Friday, May 22, 2026
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महापौर के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार फ्रीज!

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महापौर के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार फ्रीज!
महापौर के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार फ्रीज!

महापौर के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार फ्रीज! महापौर पर आदेश का पालन ना करने पर लिया एक्शन।

राकेश यादव

लखनऊ। उच्च न्यायालय लखनऊ के अवध बार एसोसिएशन के महामंत्री ललित तिवारी को पार्षद पद की शपथ ना दिलाने पर उच्च न्यायालय लखनऊ ने महापौर सुषमा खार्कवाल के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए हैं। यही नहीं महापौर के प्रशासनिक अधिकार भी सीज़ करने के आदेश दिए गए हैं। सूत्र बताते हैं कि जैसे ही यह जानकारी नगर निगम पहुंची वहां पर हड़कंप मच गया। हाईकोर्ट ने पार्षद को शपथ नहीं दिलाने पर एक्शन लिया है। जिलाधिकारी विशाख जी और मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत को निगम संभालने के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि यह मामला पिछले कई महीनो से चल रहा है। आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी का पार्षद होने के नाते उसकी जगह पर ललित तिवारी को पार्षद पद की शपथ नहीं दिलाई जा रही थी।

मुकेश चौहान
मुकेश चौहान

संविधान और न्यायालय को नहीं मानते भाजपाई: मुकेश चौहान

कांग्रेस नगर निगम पार्षद दल के नेता मुकेश सिंह चौहान ने लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार सीज किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह मामला यह साबित करता है कि भाजपा के लोग संविधान और न्यायालय के आदेशों को नहीं मानते है। उन्होंने बताया कि एक दिन पहले रायबरेली आए कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान को नहीं मानते है। न्यायालय के इस आदेश ने यह बात प्रमाणित कर दी है।संवैधानिक पदों पर बैठे हुए व्यक्तिय को कोर्ट के आदेश को मनाना चाहिए लेकिन भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ही संविधान को नहीं मानता तो उनके नेता उसी पथ पर चलकर उच्च न्यायालय के आदेश को नजरंदाज करना उन्हें भारी पड़ गया।उच्च न्यायालय ने महापौर के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारो पर रोक लगाना यह साबित करता है कि न्यायालय से कोई बड़ा नहीं हो सकता है। न्यायालय से निर्वाचित किये गये पार्षद को शपथ दिलाने के लिए महापौर बाध्य है।