Saturday, January 17, 2026
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बिना जातीय जनगणना के सामाजिक न्याय अधूरा

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अखिलेश यादव ने कहा कि पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों में आई जागरूकता और उनकी बढ़ती ताकत के सामने सामाजिक न्याय विरोधी ताकते भी अब झुकने को मजबूर हैं। समाजवादी और कमेरावादी लंबे समय से जातीय जनगणना की मांग कर रहे हैं। सामाजिक न्याय विरोधी ताकते जातीय जनगणना का विरोध कर रही थी, लेकिन अब वह भी अपनी नीति बदलने पर मजबूर हैं, अब वह भी कह रही हैं जातीय जनगणना का विरोध नहीं करेंगे।
श्री यादव ने आज इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में अपना दल (कमेरावादी) के स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। राजमाता श्रीमती कृष्णा पटेल ने भी सम्बोधित किया।


अखिलेश यादव ने कहा कि बिना जातीय जनगणना के सामाजिक न्याय अधूरा है। जातीय जनगणना होने से समाज में सभी जातियों की संख्या का पता चलेगा। जिससे उन्हें आबादी के अनुपात में हक और सम्मान मिल सकेगा। नेताजी मुलायम सिंह यादव और अपना दल के संस्थापक डॉक्टर सोनेलाल पटेल ने समाज के गरीब, दलित, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों को जगाने का काम किया। उनके लिए संघर्ष किया। दोनों नेताओं ने संघर्ष का जो रास्ता दिखाया है उसे पर आगे चलना है। हम लोग साथ आए हैं अगर इसी तरह से गठबंधन बना रहेगा तो आने वाले समय में परिवर्तन होना तय है। उन्होंने कहा कि हमें जो विरासत में मिला है हमारी जिम्मेदारी है कि हम आने वाली पीढ़ी को उसे और अच्छी तरह से मजबूत बनाकर दें। दोनों दलों का लक्ष्य एक है।


अखिलेश यादव ने खुद को स्थापना दिवस में आमंत्रित करने के लिए अपना दल कमेरावादी नेताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि हम लोग 2024 का लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे और आप लोग जिस भरोसे के साथ आए हैं हम पूरा सम्मान देंगे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की स्थापना 4 नवम्बर 1992 में हुई थी जबकि अपना दल (कमेरावादी) की स्थापना 4 नवम्बर 1995 में हुई। आज यहां से संकल्प लेकर जाएं जो कि सामाजिक न्याय की जो लड़ाई डॉक्टर सोनेलाल पटेल ने शुरू की थी उसे और आगे बढ़ाना है।


आज जो ताकत में है उन्हें पीडीए की ताकत का पता नहीं है। खुद उनको पता चलेगा भी नहीं। 2022 के विधानसभा चुनाव में हारी भाजपा को सत्ता मिल गई। हमारे साथ बेईमानी हुई थी। डॉ0 पल्लवी पटेल ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि अपना दल को व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। समाजवादी पार्टी और अपना दल दोनो पार्टी की स्थापना इस सम्पूर्ण व्यवस्था को चला रही विघटनकारी और परम्परागत रूढ़िवादी राजनीति के खिलाफ हुई थी। आज इस लड़ाई में हजारों हजार समर्पित कार्यकर्ता शामिल रहे है।