कमाई के तबादले

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एक साल पहले स्थानांतरित बंदीरक्षक नहीं हुए रिलीव।कारागार अफसरों का गजब कारनामा,कमाई के चक्कर में बड़ी संख्या में कर दिए तबादले।

राकेश यादव

लखनऊ। नए स्थानांतरण सत्र को आने में अब कुछ ही समय बचा है लेकिन पिछलेे सत्र में हुए स्थानांतरित प्रधान बंदीरक्षक व बंदीरक्षकों को अभी तक रिलीव नहीं किया गया है। यह बात सुनने में भले ही अटपटी लगे लेकिन सच है। प्रदेश के कारागार विभाग के अधिकारियों ने यह कारनामा कर दिखाया है। स्थानांतरण सत्र 2021-2022 में कारागार विभाग में बड़ी संख्या में अधिकारियों व सुरक्षाकर्मियों के तबादले किए गए। इनमें कई सुरक्षाकर्मियों को एक साल बीत जाने के बाद आज तक रिलीव नहीं किया गया है। यह सुरक्षाकर्मी आज भी उन्हें जनपदों की जेल पर बने हुए जहां से उनका तबादला अन्यत्र जनपदों की जेलों में किया गया था। उधर विभागीय अधिकारी इस गंभीर मसले पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।


बेतरतीब तबादलों से बिगड़ी व्यवस्था- प्रदेश में छह सेंट्रल जेल है। सेंट्रल जेलो में सिर्फ सजायाफ्ता कैदियों को ही रखा जाता है। दो से तीन हजार कैदियों की क्षमता वाली इन जेलो से बड़ी संख्या में बंदीरक्षक हटा तो दिए किंतु तैनात काफी कम संख्या में किए गए। तबादला कमेटी के अधिकारियों कई सेंट्रल जेलो से 35 से 40 बंदीरक्षक स्थानांतरित कर दिए और इन जेलों पर सिर्फ आठ-दस ही बदीरक्षक ही तैनात किए गए। सेंट्रल जेल बरेली से 80 बंदीरक्षक में 45 का तबादला कर दिया गया और तैनात किए गए सिर्फ आठ-दस वार्डर ही। इसी प्रकार आगरा में 75 में 40 बंदीरक्षकों का ट्रान्सफर कर दिया, दिए गए सिर्फ दस, फतेहगड़ से 70 में 35 बंदीरक्षक हटाये गए और तैनात किए गए सिर्फ सात-आठ ही। इस अव्यवस्था की वजह से स्थानांतरित वार्डर रिलीव नही हो पाएं है।


कोरोना कॉल की वजह से प्रदेश में दो साल से तबादलो पर रोक लगी हुई थी। लंबे अंतराल के बाद प्रदेश सरकार ने वर्ष-2021-2022 में स्थानांतरण नीति जारी की। स्थानांतरण नीित के जारी होने से जेल विभाग में तबादलो को लेकर हलचल मच गई। विभाग के मुखिया डीजी पुलिस / आईजी जेल ने प्रधान बंदीरक्षक और बंदीरक्षक के तबादलों के लिए जेल मुख्यालय में डीआईजी मुख्यालय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। इस कमेटी के सदस्यों ने बड़ी संख्या मेंवार्डर-हेड वार्डर के तबादले कर दिए गए। विभागीय जानकारों के मुताबिक पिछले स्थानांतरण सत्र में करीब डेढृ हजार से अधिक संख्या में प्रधान बंदीरक्षक व बंदीरक्षक के तबादले किए गए। बताया गया है कि इन तबादलो में अधिकारियों ने जमकर वसूली भी की। वसूली के चक्कर में कई प्रधान बंदीरक्षक व बंदीरक्षक के तबादले एक जनपद के बजाए दो-दो जनपदों की जेलों में कर दिए गए।


सूत्र बताते हैं कि सेंट्रल जेल की अपेक्षा जिला जेल में प्रधान बंदीरक्षक व बंदीरक्षक की अधिक कमाई होती है। इस वजह से जिला जेल में तैनात वार्डर सेंट्रल जेल जाना ही नहीं चाहते है। सेंट्रल जेल पर तैनात बंदीरक्षक कमाई के लिए जिला जेल जाने को हमेशा तैयार रहता है। कमाई के चक्कर मे कमेटी के सदस्यों ने सुविधा शुल्क लेकर बड़ी संख्या में सेंट्रल जेल पर तैनात बंदीरक्षकों को गाजियाबाद, नोएडा, अलीगढ़, मेरठ, मुरादाबाद, मुज्जफरनगर जैसी कमाऊ कही जाने वाली जेल पर तैनात कर दिया। आलम यह है कि सेंट्रल जेल में बंदीरक्षक कम होने की वजह से बड़ी संख्या में स्थानांतरित बंदीरक्षकों को अभी तक रिलीव नहीं किया गया है। ऐसा तब किया जा रहा है जब स्थानांतरण आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि इन्हें बगैर प्रस्थानी की प्रतीक्षा किये कार्यमुक्त कर दिया जाए। जिससे वह स्थानांतरित जनपद की जेल पर तत्काल कार्यभार ग्रहण कर सके। यह आदेश कागजो में सिमट कर रह गया है। हकीकत यह है कि सुविधा शुल्क लेकर कमाऊ जेलो पर भेजे गए आगरा, बरेली, फतेहगढ़, बनारस व प्रयागराज सेंट्रल जेल पर तैनात सैकड़ो बंदीरक्षक अभी तक रिलीव नही हो पाए हैं। बंदीरक्षक कम होने की वजह से सेंट्रल जेल के अधिकारी इन्हें रिलीव नही कर रहे है। इन जेलो पर तैनात अधिकारियों का कहना है कि इन्हें रिलीव कर दिया गया तो जेल संचालन में तमाम दिक्कत होगी।