Tuesday, January 27, 2026
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सैनिक स्कूल का नाम जनरल बिपिन रावत सैनिक स्कूल-डाॅ0 दिनेश शर्मा

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जनपद-मैनपुरी में स्थापित सैनिक स्कूल का नाम जनरल बिपिन रावत सैनिक स्कूल, मैनपुरी किया गया।राजकीय बालिका इण्टर कालेज, फतेहगढ़, फर्रूखाबाद का परिवर्तित नाम महीयसी महादेवी वर्मा राजकीय बालिका इण्टर कालेज, फतेहगढ़ फर्रूखाबाद।राजकीय इण्टर कालेज, गंगोह, सहारनपुर का नाम अब मा0 मास्टर कंवरपाल सिंह, राजकीय इण्टर कालेज होगा।

उप मुख्यमंत्री डाॅ0 दिनेश शर्मा ने बताया कि मा0 मुख्यमंत्री जी की घोषणानुसार जनपद-मैनपुरी में स्थापित सैनिक स्कूल का नाम जनरल बिपिन रावत सैनिक स्कूल, मैनपुरी किया गया है। जनरल बिपिन रावत ने खडकवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकाॅदमी में दाखिला लिया तथा भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से प्रथम श्रेणी में स्नातक की उपाधि प्राप्त कि और यहाॅं उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए सोर्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जनरल रावत भारत के पहले रक्षा प्रमुख थे। इससे पूर्व वह भारतीय थल सेनाध्यक्ष के पद पर दिनांक 31 दिसम्बर, 2016 से 31 दिसम्बर, 2019 तक रह चुके थे। उन्हे परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, युद्ध सेवा पदक, सेना पदक, विशिष्ट सेवा पदक आदि अनेक पदक प्रदान किये गये। दिनांक 08 दिसम्बर, 2021 को एक हैलिकाॅप्टर दुर्घटना में, 63 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। भारतीय सेना में उनके उत्कृष्ट योगदान को देखते हुये मा0 मुख्यमंत्री जी की घोषणानुसार जनपद-मैनपुरी में स्थापित सैनिक स्कूल का नाम जनरल बिपिन रावत सैनिक स्कूल, मैनपुरी किया गया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद मैनपुरी स्थित सैनिक स्कूल का नाम बदलकर ‘जनरल बिपिन रावत सैनिक स्कूल’ करने का फैसला लिया है।योगी ने कहा कि दिवंगत चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत एक उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे।


श्री शर्मा ने बताया कि जनपद फर्रूखाबाद में संचालित राजकीय बालिका इण्टर कालेज, फतेहगढ़ का नाम महीयसी महादेवी वर्मा राजकीय बालिका इण्टर कालेज, फतेहगढ़ फर्रूखाबाद किया गया है। महीयसी महादेवी वर्मा सुप्रसिद्ध कवयित्री के साथ एक कुशल अध्यापिका भी थीं। इन्हीं के प्रयत्नों से सन् 1935 में इलाहाबाद में प्रयाग महिला विद्यापीठ की स्थापना हुई तथा इस संस्था की उप कुलपति के पद पर भी आसीन रहीं। इन्हें अपनी साहित्यिक सेवा हेतु सन् 1943 में भारत भारती पुरस्कार, सन 1956 में पद्म भूषण, सन 1979 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, सन् 1982 में ज्ञानपीठ पुरस्कार एवं सन् 1988 में पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सन् 1952 में उनको उ0प्र0 विधान परिषद की सदस्या मनोनीत किया गया। आधुनिक युग की मीरा के नाम से विख्यात श्रीमती महादेवी वर्मा का जन्म 24 मार्च, सन 1907 ई0 में उत्तर प्रदेश के फर्रूखाबाद में हुआ था। इनकी जन्मभूमि फर्रूखाबाद होने तथा साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में इनके योगदान को देखेते हुए शासन द्वारा जनपद फर्रूखाबाद के फतेहगढ़ में संचालित राजकीय बालिका इण्टर कालेज का नाम महीयसी महादेवी वर्मा राजकीय बालिका इण्टर कालेज, फतेहगढ़ करने का निर्णय लिया है।

उप मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सांसद प्रदीप चौधरी द्वारा मुख्यमंत्री की घोषणान्तर्गत जनपद सहारनपुर के विधान सभा क्षेत्र-गंगोह के ग्राम दूधला निर्माणाधीन राजकीय इण्टर कालेज को निःशुल्क दानस्वरूप 1 एकड़ भूमि प्रदान करते हुये उक्त विद्यालय का नाम मास्टर कंवरपाल सिंह राजकीय इण्टर कालेज किये जाने का अनुरोध किया। कंवरपाल सिंह गंगोह विधान सभा क्षेत्र से विधायक तथा जनपद सहारनपुर के एक प्रसिद्ध समाजसेवी रहे हैं। इनके द्वारा प्राथमिक शिक्षा में अध्यापक के पद पर कार्य करतें हुये शिक्षा के क्षेत्र में तथा समाज में सराहनीय योगदान दिया गया है। इस कारण शासन द्वारा मा0 मुख्यमंत्री जी की घोषणान्तर्गत निर्माणाधीन राजकीय इण्टर कालेज का नामकरण मा0 मास्टर कंवरपाल सिंह राजकीय इण्टर कालेज करने का निर्णय लिया है।