भाजपा की लूट चारों ओर चंदा चोर,मजदूरी चोर,वोट चोर!

मनरेगा के बाद वीबी-जी राम जी योजना में भी घोटाले के आरोप, आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने उठाए सवाल।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश इस समय ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां भगवान श्रीराम के मंदिर के नाम पर चंदा चोरी, चढ़ावा चोरी, वोट चोरी और अब गरीब मजदूरों की मजदूरी में कथित हेरफेर के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए गरीबों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

यूपीए सरकार ने गरीबों के लिए बनाया था मनरेगा कानून

आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब मजदूरों को दो वक्त की रोटी उपलब्ध कराने और रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन को रोकने के उद्देश्य से यूपीए सरकार मनरेगा योजना लेकर आई थी। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण मजदूरों को उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने और गांवों के विकास को गति देने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने केवल योजना शुरू नहीं की, बल्कि कानून बनाकर सरकार की जवाबदेही भी तय की थी।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने योजना की रीपैकेजिंग कर उसका नाम तो बदल दिया, लेकिन गरीबों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित नहीं की। उनके मुताबिक, अब इस योजना में भी बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं के मामले सामने आ रहे हैं।

अयोध्या में कथित गड़बड़ियों को लेकर भाजपा पर निशाना

आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने उत्तर प्रदेश को भगवान श्रीराम की पावन भूमि बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश को लूट का केंद्र बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहले नागरिकों के वोट, फिर प्रभु श्रीराम के नाम पर जुटाए गए चंदे और चढ़ावे तथा अब मजदूरों के रोजगार से जुड़ी योजना में कथित गड़बड़ियों के आरोप सामने आ रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि फिलहाल उत्तर प्रदेश के केवल नौ जिलों के कुछ स्थानों पर अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की कि पूरे प्रदेश में योजना के क्रियान्वयन की व्यापक और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने आशंका जताई कि समग्र जांच होने पर कथित घोटाले का दायरा हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

डिजिटल हाजिरी और क्लोन ऐप के जरिए फर्जी उपस्थिति का आरोप

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने वी.बी.-जी राम जी योजना, जिसे मनरेगा के स्थान पर लाया गया है, की डिजिटल हाजिरी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि डिजिटल उपस्थिति में गंभीर हेरफेर और कथित क्लोन ऐप के माध्यम से फर्जी हाजिरी दर्ज किए जाने के मामले सामने आए हैं। आराधना मिश्रा ‘मोना’ के अनुसार, केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 में ही डिजिटल हाजिरी में हेरफेर की समस्या को स्वीकार करते हुए राज्यों को आगाह किया था। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में ऐसे आरोप सामने आना निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।

उत्तर प्रदेश के नौ जिलों में गड़बड़ियों का विवरण

1. अयोध्याः बारिश के दौरान 1,124 मजदूरों की हाजिरी

25 से 27 सितंबर 2026 के बीच अयोध्या के 11 ब्लॉकों में 1,124 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज हुई। संबंधित मजदूरी लगभग ₹3.37 लाख बताई गई। आरोप है कि भारी बारिश के दौरान इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज हुई, जबकि वास्तविक कार्य और मजदूरों की मौजूदगी का सत्यापन आवश्यक है। दिनवार हाजिरी 25 सितंबर को 297, 26 सितंबर को 28 और 27 सितंबर को 799 मजदूरों की थी। मवई, रुदौली और अमानीगंज में भी बड़ी संख्या में फर्जी उपस्थिति दर्ज होने का विवरण सामने आया।

2. संभलः 5,587 मजदूरों की हाजिरी और ₹16 लाख के कथित फर्जीवाड़े का मामला


25 से 27 सितंबर के बीच संभल के सभी आठ ब्लॉकों में 381 कार्यों के 1,049 मस्टर रोल में 5,587 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज हुई। इस मामले में लगभग ₹16 लाख के कथित फर्जीवाड़े का आरोप है। दिनवार उपस्थिति 25 सितंबर को 3,209, 26 सितंबर को 756 और 27 सितंबर को 1,622 मजदूरों की रही। भारी बारिश और जलभराव के बीच दर्ज इस हाजिरी पर सवाल है कि क्या सभी मजदूर वास्तव में कार्यस्थलों पर मौजूद थे और रिकॉर्ड में दिखाए गए काम हुए थे।

3. रामपुरः पाँच ब्लॉकों में 1,008 मजदूरों की संदिग्ध हाजिरी

26 सितंबर को स्वार, मिलक, शाहाबाद, सैदनगर और बिलासपुर ब्लॉकों में 1,008 मजदूरों की हाजिरी दर्ज हुई। संबंधित भुगतान लगभग ₹3.24 लाख बताया गया। आरोप है कि भारी बारिश के दौरान प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई। सवाल है कि क्या दर्ज हाजिरी वास्तविक काम और मजदूरों की मौजूदगी पर आधारित थी।

4. हरदोईः 13 ग्राम पंचायतों में 894 मजदूरों की हाजिरी

26 और 27 सितंबर को शाहाबाद विकासखंड की 13 ग्राम पंचायतों में 26 कार्यों के लिए 101 मस्टर रोल जारी हुए और 894 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई। आरोप है कि बारिश और जलभराव के दौरान मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई। ऐसे में यह जाँचना जरूरी है कि कितने कार्य वास्तव में हुए और क्या दर्ज उपस्थिति वास्तविक मजदूरों से मेल खाती थी।

5. गाजीपुरः बारिश  के दौरान हजारों मजदूरों की हाजिरी

गाजीपुर में बारिश, जलभराव और गांधी जयंती के दौरान दर्ज हाजिरी पर गंभीर सवाल उठे। रिपोर्ट के अनुसार, 26 सितंबर को 532 कार्यों के 2,480 मस्टर रोल पर 21,773 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज हुई। 27 सितंबर को 557 कार्यों के 2,540 मस्टर रोल पर 22,196 मजदूरों की हाजिरी दर्ज हुई। 2 अक्टूबर को भी 322 कार्यों के 1,428 मस्टर रोल पर 12,606 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होने की रिपोर्ट है। आरोप है कि प्रतिकूल मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में हाजिरी दर्ज हुई और पुरानी तस्वीरों के इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई। सवाल है कि क्या इन सभी कार्यस्थलों पर वास्तविक काम हुआ था।

6. देवरियाः तीन दिनों में 13,754 मजदूरों की उपस्थिति

25 से 27 सितंबर के बीच देवरिया में सड़क निर्माण, पौधरोपण और अन्य कार्यों के लिए 13,754 मजदूरों की हाजिरी दर्ज हुई। दिनवार संख्या 6,367, 2,564 और 4,823 बताई गई। आरोपों और रिपोर्टों में जिले में दर्ज वर्षा तथा वास्तविक कार्यस्थलों की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए गए। मुख्य सवाल यह है कि क्या प्रत्येक स्थान पर दर्ज कार्य और उपस्थिति का स्वतंत्र सत्यापन हुआ तथा क्या रिकॉर्ड में दर्ज काम वास्तव में किया गया था।

7. महराजगंजः काम नहीं होने के बावजूद 906 मजदूरों की हाजिरी का आरोप

महराजगंज के निचलौल ब्लॉक में चार कार्यस्थलों की जाँच से जुड़े विवरण में आरोप लगाया गया कि काम नहीं होने के बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड में 906 मजदूरों की हाजिरी दर्ज थी। संबंधित राशि लगभग ₹2.71 लाख बताई गई। बड़हरा चरगहा, हरपुर पकड़ी और पैकोली कला में भी कथित अनियमितताओं का उल्लेख है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर चकमार्गों के किनारे गन्ने और धान की फसल तथा खेतों में पानी होने के बावजूद कार्य की हाजिरी दर्ज की गई। ग्रामीणों ने पहले से पूरे हो चुके कार्यों पर दोबारा हाजिरी लगाने और मजदूरों को केवल फोटो खिंचवाने के लिए ले जाने के आरोप भी लगाए।

8. चंदौली, गाजियाबाद और बहराइचः क्लोन ऐप से फर्जी हाजिरी दर्ज करने का आरोप

इन तीन जिलों में सरकारी एन.एम.एम.एस. ऐप से मिलता-जुलता कथित क्लोन ऐप इस्तेमाल करने का मामला सामने आया। आरोप है कि मोबाइल में पहले से सुरक्षित तस्वीरों के आधार पर मजदूरों की सामूहिक हाजिरी दर्ज करने की कोशिश की गई। रिपोर्टों के अनुसार, क्लोन ऐप को सक्रिय करने के लिए ए.पी.के. फाइल और एक्सेस-की का इस्तेमाल किए जाने तथा रोजगार सेवकों की विभागीय लॉगिन आईडी और पासवर्ड के दुरुपयोग का दावा किया गया। 100 मजदूरों की हाजिरी के लिए ₹1,000 और 200 से अधिक मजदूरों के लिए ₹5,000 तक वसूले जाने की सूचना है। ए.पी.के. फाइल और एक्सेस-की के लिए ₹15,000 से ₹20,000 तक लेने का भी आरोप है। यह मामला डिजिटल निगरानी व्यवस्था को दरकिनार कर बिना वास्तविक उपस्थिति के हाजिरी दर्ज करने के प्रयास का है। इन जिलों में कितनी हाजिरी दर्ज हुई और कितना भुगतान हुआ, इसका पूरा जिलावार विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

9. जालौनः अलग-अलग कार्यस्थलों पर एक जैसी तस्वीरें अपलोड करने का आरोप

उरई के कुठौंद ब्लॉक की बघावली मुस्तकिल और ऊमरी मुस्तकिल ग्राम पंचायतों में अलग-अलग कार्यों के लिए छडडै पोर्टल पर एक जैसी तस्वीरें अपलोड होने के आरोप सामने आए। आरोप यह भी है कि बघावली मुस्तकिल के कार्य में खेड़ा मुस्तकिल के श्रमिकों के नाम पर हाजिरी दर्ज की गई। यदि एक ही तस्वीर अलग-अलग कार्यस्थलों की उपस्थिति दिखाने के लिए इस्तेमाल हुई है, तो यह डिजिटल हाजिरी की विश्वसनीयता और वास्तविक मजदूरी भुगतान पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

केंद्र ने जुलाई 2025 में ही चेतावनी दी थी-

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 8 जुलाई 2025 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र जारी करके छडडै ऐप के दुरुपयोग और डिजिटल हाजिरी में हेरफेर पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

मंत्रालय ने सात प्रमुख विसंगतियाँ चिन्हित की थीं-

असंबंधित तस्वीरें अपलोड करना।
लाइव फोटो के बजाय पहले से मौजूद तस्वीरों की फोटो अपलोड करना।
वास्तविक और रिकॉर्ड में दर्ज मजदूरों की संख्या में अंतर।
पुरुष और महिला मजदूरों की वास्तविक तथा दर्ज संख्या में अंतर।
एक ही मजदूर की तस्वीर का कई मस्टर रोल में इस्तेमाल।
सुबह और दोपहर की तस्वीरों में मजदूरों की संख्या या संरचना में अंतर।
दोपहर की तस्वीरें अपलोड नहीं करना।

केंद्र ने ग्राम पंचायत स्तर पर उसी दिन 100 प्रतिशत सत्यापन, ब्लॉक और जिला स्तर पर अगले दिन तथा राज्य स्तर पर दो दिन के भीतर नमूना सत्यापन के निर्देश दिए थे। विस्तृत डिजिटल सत्यापन प्रणाली तैयार होने तक मैन्युअल जाँच और दैनिक रिपोर्टिंग भी अनिवार्य की गई थी। मंत्रालय ने संदिग्ध मामलों की जाँच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, कार्रवाई रिपोर्ट (ए.टी.आर.) भेजने तथा राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर समर्पित एन.एम.एम.एस. निगरानी प्रकोष्ठ बनाने के निर्देश भी दिए थे।

12 राज्यों में अनियमितताएँ, आधे से अधिक ने जवाब नहीं दिया

वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्रीय टीमों ने 23 राज्यों में ग्रामीण रोजगार योजना के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए विशेष दौरे किए। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 48 केंद्रीय टीमों ने 21 जिलों का निरीक्षण किया। जुलाई 2025 की प्रदर्शन समीक्षा समिति की बैठक में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 12 राज्यों के साथ वित्तीय अनियमितताओं और प्रक्रियागत कमियों के निष्कर्ष साझा किए। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, केरल ,बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, नागालैंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल थे।

रिपोर्ट के अनुसार, इन राज्यों में आधे से अधिक ने उस समय केंद्र को जवाब या कार्रवाई रिपोर्ट नहीं भेजी थी। आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने सवाल उठाया कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार ने भी केंद्र की चेतावनी और निरीक्षण निष्कर्षों पर जवाब नहीं दिया था? क्या राज्य ने निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई रिपोर्ट भेजी? कितने संदिग्ध मस्टर रोल की जाँच हुई और कितने मामलों में गड़बड़ी सामने आई? सरकार इन सवालों का स्पष्ट जवाब दे।

आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने माँग की कि-

1. अयोध्या, संभल, रामपुर, हरदोई, गाजीपुर, देवरिया, महराजगंज, चंदौली, गाजियाबाद, बहराइच और जालौन में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जाँच हो।
2. कथित क्लोन ऐप, ए.पी.के. फाइल, एक्सेस-की और लॉगिन आईडी के इस्तेमाल की जाँच कराई जाए।
3. बारिश के दौरान दर्ज हाजिरी का वास्तविक कार्यस्थलों, तस्वीरों, मस्टर रोल और मजदूरी भुगतान से मिलान किया जाए।
4. केंद्र के 8 जुलाई 2025 के निर्देशों के अनुपालन, सत्यापन और कार्रवाई रिपोर्ट का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
5. उत्तर प्रदेश सरकार स्पष्ट करे कि उसने केंद्र को जवाब और ए.टी.आर. भेजी या नहीं।
6. पूरे प्रदेश में व्यापक जाँच कराई जाए और जहाँ फर्जी हाजिरी तथा गलत भुगतान प्रमाणित हों, वहाँ नियमानुसार धन की वसूली और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा‘मोना’ ने कहा कि ग्रामीण रोजगार योजना का उद्देश्य मजदूरों को रोजगार और आजीविका सुरक्षा देना है, न कि फर्जी हाजिरी के जरिए सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का रास्ता खोलना। जब केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 में ही डिजिटल हाजिरी में हेरफेर की समस्या स्वीकार कर ली थी, तो उत्तर प्रदेश में ऐसे गंभीर आरोप सामने आना सरकार की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

अभी तो कुछ जिलों के कुछ स्थानों से ही मामले सामने आए हैं। पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक और निष्पक्ष जाँच होने पर ही अनियमितताओं का वास्तविक पैमाना सामने आएगा। भाजपा सरकार को ग्रामीण मजदूरों के हक और जनता के पैसे के संबंध में जवाब देना होगा। प्रेसवार्ता में मुख्य रूप से शिव पाण्डेय, कुंवर सिंह निषाद, प्रियंका गुप्ता, सचिन रावत, सिद्धिश्री, डा0 अलीमुल्ला खान, मान सिंह चैहान आदि मौजूद रहे।

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