Sunday, March 22, 2026
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किसानो ने राष्ट्रपति को दिया ज्ञापन

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किसानो ने राष्ट्रपति को दिया ज्ञापन
किसानो ने राष्ट्रपति को दिया ज्ञापन

अजय सिंह

लखनऊ। समस्याओं के निवारण के लिए राष्ट्रपति को ज्ञापन,मजदूर और किसान आज पूरे भारत में अपने मुद्दों को उजागर करने और निवारण की मांग के लिए विरोध कर रहे हैं। हम यह ज्ञापन आपको इस उम्मीद के साथ भेज रहे हैं कि आप देश की इन दो प्रमुख उत्पादन शक्तियों के पक्ष में हस्तक्षेप करेंगी। भारतीय किसान यूनियन विगत 38 वर्षों से देश के उस वर्ग की आवाज को उठा रही है जिसे लोकतंत्र में दबाने का काम किया जा रहा है। हताश देश का किसान आत्महत्या को मजबूर हो रहा है। किसानो ने राष्ट्रपति को दिया ज्ञापन

वर्षों के बदलने का क्रम जारी है, लेकिन किसान-मजदूर-आदिवासी-दलित-शोषित-पिछड़े वर्गों का यह संघर्ष अपने अधिकार के लिए जारी है। वर्ष 2025 शुरू हो चुका है, लेकिन कोई भी ऐसा माध्यम नजर नहीं आ रहा जिससे इन वर्गों का उत्थान हो सके। किसानों ने 2020 में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ देश की राजधानी को घेरकर आन्दोलन किया। किसानों के लम्बे संघर्ष के बाद जब कृषि कानून वापस लिए गए थे, तब किसानों से किए गए वादे आज तक पूरे नहीं हुए हैं।

भारतीय किसान यूनियन निम्नांकित मांगों की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहती है-

  1. सभी फसलों के लिए कानूनी रूप से गारंटीकृत खरीद के साथ सी2$50 प्रतिशत पर एमएसपी देनी सुनिश्चित की जाए।
  2. गन्ने का मूल्य उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में खर्च के अनुपात में 500 रुपये प्रति कुंतल घोषित किया जाए, क्योंकि पेराई सत्र चले 2 माह से भी अधिक का समय हो गया है। भुगतान को डिजिटल माध्यम से जोड़ा जाए।
  3. किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल जी की 43 दिन से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। उनके स्वास्थ्य को देखते हुए केन्द्र सरकार किसानों की सभी मांगें जल्द से जल्द पूरी करें।
  4. ऋणग्रस्तता और किसान आत्महत्या को समाप्त करने के लिए व्यापक ऋण माफी।
  5. राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) को खत्म किया जाए। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सार्वजनिक सेवाओं। स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली का निजीकरण न किया जाए। कोई प्रीपेड स्मार्ट मीटर न हो, कृषि पंपों के लिए मुफ्त बिजली हो, घरेलू उपयोगकर्ताओं और दुकानों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए।
  6. कोई डिजिटल कृषि मिशन (डीएएम), राष्ट्रीय सहयोग नीति और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ आईसीएआर समझौते न किए जाएं जो राज्य सरकारों के अधिकारों का अतिक्रमण करते हैं और कृषि के निगमीकरण को बढ़ावा देते हैं।

राज्य सरकारें सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा ऋण, खरीद, प्रसंस्करण और ब्रांडेड विपणन में समर्थित उत्पादक सहकारी समितियों, सामूहिक, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यमों के संघ को बढ़ावा देने के लिए सहकारी खेती अधिनियम लागू करें।

  1. अंधाधुंध भूमि अधिग्रहण को समाप्त करें, एलएआरआर अधिनियम 2013 और एफआरए को लागू करें।
  2. सार्वजनिक संपत्ति के निगमीकरण और लोगों को विभाजित करने के लिए विभाजनकारी नीतियों के उद्देश्य से कॉर्पाेरेट-साम्प्रदायिक नीतियों को खत्म करना।
  3. बीज नीति में संशोधन किया जाए, क्योंकि अत्यधिक पेस्टीसाईडस का इस्तेमाल आम जनजीवन के लिए खतरनाक होता चला जा रहा है। साथ ही खेती में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों व अन्य वस्तुओं को जीएसटी मुक्त किया जाए और देश में जेनेटिकली मोडिफाईड सीडस पर रोक लगाई जाए।
  4. शुगर केन कन्ट्रोल आर्डर एण्ड खाण्डसारी रेगुलेशन्स 2024 को रद्द किया जाए, क्योंकि इस आदेश से उत्तर प्रदेश में 350 खाण्डसारी के उद्योग प्रभावित हो रहे हैं जिसका सीधा प्रभाव गांव देहात के किसान पर पहुंच रहा है।
  5. केन्द्र सरकार न्यू नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट पॉलिसी को रद्द करे साथ ही सभी किसान संगठनों से चर्चा कर एक प्रभावी नीति तैयार करें। किसानो ने राष्ट्रपति को दिया ज्ञापन