अदालत में स्थानीय भाषाओं को प्रोत्साहन की जरूरत-मोदी

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अजय सिंह

दिल्ली के विज्ञान भवन में सभी राज्यों के सीएम और चीफ जस्टिस की ज्वाइंट कांफ्रेंस का आयोजन,अदालत में स्थानीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने की जरूरत।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और चीफ जस्टिस की ज्वाइंट कॉन्फ्रेंस हुई। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुए समारोह में सीजेआई एनवी रमना ने कहा- संविधान में लोकतंत्र के तीनों अंगों के बीच शक्तियों का बंटवारा किया गया है। अपने कर्तव्यों का पालन करते समय हमें इनकी लक्ष्मण रेखा का भी ध्यान रखना चाहिए। सरकारें अदालत के फैसले को बार- बार नजरअंदाज करती हैं, यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।कार्यक्रम की शुरुआत में केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजूजू ने की। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा- हमें अदालत में स्थानीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इससे देश के नागरिकों का न्याय प्रणाली में भरोसा बढ़ेगा, वो उससे जुड़ा हुआ महसूस करेंगे। देश में 3.5 लाख कैदी अंडर ट्रायल हैं, इनके मसले को निपटाने पर जोर दिया जाए। मैं सभी मुख्यमंत्रियों और हाईकोर्ट के जजों से इस पर ध्यान देने की अपील करता हूं।


इससे पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) एनवी रमना ने कहा- न्याय का मंदिर होने के नाते कोर्ट को लोगों का स्वागत करना चाहिए, कोर्ट की अपेक्षित गरिमा और आभा होनी चाहिए। पब्लिक इंटरेस्ट याचिका अब पर्सनल इंटरेस्ट के लिए इस्तेमाल हो रही हैं। यह अफसरों को धमकाने का जरिया बन गई हैं। पीआईएल राजनीतिक और कॉर्पोरेट विरोधियों के खिलाफ एक टूल बन गया है।इस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, केंद्रीय कानून मंत्री और सभी 25 हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस भी मौजूद थे। जिन्हें संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हम देश में जजों की संख्या को पूरा करने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर न्यायपालिक की भूमिका संविधान संरक्षक की है, वहीं विधायिका नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। मुझे विश्वास है कि संविधान की इन दो धाराओं का ये संगम और संतुलन देश में प्रभावी और समयबद्ध न्याय व्यवस्था का रोड मैप तैयार करेगा। [/Responsivevoice]

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