Monday, January 26, 2026
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आंकड़ों का विकास एवं निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान-मण्डलायुक्त

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आंकड़ों का विकास एवं निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान-मण्डलायुक्त
आंकड़ों का विकास एवं निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान-मण्डलायुक्त


आंकड़ा का विकास एवं निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान होता है-मण्डलायुक्त


सभी लोग शुद्व एवं सटीक आकड़ा देने में अपनी भूमिका निभायें-जिलाधिकारी


अयोध्या। मण्डलायुक्त गौरव दयाल की अध्यक्षता में आज कलेक्टेªट सभागार में सांख्यिकी एवं कार्यान्वयन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आर्थिक गणना को वास्तविक रूप से एकत्र करने के उद्देश्य से सभी को जागरूक करने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया है इसका मुख्य उद्देश्य बदलते हुये परिवेश में राज्य की अर्थ व्यवस्था को वन ट्रिलियन डाॅलर किया जाना है। मण्डलायुक्त ने सभी विभागों एवं विभिन्न संगठनों से कहा कि सभी लोग समन्वय से आंकड़ा एकत्र करने के लिए टीम भावना से कार्य करें तथा जो सरकार की मंशा है उसके अनुरूप कार्य करें। आकड़ों का विकास एवं निर्माण कार्यो में महत्वपूर्ण भूमिका होती है इसलिए सभी को सावधानी से इस पर कार्य करें। आज आमंत्रित विशेष रूप से जो संगठन है उनकी जिम्मेदारी है कि इस कार्य को समयबद्वता के साथ पूरा किया जाय। उक्त अवसर पर जिलाधिकारी श्री नितीश कुमार ने कहा कि आकड़ा एकत्रीकरण में टीम भावना से कार्य किया जाय तथा कोई भी आकड़ा हो वह शुद्व एवं सटीक होना चाहिए क्योंकि इसका विकास कार्यो में महत्वपूर्ण भूमिका होती है तथा सभी विभाग बेहतर समन्वय से कार्य करें तथा जो अधिकारी कार्य कर रहे है उनको कोई मदद की आवश्यकता है तो स्थानीय अधिकारी नियमानुसार मदद करें।


उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन सर्वेक्षणों से प्रदेश में संचालित विकासोन्मुख योजनाओं में हो रहे निवेश के  दृष्टिगत विनिर्माण, व्यापार एवं अन्य सेवा क्षेत्र में परिलक्षित हो रहे विकास की वास्तविक स्थिति के अनुरूप आंकड़ें संग्रहित हो रहे हैं, जो उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान की दिशा में भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाते है। कार्यशाला और जागरूकता अभियानों का आयोजन करके प्रदेश में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, भारत सरकार और अर्थ एवं संख्या प्रभाग, उ0प्र0 द्वारा कराये जा रहे इन सर्वेक्षणों के बारे में जागरूकता बढाने के लिए कदम उठाना आवश्यक है। हितधारक अर्थात परिवार, कारखाने, दुकाने, छोटे व्यवसाय, स्वास्थ्य देखभाल इकाइयाँ, क्लब, शिक्षा संस्थान, कानूनी और परिवहन संगठन आदि को यह आश्वस्त करने की आवश्यकता है कि उनके द्वारा साझा की गई जानकारी का उपयोग उनकी व्यक्तिगत पहचान उजागर किए बिना केवल सांख्यिकीय उद्देश्य के लिए किया जाएगा। इस कार्यशाला के माध्यम से सभी हितधारकों से अपील की जानी है कि सर्वेक्षणकर्ताओं को वांछित सही सूचना देकर उनको सहयोग प्रदान करेंगे।

उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभिन्न क्षेत्रों में आकलन करने हेतु प्रदेश में विभिन्न प्रकार के सर्वेक्षण संचालित हैं। इन सर्वेक्षणों से प्रदेश में संचालित विकासोन्मुख योजनाओं में हो रहे निवेश के दृष्टिगत विनिर्माण, व्यापार एवं अन्य सेवा क्षेत्र में परिलक्षित हो रहे विकास की वास्तविक स्थिति के अनुरूप आंकड़े संग्रहित हो रहे हैं। जो उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान की दिशा में भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं। कार्यशाला और जागरूकता अभियानों का आयोजन करके प्रदेश में राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय, भारत सरकार और अर्थ एवं संख्या प्रभाग, उ0प्र0 द्वारा कराये जा रहे इन सर्वेक्षणों के बारे में जागरूकता बढाने के लिए कदम उठाना आवश्यक है। इन कार्यशालाओं में हितधारक अर्थात-परिवार, कारखाने, दुकानें, छोटे व्यवसाय, स्वास्थ्य देखभाल इकाइयाँ, क्लब, शिक्षा संस्थान, कानूनी और परिवहन संगठन आदि को यह आश्वस्त करने की आवश्यकता है कि उनके द्वारा साझा की गई जानकारी का उपयोग उनकी व्यक्तिगत पहचान उजागर किए बिना केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

इस कार्यशाला के माध्यम से सभी हितधारकों से अपील है कि सर्वेक्षणकर्ताओं को वांछित सही सूचना देकर उनको सहयोग प्रदान करेंगे। इसके लिए 3 श्रेणी बनायी गयी है। प्राथमिक श्रेणी में एग्रीकल्चर से जुड़े हुये कार्यक्रम दूसरे में मैनुफैक्चर से जुड़े हुये तथा तीसरे में ट्रांसपोर्ट एवं बिल्डिंग मैटेरियल को शामिल किया गया है। इन सभी सेक्टरों का आर्थिक आकड़ा सामाजिक एवं आर्थिक आकड़ा सही होगा तो आगे विकास करने में हमको मदद होगी। इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये अयोध्या मण्डल के उपनिदेशक अर्थ संख्या सुश्री डुमनरेश दीक्षा साहू ने विस्तृत रूप से प्रकाश डाला तथा उन बिन्दुओं का उल्लेख भारत सरकार सांख्यिकी मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी एवं उनकी टीम ने डाला तथा कहा कि हमारा सर्वे चल रहा है इसमें सभी के सहयोग की आवश्यकता है तथा इस क्षेत्र में हमें मण्डल जिला प्रशासन, शासकीय विभागों के अलावा व्यापार मण्डल, व्यवसायी, श्रमिक संगठन, वाणिज्य कर एवं अन्य संगठनों की आवश्यकता है जो किसी न किसी रूप में व्यवसाय के रूप में कार्य करते है। इसके लिए व्यापक स्तर पर उनके आर्थिक योगदान का आकलन के लिए यह कार्य किया जाना आवश्यक है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा सामाजार्थिक आकड़ों के लिए 1950 में तथा राज्य सरकार द्वारा 1955 में कार्य प्रारम्भ किया गया था तथा वर्तमान सर्वेक्षण का विषय उन्हीं कार्यो को आगे बढ़ाते हुये कार्य किया जा रहा है।

इसमें मुख्य रूप से उद्यमों की बुनियादी और परिचालन संबंधी जानकारी, उद्यमों द्वारा की जा रही एक्टीविटी पर जानकारी, उद्यमों के परिचालन खर्चो की जानकारी, व्यक्तियों के रोजगार और उद्यमों के श्रमिकों को प्राप्त होने वाली धनराशि के बारे में जानकारी, उद्यमों के स्वामित्व और किराये पर ली गयी भूमि और अचल संपत्तियों की जानकारी, उद्यमों के बकाया ऋण की जानकारी, उद्यमों द्वारा सूचना और संचार प्रौद्योगिकी आईसीटी के उपयोग पर जानकारी दी गयी। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक संख्यायें वे संकेतक है जो किसी विशेष चर में एक निर्दिष्ट अवधि में परिवर्तन दर्शाते है। सूचकांक दो अलग-अलग अवधियों के लिए दो अलग-अलग समूहों की इकाई कम पूर्ण तुलना का प्रतिनिधित्व करता है। यह दो अलग-अलग समय में सम्बंधित चर के समूह में औसत परिवर्तन को मापता है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक आईआईपी का उद्देश्य कुछ आधार अवधि की तुलना में एक निश्चित अवधि में औद्योगिक उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन को प्रतिबिंबित करना है। यह अर्थव्यवस्था में औद्योगिक प्रदर्शन के सामान्य स्तर को मापता है। इसका उपयोग औद्योगिक विकास के अल्पकालिक/त्वरित वृहद-आर्थिक संकेतक के रूप में किया जाता है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का उपयोग चालू वर्ष के लिए जीवीए अनुमान प्राप्त करने के लिए एक प्रॉक्सी संकेतक के रूप में किया जाता है, जबकि एएसआई परिणाम उपलब्ध नहीं है।


कार्यक्रम का शुभारम्भ मण्डलायुक्त एवं जिलाधिकारी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। उक्त अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती अनिता यादव, अपर जिलाधिकारी नगर श्री सलिल कुमार पटेल, उपनिदेशक अर्थ एवं संख्या, परियोजना निदेशक, उपनिदेशक सूचना, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, इसमें आमंत्रित जनपद के विकास विभाग, उद्योग विभाग, बैंक, उद्यान, श्रम, व्यापार यूनियन आदि विभागों के अधिकारियों के अलावा व्यापार मण्डल, अन्य व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं उद्यमियों तथा भारत सरकार के आये हुए विभिन्न प्रतिनिधियों एवं सहायकों ने भाग लिया। अन्त में इस कार्यक्रम के प्रति आभार जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी श्री धीरेन्द्र यादव द्वारा किया गया।