Sunday, January 18, 2026
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इन्वेस्टर समिट घोटाले का एक माध्यम-बृजलाल खाबरी

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इन्वेस्टर समिट घोटाले का एक माध्यम-बृजलाल खाबरी
इन्वेस्टर समिट घोटाले का एक माध्यम-बृजलाल खाबरी

इन्वेस्टर समिट घोटाले का एक माध्यम-बृजलाल खाबरी

 कृष्णकांत पाण्डेय

लखनऊ। पूर्ववर्ती सरकारें भी इन्वेस्टर समिट किया करती थी लेकिन जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई है इन्वेस्टर समिट घोटाले का एक माध्यम बन गया है। लगभग प्रतिवर्ष यह इवेंन्ट कर प्रचार-प्रसार के साथ ही जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा बर्बाद किया जाता है।उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी ने कहा कि इसके पूर्व जितने समिट हुए हैं हजारों करोड़ के एमओयू साइन होना बताया गया उसमें से कितने उत्तर प्रदेश के धरातल पर आये, यह सवाल बना हुआ है सरकार जवाब देने में असहज है। मंत्रियों एवं अधिकारियों को विदेशों में भेजा गया तद्पश्चात देश के तमाम राज्यों में भेजा गया जो सुख सुविधा लेते हुए शीतकालीन अवकाश भी इसी बहाने मनाये तथा पर्यटन लाभ लिया, अब बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हजारों करोड़ के एमओयू साइन हो रहे हैं

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सरकार पर निशाना साधते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि इसके पूर्व जितने भी समिट हुए हैं, उनमें हजारों करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होना बताया गया, लेकिन उसमें से कितने उत्तर प्रदेश के धरातल पर आये, यह सवाल बना हुआ है और सरकार जवाब देने में असहज है। पूर्व सांसद ने कहा कि मंत्रियों एवं अधिकारियों को विदेशों में भेजा गया, देश के तमाम राज्यों में भेजा गया जो सुख सुविधा लेते हुए शीतकालीन अवकाश भी इसी बहाने मनाये तथा पर्यटन लाभ लिया और अब बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हजारों करोड़ के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो रहे हैं। खाबरी ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश जहां महंगाई विभीषिका बन कर खड़ी है, बेरोजगारी नौजवानों की जान लेने पर अमादा है, कानून व्यवस्था का हाल बदहाल है, किसान अपनी लागत के लिए परेशान हैं, ऐसे हालात में जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा बर्बाद करने का कोई हक सरकार को नहीं है।

श्री खाबरी ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश जहां महंगाई विभीषिका बन कर खड़ी है, बेरोजगारी नौजवानों की जान लेने पर अमादा है, कानून व्यवस्था का हाल बदहाल है, किसान अपनी लागत के लिए परेशान है ऐसे हालातों में जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा बर्बाद करने का कोई हक सरकार को नहीं है। प्रदेश का नौजवान दूसरे जगहों पर पलायन के मजबूर है। श्री खाबरी ने अंत में कहा कि प्रदेश में तमाम लघु उद्योग बदहाल स्थिति में हैं यदि सरकार उनकी मदद करती तो बेरोजगारी कुछ हद तक अवश्य कम होती। जनता की जानकारी के लिए इसके पूर्व तीन बार इस सरकार में हुए इन्वेस्टर समिट पर सरकार श्वेत पत्र जारी करे।

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