
बेटी के जन्मदिन को सेवा के उत्सव में बदलते हुए बड़वा के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस पहल ने खुशियों को संवेदनाओं से जोड़ते हुए समाजसेवा का प्रेरणादायक संदेश दिया।
डॉ.सत्यवान सौरभ
भिवानी/हिसार। जहाँ अक्सर बेटियों के जन्म पर समाज में चुप्पी पसरी रहती है, वहीं गांव बड़वा में एक परिवार ने इस सोच को नई दिशा दी। आरवी पुत्री पवन लखेरा के जन्म को केवल उत्सव नहीं, बल्कि सेवा का पर्व बनाते हुए रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया—और इस पहल ने संवेदनाओं को एक नई आवाज़ दे दी।बेटी के जन्मदिन को खास बनाने के लिए अब सिर्फ केक और पार्टी ही नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना का रास्ता भी चुना जा रहा है। “बेटी के जन्मदिन पर सेवा का उत्सव” एक ऐसी पहल है, जहां खुशियों को समाज के जरूरतमंद लोगों के साथ बांटकर इस दिन को और भी सार्थक बनाया जाता है। यह न सिर्फ बेटी के प्रति प्रेम का प्रतीक है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक सुंदर संदेश भी देता है।
राजकीय कन्या उच्च विद्यालय परिसर उस दिन केवल एक स्थान नहीं, बल्कि मानवता की धड़कनों से भरा मंच बन गया। नेशनल सोशल ऑर्गेनाइजेशन भिवानी शाखा और शिवालिक युवा मंडल के संयुक्त प्रयासों से आयोजित इस शिविर में 36 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ। हर रक्तदाता मानो अपने भीतर से एक बूंद जीवन निकालकर किसी अनदेखे जीवन की लौ जलाने चला आया हो। इस पहल को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उनके शब्दों में यह आयोजन केवल रक्तदान तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बेटी के सम्मान, समानता और सामाजिक जागरूकता का संदेश भी था। रक्तदाताओं को सम्मानित करते हुए उन्हें प्रमाण पत्र और पौधे भेंट किए गए—जैसे सेवा के साथ प्रकृति का आशीर्वाद भी जुड़ गया हो।
इस अवसर पर बड़वा के सुप्रसिध् समाजसेवी महेंद्र लखेरा की भावनाएं विशेष रूप से मुखर रहीं। उन्होंने कहा कि उनके घर पोती के जन्म की खुशी में आयोजित रक्तदान शिविर एवं जलवा पूजन कार्यक्रम सभी के सहयोग से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। उन्होंने नेशनल सोशल ऑर्गेनाइजेशन भिवानी, शिवालिक युवा मंडल की युवा टीम, आदरणीय विधायक रणधीर सिंह जी, नगरपालिका चेयरमैन श्री राजेश केडिया जी, श्री अशोक लखेरा सरपंच चौधरीवास, विद्यालय स्टाफ, समस्त ग्रामवासियों तथा गुलशन पोपली जी और श्री रणजीत जी का हृदय से आभार व्यक्त किया।यह आयोजन केवल एक समाचार नहीं, बल्कि एक संदेश है—कि जब खुशियाँ दूसरों के जीवन से जुड़ती हैं, तब वे उत्सव से आगे बढ़कर प्रेरणा बन जाती हैं। बेटी के जन्म पर रक्तदान की यह पहल समाज के उस बदलते चेहरे की झलक है, जहाँ अब बेटियाँ केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि गर्व और संवेदना का प्रतीक बन रही हैं।























