
भारत मुसलमानों का मुल्क है तो क्या इसलिए कश्मीर में हिन्दुओं की हत्या हो रही है?जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के प्रमुख मौलाना मदनी को यह भी समझना चाहिए कि कश्मीर में आतंकी, मुसलमानों को भी मार रहे हैं।

देश के मुसलमानों की एक प्रतिनिधि संस्था जमियत उलेमा-ए-हिन्द का राष्ट्रीय जलसा 28 व 29 मई को उत्तर प्रदेश के देवबंद में संपन्न हुआ। जलसे में संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मदनी ने कहा कि यह मुल्क (भारत) मुसलमानों का है और मुसलमान अपने मुल्क को छोड़ कर नहीं जाएंगे। जो लोग हमें पसंद नहीं करते हैं वो चाहे तो बाहर चले जाएं। मदनी ने इस बात पर अफसोस जताया कि भारत में अब मुसलमानों को प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसकी वजह से मुसलमानों का सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। मौलाना मदनी और उनकी जमियत के ख्यालात अपनी जगह हैं, लेकिन मौलाना को यह बताना चाहिए कि भारत मुसलमानों का मुल्क है, क्या इसलिए आतंकवादी कश्मीर में हिन्दुओं की हत्या कर रहे हैं? मौलाना मदनी अच्छी तरह जानते हैं कि मुस्लिम बहुसंख्यक कश्मीर घाटी में हिन्दुओं के हालात कैसे हैं? मौलाना कौन से मुल्क की बात कर रहे हैं? अभी तो पूरा देश कश्मीर में आए दिन होने वाली हिन्दुओं की हत्याएं देख रहा है। क्या मौलाना ऐसे मुल्क की कल्पना कर रहे हैं?
मौलाना मदनी ने भारत को मुसलमानों का मुल्क तो बताया, लेकिन दो दिन के जलसे में एक बार भी कश्मीर में हिन्दुओं की हत्याओं को आतंकवादियों की आलोचना नहीं की। मौलाना और उनकी जमियत को हिन्दुओं की हत्याओं पर भी अपनी राय प्रकट करनी चाहिए। मौलाना को यह भी समझना चाहिए कि आतंकवादी कश्मीर में सिर्फ हिन्दुओं को ही नहीं मार रहे बल्कि उनकी विचारधारा से इत्तेफाक रखने वाले मुसलमानों को भी मार रहे हैं। यहां तक कि ग्रामीण विकास करवाने वाले सरपंचों तक को मारा जा रहा है। जब यह मुल्क मुसलमानों का है तो फिर मुसलमानों को ही क्यों मारा जा रहा है? क्या मुसलमानों की हत्याओं पर कश्मीर के आतंकवादियों की आलोचना करने की हिम्मत मौलाना मदनी में है? सवाल यह भी है कि आखिर किसने कहा कि भारत मुसलमानों का नहीं है? धर्म के आधार पर 1947 में मुसलमानों के लिए पाकिस्तान बन जाने के बाद भी शेष भारत में मुसलमान सम्मान के साथ रह रहे हैं।
पाकिस्तान के जन्म के बाद भारत में मुसलमानों की आजादी तीन करोड़ रह गई थी, लेकिन आज 23 करोड़ की मुस्लिम आबादी है। यदि मुसलमानों का पैदल चलना भी मुश्किल होता तो क्या इतनी आबादी बढ़ सकती थी? मौलाना मदनी बेवजह की बातें करे के बजाए इस सच्चाई को स्वीकार करें कि देश का आम मुसलमान, हिंदुओं के साथ आराम और सम्मान के साथ रह रहा है। यदि मदनी का कथन सही होता तो हिन्दुओं की कॉलोनियों में दो चार मुस्लिम परिवार नहीं रह पाते। हकीकत तो यह है कि ऐसे मुस्लिम परिवार स्वयं को हिन्दुओं के बीच ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं। ऐसी स्थिति में देश के हर शहर में देखी जा सकती है। मौलाना मदनी को जरा अपने पड़ोसी मुस्लिम मुल्कों के हालात देख लेने चाहिए। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश आदि के हालात बद से बदतर हो गए हैं। इन देशों में आए दिन बम विस्फोट हो रहे हैं, जिनमें मुसलमान ही मारे जा रहे हैं। जबकि भारत में जो सुविधाएं हिन्दुओं के पास है, वही मुसलमानों को भी मिलती है। कल्याणकारी योजना राज्य सरकार की हो या केंद्र सरकार की किसी में भी मुसलमानों के साथ भेदभाव नहीं होता है। इसे भारत में मुसलमानों का विशेषाधिकार ही कहा जाएगा कि अशोक गहलोत, ममता बनर्जी, जगन मोहन रेड्डी, के चंद्रशेखर राव, अरविंद केजरीवाल जैसे मुख्यमंत्री मुसलमानों के बड़े पैरवीकार हैं। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की राजनीति तो पूरी तरह मुसलमानों की हिमायत पर निर्भर है। इसके विपरीत मुस्लिम समुदाय में ऐसा कोई नेता नहीं है तो हिन्दुओं का पक्ष प्रभावी तरीके से रखे। अधिकांश मुस्लिम नेता मौलाना मदनी जैसी भाषा ही बोलते हैं, लेकिन फिर भी भारत धर्मनिरपेक्ष देश बना हुआ है।























