Tuesday, January 20, 2026
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चंद्रयान-3 का लखनऊ कनेक्शन

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चंद्रयान-3 का लखनऊ कनेक्शन
चंद्रयान-3 का लखनऊ कनेक्शन

अंतरिक्ष जगत में भारत आज इतिहास रचने जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मिशन चंद्रयान-3 आज शाम चंद्रमा की सतह पर ‘साफ्ट लैंडिंग’ करेगा। पूरी दुनिया इस पल का इंतजार कर रही है। इस क्रम में, नासा के एक पूर्व शीर्ष अधिकारी ने कहा कि चंद्रयान-3 में महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र करने की अपार क्षमता है और यह चंद्रमा को समझने में अहम योगदान देगा। बता दें, वह भारत और अमेरिका की अंतरिक्ष साझेदारी के चंद्रमा पर आगे बढ़ने पर बात कर रहे थे। चंद्रयान-3 का लखनऊ कनेक्शन


भारत की ‘राकेट वूमेन’ और लखनऊ की बेटी डॉ. रितु कारिधाल की अगुवाई में इंडिया का मून मिशन चंद्रयान-3 लैंडिंग के साथ पूरा हो रहा। इस बड़ी उपलब्धि में लखनऊ का बड़ा कनेक्शन है। चंद्रयान-3 की मिशन डायरेक्टर डॉ.रितु कारिधाल लखनऊ से हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा लखनऊ के नवयुग कन्या इंटर कॉलेज में हुई। बाद में लखनऊ विश्वविद्यालय से उन्होंने B.Sc. और M.Sc.की पढ़ाई की।

लखनऊ ने बेटी की अगुवाई में मून मिशन


लखनऊ विश्वविद्यालय की डीन प्रो.पूनम टंडन ने बताया,”रितु ने लखनऊ विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। साल 1994 से 1996 तक MSC की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने प्रोफेसर डॉ. मनीषा गुप्ता के अंडर में पीएचडी में दाखिला लिया। उनका चयन GATE में हो गया। फिर वो IISC बेंगलुरु चली गई। आगे चलकर उनका सिलेक्शन ISRO में हो गया।”

गजब की विलक्षण क्षमता


लखनऊ विश्वविद्यालय की डीन और रितु कारिधाल की शिक्षक रही प्रो. पूनम टंडन ने बताया,”न केवल लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गोल्डन डे हैं। यहां से पढ़ी हुई बेहद साधारण परिवार की बेटी ने आज वो मुकाम हासिल किया हैं, जिस पर पूरे देश को नाज हैं। रितु बेहद साधारण परिवार की असाधारण काबिलियत वाली बेटी रही। उनकी बातचीत करने का अंदाज बेहद सहज और रोचक हैं। LU के स्टूडेंट्स के साथ उनका कम्युनिकेशन लाजवाब रहा। वो साइंटिस्ट के रूप असल में एक गाइड और मोटिवेटर हैं। तमाम स्टूडेंट्स के लिए प्रेरणास्रोत हैं।”

2019 में लखनऊ विश्वविद्यालय ने मानद उपाधि से किया था सम्मानित


चंद्रयान-2 के बाद साल 2019 में वो लखनऊ विश्वविद्यालय आई थी। इस दौरानलखनऊ विश्वविद्यालय में उन्हें डॉक्टरेट (D. Litt) की मानद उपाधि से नवाजा। इस दौरे में वो फिजिक्स डिपार्टमेंट और लैब भी गई। उन्होंने स्टूडेंट्स से भी अनुभव साझा किए।

लखनऊ विश्वविद्यालय ने दिए ISRO को नायाब साइंटिस्ट


प्रो.पूनम टंडन ने बताया,”लखनऊ विश्वविद्यालय से अब तक कई स्टूडेंट्स ने ISRO जॉइन किया हैं। बड़ी बात यह हैं कि रितु के बाद भी कई स्टूडेंट ISRO जॉइन कर चुके हैं। सबसे अहम बात यह हैं कि सभी की बेहतर परफॉर्मेंस रही हैं। डॉ. अनिल भारद्वाज इनमें बड़ा नाम हैं। इसके अलावा सत्य प्रकाश ओझा और मोहम्मद हसन भी शामिल हैं। फिलहाल मोहम्मद हसन आदित्य मिशन से जुड़े हैं।”

रितु कारिधाल के लखनऊ वाले घर में जश्न का माहौल


लखनऊ के राजाजीपुरम इलाके में रितु कारिधाल का पैतृक घर हैं। घर में रितु के भाई रोहित हैं। हालांकि घर के लोग मीडिया से बातचीत के लिए तैयार नहीं हुए। चंद्रयान-3 के सफल लांचिंग के बाद रितु ने लखनऊ में अपने परिवार के लोगों से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभी पहला कदम है, असली परीक्षा बाकी है।

भारत चांद पर बड़ी उपलब्धि हासिल करने के सबसे करीब पहुंच गया है। चंद्रयान-3 मिशन का लैंडर मॉड्यूल चांद की कक्षा में चक्कर लगा रहा है और आज ही लैंडिंग करने की उम्मीद है। भारत चांद पर बड़ी उपलब्धि हासिल करने की दहलीज पर खड़ा है। चंद्रयान-3 मिशन का लैंडर मॉड्यूल चांद की कक्षा में चक्कर लगा रहा है और जल्द ही लैंडिंग करेगा।

चंद्रयान मिशन से भारत को क्या होगा फायदा…?

मिशन के सफल होने से वैज्ञानिकों को चंद्रमा के वातावरण की जानकारी मिलेगी कि आखिर चांद पर घर बसाना संभव है या नहीं। इसके साथ ही, दक्षिणी ध्रुव पर मिट्टी का केमिकल विश्लेषण किया जाएगा और चांद पर मौजूद चट्टानों की भी स्टडी करना संभव हो जाएगा। इसके साथ ही, दक्षिणी ध्रुव में ज्यादातर समय छाया रहती है, जिसको लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिकों के मन में कई सवाल हैं। अब तक मिशन में सभी चीजें उम्मीद और योजना के मुताबिक रही है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार ही हुआ, तो चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सॉफ्ट लैंडिंग करने वाले दुनिया के पहले चंद्र मिशन के रूप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर लेगा। चंद्रयान-3 का लखनऊ कनेक्शन