कश्मीर में हिन्दुओं की हत्या

कश्मीर में हिन्दुओं की हत्या, अनुच्छेद 370 को समाप्त करने वाले फैसले को गलत साबित करने की साजिश है।आतंकियों की इस साजिश को विफल करने में कश्मीरियों को भी आगे आना चाहिए। यदि हिन्दुओं की हत्याओं पर रोक नहीं लगी तो फिर कश्मीर को बचाना मुश्किल होगा।

एस पी मित्तल

सब जानते हैं कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के बाद हालातों में तेजी से सुधार हुआ। पीएम स्पेशल पैकेज के तहत जरूरतमंद कश्मीरियों को अनेक प्रकार से सहायता मिली तो दूसरे राज्यों के व्यक्तियों को कश्मीर में नियुक्ति दी गई। हालात सुधरने की वजह से ही धरती का स्वर्ग माने जाने वाले कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा मिला। जिसका सीधा फायदा कश्मीरियों को ही मिला। जब कश्मीर के हालात सामान्य हो गए तब पिछले कुछ दिनों से घाटी में हिन्दुओं की हत्याओं का सिलसिला शुरू हो गया है। दो जून को एक ही दिन में तीन हिन्दुओं की हत्या आतंकवादियों ने कर दी। सवाल यह नहीं है कि आतंकियों ने गैर कश्मीरी हिन्दुओं को मारा है? गंभीर बात तो यह है कि मुस्लिम बाहुल्य कश्मीर में हिन्दुओं को मारा जा रहा है। असल में हिन्दुओं की हत्या कर आतंकी केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले को गलत साबित करना चाहते हैं। आतंकियों की यह बहुत बड़ी साजिश है, क्योंकि अनुच्छेद 370 के लागू रहते ही कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा मिला।

आतंकी यही चाहते हैं कि कश्मीर में फिर से अनुच्छेद 370 को बहाल कर दिया जाए। अनुच्छेद 370 कश्मीर में तैनात सुरक्षा बलों पर भी अनेक पाबंदिया लगाता है। नागरिक हिन्दू हो या मुसलमान, सभी की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है। मौजूदा समय में जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन है और उपराज्यपाल ही प्रशासन के प्रमुख है, इसलिए नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की है। ऐसे में केंद्र सरकार को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए, लेकिन इसके साथ ही हिन्दुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी कश्मीरियों की भी है। यदि आतंकियों के डर से हिन्दू समुदाय के लोग कश्मीर से पलायन करते हैं तो कश्मीर के हालात एक बार फिर बिगड़ जाएंगे। न पर्यटक आएंगे और न ही विकास के काम होंगे। कश्मीर घाटी जब आतंकियों के कब्जे में था, तब कश्मीरियों के सामने दो वक्त की रोटी की भी समस्या पैदा हो गई थी। अनुच्छेद 370 के हटने के बाद मुश्किल से कश्मीर के हालात सुधरे हैं। ऐसा न हो कि एक बार फिर हालात बिगड़ जाएं। कश्मीरियों को यह समझना होगा कि घाटी में हिन्दू समुदाय के लोग रहेंगे तभी खुशहाली भी होगी। जम्मू कश्मीर की आय का मुख्य स्त्रोत पर्यटन ही है। हिन्दुओं का पलायन हो गया तो पर्यटक भी नहीं आएंगे। श्रीनगर की डल झील सूनी पड़ी रहेगी। एक तरफ देश में धर्मनिरपेक्षता की दुहाई दी जाती है तो दूसरी तरफ कश्मीर में सरेआम हिन्दुओं को मारा जाता है।

जमीयत उलेमा ए हिन्द के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी देश में मुसलमानों को असुरक्षित बताते हैं, जबकि कश्मीर में आए दिन हिन्दुओं की हत्या हो रही है। जो लोग देश में धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देते हैं वे कश्मीर में हिन्दुओं की हत्या पर चुप रहते हैं। कश्मीर में हिन्दुओं की हत्या सिर्फ कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक कट्टरपंथी विचार से जुड़ा मामला है। यह ऐसा विचार है जिसमें कश्मीर में सिर्फ मुसलमान ही रह सकते हैं। यह विचार देश की एकता और अखंडता के लिए बेहद खतरनाक है।

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