Tuesday, January 20, 2026
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रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा अभियान

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योगी की पाती और डिटेंशन सेंटर: सुरक्षा या सियासत?
योगी की पाती और डिटेंशन सेंटर: सुरक्षा या सियासत?
राजू यादव
राजू यादव

उत्तर प्रदेश में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू…! सिस्टम अलर्ट मोड में… सुरक्षा एजेंसियाँ एक्टिव… और खामोश गलियों में अब कड़ाई की दस्तक। सरकार का दावा—“घुसपैठ रोकना अब सिर्फ ज़रूरत नहीं, सुरक्षा की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।” कौन-कहाँ छिपा है? कहाँ से आ रहे हैं संदिग्ध? और इस पूरे ऑपरेशन का असली लक्ष्य क्या है?

प्रदेश सरकार ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। इसके पहले चरण में प्रदेश के हर मंडल में डिटेंशन सेंटर स्थापित करने के आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 17 नगर निगमों को अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद और उनमें काम भी कर रहे रोहिंग्या-बांग्लादेशियों की विस्तृत सूची तैयार करने के लिए कहा है। तैयार की गई सूचियां संबंधित मंडलायुक्तों और पुलिस महानिरीक्षकों (आइजी) को जांच के लिए भेजी जाएंगी। मंडलायुक्त और आइजी सत्यापन प्रक्रिया में चिह्नित लोगों को रखने के लिए समर्पित डिटेंशन सेंटर स्थापित करेंगे।

मुख्यमंत्री ने शीर्ष अधिकारियों के साथ अपने सरकारी आवास पर आयोजित बैठक में इसके स्पष्ट निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई है। कई जिलों में सत्यापन, दस्तावेजों की जांच शुरू हो गई है। गौरतलब है कि 22 नवंबर को भी मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि प्रत्येक जिले में अस्थायी डिटेंशन सेंटर स्थापित किए जाएं, जहां सत्यापन पूरा होने तक इन्हें रखा जाए। अब मुख्यमंत्री ने पहले चरण में सभी मंडल मुख्यालयों में डिटेंशन सेंटर बनाने के लिए कहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सामंजस्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री से मिले निर्देश के बाद अब विदेशी नागरिकता वाले अवैध अप्रवासियों को इन डिटेंशन सेंटरों में जरूरी सत्यापन पूरा होने तक रखा जाएगा। सत्यापन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें उनके मूल देशों में वापस भेजा जाएगा।

संदिग्ध बांग्लादेशियों की निगरानी तेज होने का असर दिखने लगा है। योगी सरकार की सख्ती के बाद सफाई कार्य से जुड़े संदिग्ध बांग्लादेशियों से एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) नंबर मांगा गया तो वे दे नहीं पाए। यह नंबर असम सरकार की तरफ से दिया गया है, जिसमें पूर्वजों तक का जिक्र है, जो साबित करता है कि वे बांग्लादेशी घुसपैठिए नहीं हैं।

कूड़ा प्रबंधन का काम देख रही नगर निगम की तरफ से अधिकृत मेसर्स लखनऊ स्वच्छता अभियान प्रबंधन ने सफाई कर्मचारियों से एनआरसी नंबर मांगा तो 160 कर्मचारी नहीं दे पाए और नौकरी छोड़कर चले गए। इससे साफ है कि उनकी असम की नागरिकता संदिग्ध है। अब पुलिस और खुफिया तंत्र के लिए जांच का विषय यह भी है कि आखिर ये 160 कर्मी कहां गए और क्या कर रहे हैं।

दरअसल सरकार की जांच से संदिग्ध बांग्लादेशियों में भगदड़ मच गई है। महापौर सुषमा खर्कवाल ने भी संदिग्ध बांग्लादेशियों को शहर से बाहर करने का एक साल से अभियान चला रखा है। इंदिरानगर में पिछले साल उन्होंने संदिग्ध बांग्लादेशियों की बस्ती को उजाड़ दिया था। इसके बाद से लगातार अभियान चलाकर शहर में संदिग्ध बांग्लादेशियों की

बस्तियों की जांच कराई गई थी। पिछले दो माह से सख्ती बढ़ने के साथ ही पुलिस ने भी नगर निगम में सफाई का ठेका पाई संस्थाओं से उन सफाई कर्मचारियों एनआरसी नंबर मांगा था, जो अपने को असम का निवासी बताते हैं, लेकिन अभी तक एनआरसी दे नहीं पाए हैं, जबकि नगर निगम के वार्ड एक, तीन, चार, छह, सात में कूड़ा प्रबंधन का काम देख रही मेसर्स लखनऊ स्वच्छता अभियान में काम कर रहे हैं। असम का आधार कार्ड दिखाने वाले कर्मचारियों से एनआरसी मांगी गई तो वे नहीं दे पाए और दबाव पड़ने पर नौकरी छोड़कर ही भाग गए। कंपनी ने इसकी जानकारी महापौर को भी दी है।

महापौर सुषमा खर्कवाल का कहना है कि काम छोड़कर गए कर्मचारियों की गतिविधियां पता करने के लिए कार्यदायी कंपनी से कहा गया है कि वह पुलिस को भी इसकी जानकारी के साथ ही मोबाइल नंबर और आधार कार्ड भी उपलब्ध करा दें। एनआरसी ही है, सही पता करने का तरीका आधार कार्ड तो हर किसी के पास है, लेकिन एनआरसी उन्हीं के पास है, जो लंबे समय से असम के निवासी थे। एनआरसी असम के निवासियों और संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों के बारे में हकीकत बता देगा। इसी तरह की जांच कराने के लिए अस्पतालों में भी निगरानी के लिए महापौर ने सीएमओ को पत्र लिखा है।

काम छोड़कर गए 160 सफाई कर्मचारियों की सूची नगर निगम को उपलब्ध करा दी गई है। जिससे उनकी जांच पुलिस से कराई जा सके।…..- अभय रंजन, सिटी हेड, मेसर्स लखनऊ स्वच्छता अभियान

लखनऊ कहां से कितने कर्मी काम छोड़कर भागे-

जोन. कर्मी

एक …….38

चार……..70

तीन……12

छह…..12

सात…..36

नगर निगम की टीम लगातार झोपड़पट्टियों की सूची तैयार कर वहां रहने वालों का ब्योरा तैयार कर रही है। सभी ठेकेदारों से कहा संदिग्ध बांग्लादेशियों के अभिलेख जमा कराने को कहा गया है, जिसका परीक्षण पुलिस को भेजकर कराया जाएगा।…….. सुषमा खर्कवाल, महापौर