Monday, February 23, 2026
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कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश

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भाग-01

  • कोविड संक्रमण की रोकथाम के लिए ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट’ की रणनीति के साथ-साथ प्रदेशवासियों को टीकाकरण का सुरक्षा कवर प्रदान करने की रणनीति के अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। बीते 30 अप्रैल को कुल 03 लाख 10 हजार केस एक्टिव थे। आज एक सप्ताह की अवधि में 55,000 एक्टिव केस कम हुए हैं। 24 अप्रैल को सर्वाधिक 38 हजार पॉजिटिव केस आये थे, तब से नए केस में लगातार गिरावट आ रही है। साथ ही, स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है। रिकवरी दर बेहतर होता जा रहा है।
  • विगत 24 घंटे में 2,41,403 कोविड टेस्ट किए गए हैं। इसी अवधि में 28,076 नए पॉजिटिव केस की पुष्टि हुई है, जबकि 33,117 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए हैं। वर्तमान में 2,54,118 कुल एक्टिव केस हैं। इनमें 1,98,857 लोग होम आइसोलेशन में उपचाराधीन हैं।
  • वैक्सीनेशन की प्रक्रिया प्रदेश में तेजी से चल रही है। अब तक 01 करोड़ 34 लाख 30 हजार से अधिक डोज लगाए जा चुके हैं। अधिक संक्रमण दर वाले सात जिलों में 18-44 आयु वर्ग के 85,566 लोगों को वैक्सीनेट किया जा चुका है। यह अच्छा है कि इस आयु वर्ग में वैक्सीन वेस्टेज घटकर 0.11% रह गया है। इसे शून्य तक लाने की आवश्यकता है।
  • आगामी सोमवार से 11 और जिलों में 18-44 आयु वर्ग के टीकाकरण अभियान का शुभारंभ होगा। सम्बंधित प्रभारी मंत्री/स्थानीय जनप्रतिनिधि किसी न किसी टीकाकरण केंद्र पर उपस्थित रहें। लोगों का उत्साहवर्धन के लिए जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सहायक होगी। चिकित्सा शिक्षा मंत्री के स्तर से वैक्सीन निर्माता कंपनियों से सतत संपर्क बनाये रखा जाए।
  • प्रदेश सरकार सभी नागरिकों को टीकाकरण का सुरक्षा कवर निःशुल्क उपलब्ध करा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के परामर्श के अनुसार कोरोना संक्रमित अथवा लक्षण वाले लोग अभी टीकाकरण न कराएं। इसी प्रकार स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कोविड संक्रमित व्यक्ति को स्वस्थ होने के न्यूनतम एक माह बाद ही वैक्सीनेशन कराना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी इन महत्वपूर्ण जानकारियों से लोगों को जागरूक किया जाए।
  • यह सुनिश्चित किया जाए कि टीकाकरण केंद्रों पर कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से अनुपालन हो। ऑन-द-स्पॉट पंजीयन से अव्यवस्था हो सकती है। अनावश्यक भीड़ न हो, इसके लिए ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था को ही लागू रखना उचित होगा। जिनकी बारी है उनसे यथासंभव एक-दो दिन पूर्व फोन से संपर्क कर लिया जाना उचित होगा।
  • संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए गांव-गांव टेस्टिंग का महा अभियान चल रहा है। लोग इसमें सहयोग कर रहे हैं। निगरानी समितियां घर-घर जाएं, स्क्रीनिंग करें, होम आइसोलेशन के मरीजों को मेडिकल किट उपलब्ध कराएं। लक्षणयुक्त लोगों के बारे में आरआरटी को सूचना देकर उनका एंटीजन टेस्ट कराया जाए। डीएम और सीएमओ यह सुनिश्चित करें कि टेस्ट की यह प्रक्रिया गांव में ही हो। सीएचसी/पीएचसी पर जाने की कोई अवश्यकता नहीं है। आरआरटी की संख्या में तीन से चार गुना बढ़ोतरी के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। कांटेक्ट ट्रेसिंग और बेहतर करने की जरूरत है।
  • होम आइसोलेशन में उपचाराधीन लोगों को समय से मेडिकल किट जरूर दी जाए।मुख्य सचिव कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय से इसकी समीक्षा की जाए। निगरानी समितियां जिन लोगों को मेडिकल किट दें उनका विवरण आईसीसीसी को उपलब्ध कराएं। आईसीसीसी इसका सत्यापन करे। इसके बाद सीएम हेल्पलाइन से इसका पुनरसत्यापन किया जाए।
  • होम आइसोलेशन में उपचाराधीन मरीजों से हर दिन संवाद किया जाए।टेलीकन्सल्टेशन के माध्यम से चिकित्सक उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दें तो जनपदीय आईसीसीसी से भी बात की जाए। चिकित्सा शिक्षा मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय से भी अधिकाधिक मरीजों से फोन कर उनका हाल-चाल लिया जाए। उन्हें मेडिकल किट, टेलीकन्सल्टेशन आदि सुविधाओं की उपलब्धता की सत्यता की परख करें।
  • कतिपय जनपदों में सीएमओ आदि स्वास्थ्य सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों के संक्रमित होने की जानकारी आई है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे जिलों में तत्काल नवीन तैनाती की जाए।
  • प्रदेश में अंतरराज्यीय बस परिवहन को स्थगित किया गया है। निजी परिवहन ऑपरेटर आधी क्षमता के साथ ही कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ही संचालित हो सकेंगे। परिवहन विभाग इस व्यवस्था को सख्ती से लागू कराए।
  • मरीजों को जरूरत पर तत्काल एम्बुलेंस उपलब्ध हों। सभी जिलों में एम्बुलेंस उपलब्ध कराए गए हैं। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त प्रबंध भी किया जाए। निजी एम्बुलेंस संचालकों द्वारा मनमाने ढंग से किराया वसूलने की घटनाएं संज्ञान में आई हैं। शासन स्तर से आज ही निजी एम्बुलेंस के लिए किराया दर तय करते हुए इसे प्रभावी ढंग से लागू कराया जाए।
  • सभी सरकारी एवं निजी कार्यालयों में बीमार, दिव्यांग कर्मचारी और गर्भवती महिला कर्मचारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सुविधा दी जाए। इन्हें कार्यालय आने की कोई अनिवार्यता नहीं है। इसी प्रकार, सभी सरकारी कार्यालयों में 50% कार्मिक क्षमता से ही कार्य लिया जाए। एक समय मे एक तिहाई से अधिक कर्मचारी कतई उपस्थित न रहें। इस व्यवस्था को तत्काल प्रभावी बनाया जाए।
  • राज्य सरकार के अधिकारी/कर्मचारी शासन द्वारा अनुमन्य चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नियमों के अंतर्गत ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की खरीद कर सकते हैं। कर्मचारियों को इससे बड़ी सहूलियत होगी। इस संबंध में आदेश जारी कर दिए जाएं।