Tuesday, January 27, 2026
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जानें कौन घर का रहा न घाट का

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शिवपाल घर के रहे न घाट के “पुत्रमोह में धृतराष्ट्र बन गए हैं चाचा शिवपाल यादव –

[responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”इस समाचार को सुने”] बेशक माना जा सकता है कि शिवपाल यादव नेताजी के अनुज हैं और नेताजी के अनुज के नाते ही इनकी कोई पहचान है और सपा सरकार में ये अत्यंत महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहकर क्या क्या नहीं किये।अखिलेश यादव को बदनाम कराने के साथ पार्टी को दुर्दिन में पहुँचाने का काम 2 चाचाओं ने ही किया है।नेताजी वास्तव में संघर्ष कर अपनी कूटनीति से पार्टी को विस्तारित करने के साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम स्थान बनाये।विधानसभा चुनाव-2022 में सपा सत्ता के शिखर पर पहुंच सकती थी,पर चाचाओं ने अपने को बचाने में अखिलेश की आशाओं पर पानी फेर दिया।व्यक्तिगत रूप से अखिलेश यादव से जानबूझकर कोई गलती नहीं हुई,पर पुत्रमोह में फँसे चाचाओं ने अखिलेश की किरकिरी करा दी।यह सत्य है कि अखिलेश निरपराध थे,पर चाचाओं ने अति महत्वाकांक्षी होने के कारण अखिलेश को बेवजह बदनाम कर दिए।आज पार्टी जो अतिपिछड़ों के लिए अस्वीकार है,या खलनायक है तो अखिलेश के कारण नहीं,इस स्थिति में शिवपाल यादव सहित एक ओर चाचा ने बदनाम कर दिया।मिशन-2022 में सपा की सरकार बननी निश्चित थी,पर कुसी न किसी रूप में चाचाओं ने अपने स्वार्थ में खेल बिगाड़ दिया।एक चाचा तो केवल मोटी गड्डी के चक्कर मे परेशान थस तो दूसरे पुत्रमोह में धृतराष्ट्र बने हुए थे।

चच्चा चाहते थे बन जाएं प्रतिपक्ष के नेता-
अखिलेश यादव का प्रतिपक्ष का नेता बनना अत्यंत उचित निर्णय था।अपने नहीं बनते तो जीसी गैरयादव को बनाना पार्टी हित में होता।शिवपाल यादव चच्चा चाहते थे कि हम प्रतिपक्ष के नेता बने,जो बिल्कुल अनुपयुक्त साबित होते।अखिलेश जी के चच्चा विचारधारा से कत्तई पिछड़ा वंचित नहीं है।इन्हें माल टाल मिल जाये,यही इनकी विचारधारा है।इनके लिए पार्टी हित से ज्यादा स्वयं का पारिवारिक हित अहम होता है।वास्तव में शिवपाल यादव कही से भी प्रतिपक्ष के नेता बन्नेबके पात्र नहीं थे,अगर बनायया जाता तो परिवारवादी होने के साथ हँसी का पात्र बनना पड़ता।सिर मुड़ाते ओले पड़ना- शिवपाल भाजपा के इशारे पर निजस्वार्थ व पुत्रमोह में बिल्कुल आपा खो गए हैं।एक मुहावरा है-“सिर मुड़ाते ओले पड़ना,यह शिवपाल चच्चा पर बिल्कुल सटीक बैठ रही है।भाजपा में जाने के लिए आया खो गए थे,पर भाजपा ने अपने साथ करना उचित न समझ कर इन्हें वोटकटवा के रूप में ही इस्तेमाल करना उचित समझती हसि।शिवपाल यादव वोटबैंक के वोटकटवा नहीं बन पाएंगे,भाजपा की रणनीति शिवपाल यादव को आणि पार्टी में शामिल करने की बजाय अपने साथी के रूप में इन्हें आगे कर यादवों का वोट कटाने की रणनीति पर काम कर रही है,पे यादव इतने बेवकूफ नहीं हसीन कि वे चाचा के साथ जाने की गलती करेंगे।अतिपिछड़ों के लिए तो चाचा वास्तब में असली खलनायक हैं। [/Responsivevoice]