Sunday, January 18, 2026
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डफरिन हॉस्पिटल से रेफर प्रसूताओं के आंकड़ों में खेल

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डफरिन हॉस्पिटल से रेफर प्रसूताओं के आंकड़ों में खेल
डफरिन हॉस्पिटल से रेफर प्रसूताओं के आंकड़ों में खेल

डफरिन हॉस्पिटल से रेफर प्रसूताओं के आंकड़ों में खेल…। डफरिन से 18 प्रसूता रेफर, 20 क्वीन मेरी में हुईं भर्ती । डफरिन हॉस्पिटल से रेफर प्रसूताओं के आंकड़ों में खेल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सरकार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। वहीं दूसरी ओर सरकारी डॉक्टर इससे इतर सरकार के मंसूबों पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं। ताजा मामला राजधानी लखनऊ में स्थित महारानी अवंती बाई महिला चिकित्सालय (डफरिन) का है। जहां मई माह की मासिक रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर हेमलता यादव से मिली जानकारी में बताया गया है की डफरिन हॉस्पिटल से कुल 18 प्रसूताओं को मई माह में क्वीन मेरी हॉस्पिटल के लिये रेफर किया गया था । जिसमें 5 प्रसूताओं को दिन के समय रेफर किया गया था। और 13 प्रसूताओं को रात के समय रेफर किया गया था।


हकीकत तो तब सामने आई जब क्वीन मेरी की डॉक्टर से डफरिन हॉस्पिटल से रेफर की गई प्रसूताओं के बारे में जानकारी ली गई। तो डॉक्टर ने बताया कि बीते मई माह में डफरिन हॉस्पिटल से आई हुई 20 प्रसूताओं को क्वीन मैरी हास्पिटल में एडमिशन दिया गया था। मई माह में डफरिन हॉस्पिटल से रेफर के मामले में एक शिकायतकर्ता ने स्वास्थ्य मंत्री से भी शिकायत की थी।और कहा था। कि वे वजह सरकारी अस्पताल मरीजों को परेशान करते हैं। और इधर से उधर पूरी रात चक्कर कटवाते हैं। जिसके बाद शिकायतकर्ता ने अपनी पत्नी का प्रसव निजी अस्पताल में कराया था। इस मामले को स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने भी गंभीरता से लेते हुए संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ जांच कराने के आदेश दिए थे।

डफरिन हॉस्पिटल से दिन की अपेक्षा रात में दोगुने से अधिक प्रसूता रेफर क्यों…?

मिले आंकड़े के अनुसार बात करें तो डफरिन हॉस्पिटल से 18 प्रसूताओं को रेफर किया गया था। जबकि क्वीन मेरी में 18 से भी अधिक प्रसूताओं को एडमिट किया गया था। एक शिकायतकर्ता ने इसी महीने निजी अस्पताल में अपनी पत्नी का प्रसव कराया था। यह आंकड़े डफरिन हॉस्पिटल के डॉक्टरों की लापरवाही साबित करते हैं। ऐसे ना जाने कितने शिकायत कर्ताओं की आवाज दवा दी गई होगी। जो इन गैर जिम्मेदार डॉक्टरों की लापरवाही की भेंट चढ़े होंगे, ना जाने कितने गरीबों को बेबसी के आंसू रोना पड़ा होगा, ना जाने कितने शिकायतकर्ता निजी अस्पतालों में ठगी के शिकार हुए होंगे, यह सब सरकारी उन डॉक्टरों की गैर जिम्मेदारी के चलते हुआ होगा जो सरकार की मंशा पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं। डफरिन हॉस्पिटल से रेफर प्रसूताओं के आंकड़ों में खेल