
बंगाल की जनता भाजपा सरकार का स्वाद चखना चाहती है। करोड़ों हिन्दू नरेन्द्र मोदी को भगवान समझते हैं। पेशेवर रणनीतिकार।तो कांग्रेस भी चाहती है कि पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के वोट एकमुश्त ममता बनर्जी को मिल जाएं। क्या यह साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देना नहीं है…?
एस0 पी0 मित्तल

पश्चिम बंगाल। 10 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में चौथे चरण का मतदान भी बम धमाको की आवाजों के बीच संपन्न होगा। अंतिम 8वां चरण 29 अप्रैल को होगा। माना जा रहा है कि आधे बंगाल में मतदान हो गया है। चुनाव प्रचार के दौरान हिन्दू और मुसलमानों का मुद्दा छाया रहा। 6 अप्रैल को तीसरे चरण के प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री और तृणमल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने साफ कह दिया कि मुसलमानों के वोट नहीं बंटने चाहिए। यदि मुसलमानों के वोट बंटे तो भाजपा चुनाव जीत जाएगी और फिर बंगाल में एनआरसी जैसे काननू लागू हो जाएंगे।
ममता बनर्जी गत 10 वर्षों से बंगाल की मुख्यमंत्री हैं, लेकिन उन्हें अब भी मुसलमानों के एक मुश्त वोट की दरकार हैं। जबकि ममता को अपनी सरकार की उपलब्धियों पर वोट मांगने चाहिए। ममता को भी अब समझ में आ गया है कि यदि मुसलमानों के वोट विभाजित होते हैं तो भाजपा चुनाव जीत जाएगी।

बंगाल में मुसलमानों के वोट विभाजित नहीं हों, इसके लिए कांग्रेस और वामपंथी दल भी ममता को सपोट कर रहे हैं। कांग्रेस और वामदलों ने फुरफरा शरीफ को साथ लेकर गठबंधन बनाया है, लेकिन कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता प्रचार के लिए बंगाल नहीं आया। यदि कांग्रेस और वामपंथी दल चुनाव में जोर लगाते तो मुसलमानों के वोट विभाजित हो जाते।
सवाल उठता है कि खुलेआम एक समुदाय को लेकर ऐसी रणनीति अपना कर क्या साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देना नहीं है? जब हिन्दुओं के वोट एकजुट करने के लिए भाजपा को साम्प्रदायिक पार्टी कहा जाता है तो फिर बंगाल में क्या हो रहा है? क्या पूरा चुनाव हिन्दू मुसलमान पर नहीं लड़ा जा रहा? कांग्रेस और वामपंथियों को स्वयं की हार स्वीकार है, लेकिन मुसलमानों के वोट बंटने नहीं चाहिए। जबकि ऐसा नहीं कि भाजपा को मुसलमानों के वोट नहीं मिलते हैं।
मुसलमान भी भाजपा को वोट देते हैं। 10 अप्रैल को चौथे चरण का मतदान शुरू होने के साथ ही ममता बनर्जी के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का एक ऑडिया सामने आया है, जिसमें कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल की जनता अब भाजपा सरकार का स्वाद चखना चाह रही है। सब जानते हैं कि प्रशांत किशोर पेशेवर रणनीतिकार हैं। यानि राजनीतिक दलों से पैसा लेकर चुनाव में रणनीति बनाते हैं।
इस बार बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी के लिए रणनीति बना रहे हैं। हालांकि प्रशांत किशोर ने पैसा तो ममता बनर्जी से लिया है, लेकिन प्रशांत का मानना है कि करोड़ों हिन्दू प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भगवान मानते हैं। प्रशांत ने इस सच्चाई को भी स्वीकार किया है कि बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी की सरकार के प्रति एंटी इनकंबेंस का माहौल है।




















