Tuesday, January 27, 2026
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SC/ST&OBC का भय वाजिब..!

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SC/ST&OBC का भय वाजिब..!
SC/ST&OBC का भय वाजिब..!

अमर बहादुर मौर्य

आम चुनाव 2024 के तीन चरण संपन्न हो चुके हैं। शेष बचे चार चरणों के लिए चुनावी सरगर्मी तेज है इस बार के चुनाव में शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ, सड़क बिजली, पानी, महंगाई, रोजगार के साथ-साथ महिला सुरक्षा और दूसरा सामाजिक न्याय का मुद्दा चर्चा में है। महिला सुरक्षा व सामाजिक न्याय के मुद्दे पर जहां विपक्ष हावी है वहीं सत्तापक्ष कटघरे में है। यही कारण हैं की वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव जैसा माहौल इस बार कहीं किसी राज्य या लोकसभा क्षेत्र में नहीं दिख रहा। SC/ST&OBC का भय वाजिब..!

सामाजिक न्याय के नाम पर भाजपा सरकार के द्वारा देशभर में सरकारी नौकरियों और कॉलेजों में सवर्णों को (ईडब्ल्यूएस) दस प्रतिशत आरक्षण दे दिया गया। जिसको लेकर एससी, एसटी और ओबीसी समाज के नेता अपने मामूली वोट बैंक के बाचाव में विरोध नहीं किये, लेकिन एससी, एसटी और ओबीसी समाज के युवा इसका विरोध उसी समय से कर रहे हैं। एससी, एसटी व पिछड़े वर्ग के युवा ईडब्ल्यूएस कोटा को आरक्षण के सिद्धांत को खत्म करने के लिए बैकडोर एंट्री मानते हैं। जबकि रिजर्वेशन का उद्देश्य सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर बैकवर्ड समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना है। वहीं उत्तर प्रदेश के अधिकांश विश्वविद्यालयों में उच्च वर्ग के लोगों को कुलपति बनाये जाने का मामला उठ रहा है। एससी, एसटी और ओबीसी समाज के कुलपति नाम मात्र के हैं।

यही कारण है कि समाजिक न्याय के मुद्दे पर बीजेपी सरकार एससी, एसटी और ओबीसी के लोगों को संतुष्ट करने में विफल रही है, हालांकि बीजेपी सरकार में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा जरूर दिया गया। लेकिन यह भी देखने आया कि इस सरकार ने अपने ही द्वारा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के बाद इस संस्था की रिपोर्ट को मानने में आनाकानी करने लगी। ऐसे दो मामले केवल एक राज्य उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए हैं दोनों ही उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग से हैं। पहला मामला है 68500 शिक्षक भर्ती में नियमानुसार आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को मिलने वाली छूट न देना। और 69000 शिक्षक भर्ती में नियमानुसार ओबीसी दलित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र न दिया जाना।

69000 शिक्षक भर्ती वर्ष 2018 में आयोजित की गयी थी। 21 जून 2020 को 69000 अभ्यर्थियों की चयन सूची आई थी जिसको लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि आरक्षण लागू करने में विसंगति की गई है। जब विभाग ने मामले का संज्ञान नहीं लिया तो सभी चयन पाने से वंचित अभ्यर्थी अपनी शिकायत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग नई दिल्ली में दर्ज कराई। लगभग एक वर्ष हुई सुनवाई के बाद 29 अप्रैल 2021 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि पिछड़े वर्ग को नियमानुसार आरक्षण नहीं दिया गया है।

आयोग की रिपोर्ट में बिन्दु संख्या 16 में साफ लिखा है कि उपरोक्त प्रकरण में ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कुल 18598 सीटो में से 5844 सीटें ऐसी है जो ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों को दी जानी थी, परन्तु जो जनरल श्रेणी के उम्मीदवारों को दी गई है और इस प्रकार ओबीसी उम्मीदवारों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। आयोग द्वारा प्रश्नगत मामले में विस्तृत जाँच की गयी, जिसमें बताया गया है की भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15 व 16 आदि के उल्लंघन किये गए है। इस मामले को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने लंबे समय तक आंदोलन किया। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने यह स्वीकार तो कर लिया कि भर्ती में विसंगति हुई है लेकिन पीड़ित आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र नहीं दिया। उपरोक्त कारणों से एससी, एसटी और ओबीसी समाज के लोगों में संविधान समाप्त किया जाने अथवा आरक्षण खत्म किए जाने का भय बना हुआ है।

वहीं महिला सुरक्षा को लेकर बीजेपी सरकार के तमाम दावे असफल दिखे क्योंकि एक के बाद एक घटनाएं सामने आती रहीं जिसको लेकर विपक्ष भाजपा को वर्तमान चुनाव में घेरने का पुरजोर प्रयास कर रहा है। वर्तमान बीजेपी सरकार में महिलाओं के साथ हुए अत्याचार की कुछ घटनाएं ऐसी थी जो संपूर्ण देश को झकझोर देने वाली रही, चाहे वह हाथरस कांड हो, चाहे मणिपुर में महिलाओं को निर्वस्त्र घूमाने का प्रकरण आदि ऐसी तमाम कई घटनाएं है जो डरावनी हैं। महिला पहलवान और बृजभूषण सिंह के विवाद से भी भाजपा की किरकिरी हुई। जनवरी 2023 में पहलवान विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया समेत करीब 30 पहलवानों ने भारतीय कुश्ती संघ के तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ जंतर मंतर पर धरने पर बैठे थे पहलवानों ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष पर यौन शोषण समेत कई गंभीर आरोप लगाएं थे। यही कारण है कि भाजपा ने अंतिम समय में बृजभूषण सिंह का टिकट काटकर उनके छोट बेटे करण भूषण सिंह को दे दिया। जिसपर महिला पहलवान साक्षी मलिक ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ़्तारी छोड़ो, आज उसके बेटे को टिकट देके आपने (भाजपा ) देश की करोड़ों बेटियों का हौंसला तोड़ दिया है। SC/ST&OBC का भय वाजिब..!