरत मिश्र प्राची

     जब से देश में छोटे-छोटे अनेक क्षेत्रीय राजनीतिक दल उभर आये, तब से राष्ट्रीय राजनीतिक दलों का स्वयं का वजूद कमजोर हो गया। स्वयं के बल पर सत्ता में आना या सत्ता का विरोध करना आसान नहीं रहा। इस तरह के हालात में गठबंधन मजबूरी भी हो गई एवं जरूरत भी। जिस किसी भी राजनीतिक दल ने गठबंधन की मर्यादा को तोड़ा , नुकसान में हीं रहा। इतिहास साक्षी है कि जब से देश में गठबंधन की राजनीति शुरू हुई तब से गठबंधन की मर्यादा मे छिपी शक्ति को नकार कर स्वयं के बल पर जिसने भी चुनावी समर में खड़ा होने की चेष्टा की, उसे सफलता कम ही हाथ लगी। गठबंधन की मर्यादा में शक्ति

      इसका ताजा उदाहरण अभी हाल हीं हरियाणा में दो विधान सभा चुनाव में देखने को मिला जहां हरियाणा में चुनाव से पूर्व कांग्रेस एवं आप में गठबंधन होना था पर दोनों दलों के बीच गठबंधन न हो पाने के कारण कांग्रेस के पास आती सत्ता छिटक गई। जहां चुनाव पूर्व सत्ता पक्ष भाजपा की वापसी नजर नहीं आ रही थी, कांग्रेस आप में गठबंधन नहीं होने से भाजपा को सत्ता में आने का फिर से मौका मिल गया। कोई माने या नहीं माने, कांग्रेस के वोटों में आप ने सेंध लगा दी जिससे सत्ता के पास आती कांग्रेस सत्ता से दूर हो गई। जम्मू कश्मीर में गठबंधन की मर्यादा का सही ढ़ंग से पालन होने से सत्ता वहां के क्षेत्रीय दल के हाथ लगी।

    देश में फिर दो विधान सभा चुनाव महाराष्ट्र एवं झारखंड में होने जा रहे है जहां क्षेत्रीय दलों का अपना प्रभुत्व है। वहां कोई भी दल एक दूसरे से कम नहीं।  अहम भाव को छोडकर जो भी गठबंधन की मर्यादा का पालन ईमानदारी से करेगा, फायदे में रहेगा, जो मर्यादा को अहम में आकर तोड़ेगा, सहयोगी से छल करेगा, घाटे में रहेगा। आज समय बदल चुका हैं। देश की राजनीति गठबंधन पर निर्भर हो गई है जब कि कभी देश में एक ही राष्ट्रीय दल कांग्रेस का वजूद सर्वोपरि था जिससे देश के हर कोने में कांग्रेस सत्ता में थी । फिर एक समय ऐसा आया देश के सभी अधिकांश राजनीतिक दल मिलकर कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़े, सफलता भी मिली पर गठबंधन की मर्यादा तोड़ने से कांग्रेस को फिर से राजनीतिक लाभ मिला

         मंडल आयोग के उपरान्त देश में कई क्षेत्रीय राजनीतिक दल उभर आये जिनका आज भी अपने अपने राज्य में वजूद कायम है जिसे नकारा नहीं जा जा सकता। आज कांग्रेस की जगह भाजपा सत्ता में है पर उसे भी गठबंधन की जरूरत है। राज्य के विधान सभा चुनाव हो या देश के लोकसभा चुनाव , आज उभरे क्षेत्रीय दलों की स्थानीय ताकत को नकारा नहीं जा सकता। देश में केन्द्र की सत्ता के खिलाफ गठबंधन की प्रक्रिया शुरू तो हुई पर पर साफ मन न होने, अपने को किसी से कम न समझने, क्षेत्रीय दलों की ताकत को सहीं ढ़ंग से नहीं जान  पाने, या नकारने के चलते राजनीतिक लाभ नहीं मिल सका, जितना मिलना चाहिए। गठबंधन यदि करना है तो इसकी मर्यादा का भी पालन करना होगा। गठबंधन से जुड़े दलों की ताकत का भी घ्यान देना होगा तभी गठबंधन की राजनीति सफल होगी। गठबंधन की मर्यादा में छिपी ताकत को पहचान कर छल कल बल रहित जो गठबंधन की मर्यादा का सही ढ़ंग से पालन करेगा, राजनीतिक लाभ उसे ही मिलेगा। गठबंधन की मर्यादा में शक्ति