Thursday, January 29, 2026
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हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है विजयादशमी

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दशहरे का पर्व हिन्दुओं का एक बेहद प्रमुख त्योहार है, इसे विजयादशमी भी कहा जाता है। विजयादशमी अर्थात विजय का दिन। अश्विन माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयादशमी का त्योहार बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। नवरात्रि के नौ दिन पूरे होने के बाद दशमी तिथि को अयोध्या नरेश भगवान राम ने लंकाधिपति दशानन का वध किया था और इसलिए इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत और असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। इतना ही नहीं, इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था, इसलिए इस पर्व को विजयादशमी भी कहकर बुलाया जाता है।

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है। सम्पूर्ण भारत में यह त्यौहार उत्साह और धार्मिक निष्ठा के साथ मनाया जाता है। विष्णु जी के अवतार के द्वारा अधर्मी रावण को मारे जाने की घटना को याद करते हुए हर साल यह त्यौहार मनाया जाता है। इस दौरान अपराजिता पूजा करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि विजय मुहूर्त के दौरान शुरु किए गए कार्य का फल सदैव शुभ होता है। 

मान्यता है कि इस दिन श्री राम जी ने रावण को मारकर असत्य पर सत्य की जीत प्राप्त की थी, तभी से यह दिन विजयदशमी या दशहरे के रूप में प्रसिद्ध हो गया। दशहरे के दिन जगह-जगह रावण-कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाए जाते हैं। 

देवी भागवत के अनुसार इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस को परास्त कर देवताओं को मुक्ति दिलाई थी इसलिए दशमी के दिन जगह-जगह देवी दुर्गा की मूर्तियों की विशेष पूजा की जाती है। पुराणों और शास्त्रों में दशहरे से जुड़ी कई अन्य कथाओं का वर्णन भी मिलता है। लेकिन सबका सार यही है कि यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है।

  नवरात्री के 9 दिनों को तीन गुणों से वर्गीकृत किया जाता है: तामस राजस और सत्त्व। पहले तीन दिन तामस से जुड़े है जिसमे उग्र प्रकार की देवियाँ जैसे काली और दुर्गा आती है। अगले तीन दिन देवी लक्ष्मी से सम्बंधित है। और आखरी के तीन दिन देवी सरस्वती से सम्बंधित है जो सत्त्व की परिचायक है। नवरात्री खत्म होने के बाद दसवे दिन को विजयादशमी आती है। इसका अर्थ यह है की मनुष्य ने नवरात्री की तीन गुणों पर विजय प्राप्त कर ली है। क्यूंकि मनुष्य ने इन तीनो गुणों को समझा लेकिन किसी भी गुण के सामने समर्पण नहीं किया इसीलिए दसवे दिन को विजय का दिन या विजयादशमी कहा जाता है। इससे यह साबित होता है की हमारे जीवन की महतवपूर्ण मामलों पर श्रध्दा और कृतज्ञता से ध्यान देने से हम सफलता और जीत हासिल कर सकते है। 

दशहरे के दिन कई जगह अस्त्र पूजन किया जाता है। वैदिक हिन्दू रीति के अनुसार इस दिन श्रीराम के साथ ही लक्ष्मण जी, भरत जी और शत्रुघ्न जी का पूजन करना चाहिए। इस दिन सुबह घर के आंगन में गोबर के चार पिण्ड मण्डलाकर (गोल बर्तन जैसे) बनाएं। इन्हें श्री राम समेत उनके अनुजों की छवि मानना चाहिए। गोबर से बने हुए चार बर्तनों में भीगा हुआ धान और चांदी रखकर उसे वस्त्र से ढक दें। फिर उनकी गंध, पुष्प और द्रव्य आदि से पूजा करनी चाहिए। पूजा के पश्चात ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य वर्ष भर सुखी रहता है।