
राज्य सरकार ने यूपी में एम्बूलेंस सेवा को भी एक प्राइवेट एजेंसी (GVKEMRI) को सौंप रखा है। इसी एजेंसी को ‘रानी लक्ष्मी बाई आशा ज्योति 181 महिला हेल्प लाइन’ सेवा को भी सौंप दिया गया था। लेकिन लगातार फंड न मिलने की आड़ में अब इस योजना को बंद कर दिया गया है। इस मुद्दे पर सरकार की तरफ से कोई पक्ष नहीं मिल पाया है।
वर्कर्स को एक साल से नहीं मिली सैलरी,अखिलेश यादव ने आठ मार्च 2016 को एक महत्वकांक्षी प्रोजक्ट वीमेन हेल्पलाइन 181 की शुरुआत की थी, इसे पायलेट प्रोजेक्ट के तहत 11 ज़िलों में लॉन्च किया गया।इस हेल्पलाइन नंबर को चलाने की ज़िम्मेदारी मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टेंडिंग के तहत पांच साल तक के लिए एक प्राइवेट कंपनी जीवीके इमर्जेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट को दिया गया।
मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और योगी मुख्यमंत्री बने। साल 2017 के एनसीआरबी के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ़ अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश 56011 केस के साथ नंबर एक पर पहुंच गया, इसे देखते हुए जून 2018 में योगी सरकार ने इस योजना को 11 ज़िलों बढ़ा कर 75 ज़िलों तक पहुंचाया।
सीमा भारती उत्तर प्रदेश की 181 महिला हेल्पलाइन में काम किया करती थी। चौबीसों घंटे की इस नौकरी में उन्हें महिलाएं मदद के लिए कॉल किया करती थीं। फोन आने के बाद दिन हो या रात, वे तुरंत अपनी टीम के साथ महिला की मदद के लिए पहुंचती थीं और उन्हें आवश्यक मदद मुहैया कराती थीं।
बीते फ़रवरी से राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग ने फंड रोक दिया,11 महीनों से इस हेल्पलाइन के लिए काम कर रही 350 से ज़्यादा महिला कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है, इस हेल्पलाइन में लखनऊ के हेडक्वार्टर में टेलिकउंसलर्स जो फ़ोन पर बातचीत के ज़रिए मदद मुहैया कराती थी, फील्ड काउंसलर और एक रेस्क्यू वैन हर ज़िले में रखी गई थी। जून में इस हेल्पलाइन नंबर को बंद कर दिया गया।
24 जुलाई, 2020 को योगी सरकार ने इस वीमेन हेल्पलाइन नंबर को पुलिस हेल्प लाइन नंबर 112 से जोड़ दिया है जिसका मतलब है कि अब जिस नंबर का इस्तेमाल पुलिस को इमर्जेंसी कॉल के लिए किया जाता है उसी को वीमेन हेल्पलाइन की तरह भी इस्तेमाल किया जाएगा।वेतन ना मिलने पर जब महिला कर्मचारियों ने भूख हड़ताल करने को कहा तो योगी सरकार ने जल्द से जल्द बकाया वेतन देने को कहा है हालांकि अब तक इन महिलाओं को वेतन नहीं मिला है।यानी महिलाओं के खिलाफ़ बढ़ते अपराध के बावजूद वीमेन हेल्पलाइन बंद कर दी गई।
आरोप है कि सिर्फ एक सूचना पर यह सेवा बंद कर दी गई और उनके जैसी सैकड़ों महिलाएं बेरोजगार हो गई हैं। यह सब ऐसे समय में हुआ है, जब सरकार कोरोना काल में पीड़ितों की सहायता के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा कर रही थी।
























