Sunday, February 1, 2026
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जनता को मायूस करने वाला केंद्रीय बजट :अखिलेश यादव

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जनता को मायूस करने वाला केंद्रीय बजट :अखिलेश यादव
जनता को मायूस करने वाला केंद्रीय बजट :अखिलेश यादव

आम जनता को मायूस करने वाला केंद्रीय बजट। रोजमर्रा की जरूरत की चीजें आम आदमी की पहुंच से हुई दूर।

अजय सिंह

    लखनऊ। केंद्रीय बजट 2026 को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। बजट पेश होने के बाद अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा कि यह बजट आम जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता। उनके मुताबिक सरकार हर साल बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर न तो महंगाई कम होती है और न ही युवाओं को रोजगार मिलता है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा बजट में आम आदमी, किसान, मज़दूर और मध्यम वर्ग की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया है।

देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल-डीज़ल, रसोई गैस, खाद्य पदार्थ और रोजमर्रा की ज़रूरत की चीज़ें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। इसके बावजूद बजट में महंगाई कम करने के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार आंकड़ों में राहत दिखाती है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि आम परिवार का मासिक खर्च लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की कि ईंधन पर लगने वाले टैक्स में कटौती की जाए और आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी घटाकर जनता को राहत दी जाए।

समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि हर बजट में किसानों के लिए कई योजनाओं की घोषणा होती है, लेकिन उनका लाभ सीधे किसान तक नहीं पहुंचता। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने की मांग दोहराई। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, लेकिन खाद, बीज, डीज़ल और बिजली की बढ़ती कीमतों से किसान की लागत कई गुना बढ़ चुकी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फसल बीमा योजना और सिंचाई परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण किसान आज भी परेशान है।

बेरोज़गारी के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने सरकार को घेरते हुए कहा कि बजट में रोजगार सृजन की बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन सरकारी भर्तियां समय पर नहीं निकलतीं। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी और पेपर लीक जैसी घटनाओं से युवाओं का भरोसा टूट रहा है।

अखिलेश यादव ने मांग की कि एमएसएमई सेक्टर को सस्ती दरों पर लोन देकर उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए ताकि बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा हो सके। साथ ही उन्होंने सरकारी विभागों में खाली पदों को जल्द भरने की मांग की।अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बजट में स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए पर्याप्त धनराशि का प्रावधान नहीं किया गया। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाओं की कमी है, वहीं सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में मजबूत भारत बनाना चाहती है तो शिक्षा और स्वास्थ्य को सबसे ऊपर प्राथमिकता देनी होगी।
उन्होंने निजीकरण की नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे आम आदमी पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

अखिलेश यादव ने कहा कि बजट में दलित, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यकों के लिए पर्याप्त योजनाएं नहीं दिखाई देतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सामाजिक कल्याण की योजनाओं में कटौती से समाज के कमजोर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। उनका कहना है कि बजट में सामाजिक समावेशन और बराबरी का स्पष्ट रोडमैप होना चाहिए था, जो नजर नहीं आता।

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य को केंद्र सरकार से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और रोजगार के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की जरूरत है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार राजनीतिक आधार पर राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है, जो संघीय ढांचे के खिलाफ है। बजट जैसे अहम विषय पर संसद में सार्थक चर्चा होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष की बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और सरकार को आलोचना को दुश्मनी के रूप में नहीं लेना चाहिए।

अखिलेश यादव ने साफ किया कि समाजवादी पार्टी बजट के हर प्रावधान का अध्ययन करेगी। जहां-जहां आम जनता के हितों की अनदेखी हुई है, वहां पार्टी सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि महंगाई, बेरोज़गारी और किसानों के मुद्दे पर जनआंदोलन किया जा सकता है।

केंद्रीय बजट 2026 को लेकर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया सरकार की नीतियों पर कई सवाल खड़े करती है। उनके अनुसार यह बजट आम जनता की समस्याओं का समाधान नहीं करता। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह आंकड़ों के खेल से बाहर आकर जमीनी हकीकत को समझे और नीतियों में गरीब, किसान, युवा और मध्यम वर्ग को प्राथमिकता दे।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बजट में स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए पर्याप्त धनराशि का प्रावधान नहीं किया गया। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाओं की कमी है, वहीं सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में मजबूत भारत बनाना चाहती है तो शिक्षा और स्वास्थ्य को सबसे ऊपर प्राथमिकता देनी होगी।
उन्होंने निजीकरण की नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे आम आदमी पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

अखिलेश यादव ने कहा कि बजट में दलित, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यकों के लिए पर्याप्त योजनाएं नहीं दिखाई देतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सामाजिक कल्याण की योजनाओं में कटौती से समाज के कमजोर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। उनका कहना है कि बजट में सामाजिक समावेशन और बराबरी का स्पष्ट रोडमैप होना चाहिए था, जो नजर नहीं आता।

अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य को केंद्र सरकार से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और रोजगार के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की जरूरत है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार राजनीतिक आधार पर राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है, जो संघीय ढांचे के खिलाफ है।

समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि बजट जैसे अहम विषय पर संसद में सार्थक चर्चा होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष की बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और सरकार को आलोचना को दुश्मनी के रूप में नहीं लेना चाहिए।

अखिलेश यादव ने साफ किया कि समाजवादी पार्टी बजट के हर प्रावधान का अध्ययन करेगी। जहां-जहां आम जनता के हितों की अनदेखी हुई है, वहां पार्टी सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि महंगाई, बेरोज़गारी और किसानों के मुद्दे पर जनआंदोलन किया जा सकता है।

जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा बजट

केंद्रीय बजट 2026 को लेकर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया सरकार की नीतियों पर कई सवाल खड़े करती है। उनके अनुसार यह बजट आम जनता की समस्याओं का समाधान नहीं करता। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह आंकड़ों के खेल से बाहर आकर जमीनी हकीकत को समझे और नीतियों में गरीब, किसान, युवा और मध्यम वर्ग को प्राथमिकता दे।