Tuesday, February 10, 2026
Advertisement
Home राजनीति संसद का सदन चलाने की जिम्मेदारी भाजपा सरकार की

संसद का सदन चलाने की जिम्मेदारी भाजपा सरकार की

20
संसद का सदन चलाने की जिम्मेदारी भाजपा सरकार की
संसद का सदन चलाने की जिम्मेदारी भाजपा सरकार की

राजेन्द्र चौधरी

अखिलेश यादव ने कहा है कि संसद का सदन चलाने की जिम्मेदारी भाजपा सरकार की है। सरकार चीन के मुद्दे पर घबरा रही है। क्योंकि भाजपा सरकार में चीन ने जमींने छीनी है। इनके लोगों ने मुनाफा कमाने के लिए चीन से सामान लाना शुरू कर दिया। चीन ने हमारी अर्थव्यवस्था को नीचे बैठा दिया। अभी तक तो चीन से ही सामान आ रहा था अब अमेरिका से भी आयेगा। श्री यादव ने कहा कि क्या सरकार बताएगी कि 2014 में देश का क्षेत्रफल क्या था और अब क्षेत्रफल कितना है।

सोमवार को संसद परिसर में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए श्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं देना चाहती है। जो हालात हैं उसमें सवाल पूछने पर कोई भी कार्रवाई हो सकती है। लोग सवाल न पूछे उसके लिए सरकार कुछ भी कर सकती है।

संसद में बजट पर चर्चा को लेकर श्री अखिलेश यादव ने कहा कि बजट पर चर्चा होनी चाहिए। अमेरिका से टेªड डील हुआ है। अब अमेरिका से कृषि उत्पादन आयेंगे। अब हमारा किसान क्या करेगा? भाजपा सरकार ने खेती और किसानी के लिए खतरा पैदा किया है। किसानों को संकट में डाला है। उन्होंने कहा कि कभी भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था खोल दी थी, बताया गया था कि गरीब, किसान की तरक्की होगी लेकिन अगर पीछे मुड़कर देखें तो पता चलता है कि गरीब और गरीब हुआ है। भाजपा सरकार ने अब तो पूरा बाजार ही विदेशियों के लिए खोल दिया है। अब जानवर का फीड भी बाहर से आयेगा। अगर ऐसा होगा तो झांसी में बने ग्रास और फॉडर रिसर्च इंस्टीट्यूट का क्या होगा। सोयाबीन का तेल भी अमेरिका से आयेगा। इस सरकार ने देश का पूरा बाजार विदेशियों को सौंप दिया है।

अखिलेश यादव ने कहा है कि गन्ना किसानों को बताया गया था कि एथेनॉल से किसानों की तरक्की होगी। लेकिन अब तो एथेनाल भी बाहर से आयेगा। भाजपा सरकार में तो उत्तर प्रदेश में अराजकता है। प्रधानमंत्री जी यूपी से आते है। बांदा जेल से बहुत बड़ा स्क्रैप माफिया भाग गया। बड़े माफिया जेल से भाग रहे है। विधायक, मंत्री का अपहरण कर ले इससे बड़ा अराजकता का उदाहरण कहीं नहीं मिलता है। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है। पानी की टंकियां भ्रष्टाचार के भार को नहीं सह पा रही हैं। ढह जा रही है। जैसे पानी भरा जाता है, टंकियां भराभर कर गिर जाती है।