Thursday, March 26, 2026
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कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरान्त”भारतरत्न”सामाजिक न्याय की जीत

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कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरान्त"भारतरत्न"सामाजिक न्याय की जीत
कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरान्त"भारतरत्न"सामाजिक न्याय की जीत

लखनऊ सहित विभिन्न जनपदों में जननायक श्री कर्पूरी ठाकुर जी की जयंती सादगी से मनाई गई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के डॉ0 राममनोहर लोहिया सभागार में ’जननायक’ कर्पूरी ठाकुर के चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया। कर्पूरी ठाकुर जी के संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला। जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को मरणोपरान्त घोषित ‘भारतरत्न‘ सामाजिक न्याय के आंदोलन की जीत है जो यह दर्शाती है कि सामाजिक न्याय व आरक्षण के परम्परागत विरोधियों को भी मन मार कर अब पीडीए के 90 प्रतिशत लोगों की एकजुटता के आगे झुकना पड़ रहा है।   कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरान्त”भारतरत्न”सामाजिक न्याय की जीत

अखिलेश यादव ने मांग की कि सामाजिक न्याय के पुरोधाओं सर्वश्री डॉ0 राममनोहर लोहिया, बी.पी. मण्डल, चौधरी चरण सिंह, नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव को भारतरत्न दिया जाए। सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने वाले इन महापुरूषों ने समाज की विषमता को खत्म करने, पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और गरीबों के उत्थान के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया। श्री कर्पूरी ठाकुर जी समाजवादी नेता डॉ0 राममनोहर लोहिया एवं लोक नायक जयप्रकाश नारायण जी के अनुयायी, सामाजिक न्याय के पुरोधा और लोकतंत्र सेनानी थे। वे सामाजिक सद्भाव के प्रतीक रहे, और आज समाजवादी पार्टी, पीडीए कर्पूरी ठाकुर जी के विचारों से अनुप्राणित है। भाजपा जनकल्याण की नहीं सिर्फ चुनाव और सत्ता के लिए सोचती है। समाजवादियों को भाजपा की चालाकी से बचना है। जनता की आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति पीडीए से ही सम्भव है।

समाजवाद के सिद्धांत को व्यवहार में लाने वाले और सामाजिक न्याय व आरक्षण को सच में शोषितों, वंचितों, पीड़ितों, गरीबों व महिलाओं के लिए ढाल बनाने वाले भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी का जीवन हम सबके लिए प्रेरणा स्रोत है। उनके जीवन संघर्ष की यात्रा के बारे में हर किसी को जानना चाहिए और पीडीए के आंदोलन के लिए प्रकाश स्तंभ की तरह मानकर लगातार आगे बढ़ना चाहिए। देश में जाति-वर्ण का भेदभाव पुराना है। आज भारतीय समाज में छटपटाहट है। बाबा साहब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर के संविधान में आरक्षण की जो व्यवस्था की गई थी उसे भाजपा साजिशन समाप्त करने पर तुली है। आपातकाल के विरोध में और लोकतंत्र की रक्षा के लिए कर्पूरी ठाकुर जी ने जेल यातना भी सही थी। वे अपनी सादगी, ईमानदारी और न्याय प्रियता के कारण, गरीबों के मसीहा के रूप में मशहूर हुए। कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरान्त”भारतरत्न”सामाजिक न्याय की जीत