Tuesday, January 27, 2026
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लखनऊ विश्वविद्यालय से यूजीसी का पुरजोर विरोध शुरू

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लखनऊ विश्वविद्यालय से यूजीसी का पुरजोर विरोध शुरू
लखनऊ विश्वविद्यालय से यूजीसी का पुरजोर विरोध शुरू

लखनऊ विश्वविद्यालय से यूजीसी का पुरजोर विरोध शुरू। गाइडलाइन वापस लेने को लेकर छात्रों ने भरी हुंकार। सरकार ने कानून वापस नहीं लिया तो जायेंगे संसद भवन: आलोक मिश्रा

लखनऊ। UGC की नई गाइडलाइंस जो विवादों और भ्रामकता से भरी हुई के विरोध में लखनऊ विश्वविद्यालय के आम छात्रों ने मोर्चा खोल दिया लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेता आलोक मिश्रा ने कहा कि शैक्षिक परिसर विश्वविद्यालय व महाविद्यालय विमर्श और विचार का केंद्र होता है, जहां से विचार उपजता है और पंक्ति के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचता हैं यहां हम मित्रता करते हैं अपने सुख दुख बांटते हैं कैंटीन में पहुंच कर एक ही प्लेट से खा लेते हैं हॉस्टल के मेश में हमे नहीं पता होता कि ये थाली मुझसे पहले किसने प्रयोग की हर जिले क्षेत्र जाती धर्म के लोगों से हमारी मित्रता होती है और ये यूजीसी का नया नियम इस परम्परा में बाधक है। सरकारें ऐतिहासिक रूप से यह जानती है की जब जब सत्ताधीश बेलगाम होते हैं अराजक होते हैं तब तब ये छात्र सड़कों को बहाल कर सदन का संतुलन बनाने में महती भूमिका निभाती है इमर्जेंसी के दौर में तथा अलग अलग समय पर ये देखने को मिला है।

छात्रों की ताकत छात्र संघ पर ताले लटका कर पहले से कमजोर की जा चुकी है और अब ऐसे मैंडेट से उनके बीच में सामाजिक और जातीय विभेद उत्पन्न कराकर कमजोर करने की साजिश है इसे सभी छात्र जान रहे हैं , छात्र नेता रिशेंद्र प्रताप सिंह ने यूजीसी को मैकाले शिक्षा नीति की तरह फूट डालो और राज करो कि मंशा से छात्र राजनीति का दमनकर्ता बताया और कहा इस मैंडेट से किसी भी वर्ग के छात्र को कोई सहायता नहीं मिलने वाली बल्कि अब छात्र एक दूसरे से घुलने मिलने में असहजता महसूस करेंगे कि कब उनके ऊपर किसी प्रकार की कार्यवाही का आह्वान हो जाए।

छात्र नेता जतिन शुक्ला ने कहा ये बराबरी नहीं बंटवारे का फरमान अगर वापस नहीं होता तो हम आगे और बड़े आंदोलन के लिए देखेंगे आज के समय में हमारी एकता में कहीं कोई फूट न पड़े इसीलिए सभी छात्रों को एक आवाज में इसका विरोध करना चाहिए। शशि प्रकाश ने कहा कि से विरोध भरे स्वर में कहा कि यूजीसी एक्ट के खिलाफ आज लखनऊ विश्वविद्यालय में सर्व समाज के हजारों छात्रों ने उग्र आंदोलन हैं। छात्रों ने सीधे तौर इस बिल को बर्खास्त करने की मांग की। छात्रों ने एसीपी को ज्ञापन देकर इस कानून को खत्म करने की मांग की।

अधिनियम 1956 के तहत जिस यूजीसी की स्थापना विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में शिक्षा को उच्च स्तर पर ले जाने के लिए हुई थी आज वही यूजीसी एक काला कानून बना कर विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में छात्रों को जाती के आधार पर लड़ा रही है जो कि निंदनीय है। इस दौरान, आयूष सिंह राठौड़, राजन यादव, उदयवीर, हिमालय भारत, नमन राय, संजराज, एवं सहित हजारों छात्र मजबूत रहे। आलोक मिश्रा शक्ति दुबे शशि, आकर्ष मिश्र,मिश्रा अनुराग सिंह तोमर आयुष राठौर रूपेंद्र उदय वीर राज कैफ गाजीपुर रौशन हर्ष मिश्रा, हिमालय भारत , यश शुक्ला ,उदय राज ,आफताब आलम अयान आलम आदि सैकड़ों छात्र मौजूद रहे। लखनऊ विश्वविद्यालय से यूजीसी का पुरजोर विरोध शुरू