
एक प्रासंगिक सवाल है जिसके बारे में हर किसी ने निश्चित तौर पर कहीं न कहीं, किसी न किसी मौके पर विचार किया ही होगा, और हमारे जीवन में धर्म के महत्व, कार्यक्षमता और प्रयोज्यता से जुड़ा है। सवाल तो एक ही है हालांकि, जवाब अलग-अलग हो सकता है, जो समझा भी जा सकता है क्योंकि 7 अरब लोगों के उत्तर भी 7 अरब हो सकते हैं, हर कोई धर्म के बारे में अपनी अलग राय रखता है। हो सकता है कि भगवान भी यही चाहते हों कि हर कोई अपनी समझ से धर्म को समझे और सच्चाई तक पहुंचे। आगे बढ़ते हुए, आइए आज के शुभ अवसर पर हम जानें कि भगवान् के द्वारा कही गयी कथा से हमें क्या शिक्षा मिलती है।
जैसा कि हम सभी जानते हैं, दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दुनिया का निर्माण करने वाले भगवान् ने इस दुनिया में कुछ विशेषताएं जोड़ी, जिनमें से कुछ चुनौतियां भी थीं। हमारे लिये चुनौतियां जरूरी हैं, ताकि हम आगे बढ़ सकें। बिना किसी चुनौती के जीवन तो नीरस होता। हालांकि, दुनिया को बनाने वाले भगवान् ये नहीं चाहते थे कि उनके अपने उन चुनौतियों से दब जाएं, डूब जाएं; इसलिये उन्होंने उम्मीद का निर्माण किया – जिसकी झलक दशहरे में दिखाई देती है। संक्षेप में कहें तो दशहरा उम्मीदों की याद दिलाता है।
प्रतीकात्मकता मानव जीवन और इतिहास का अनिवार्य हिस्सा है। बुराई पर अच्छाई की जीत का यह प्रतीक जरुरी है और शायद रामायण में कहा गया सबसे महत्वपूर्ण संदेश भी है। रामायण में नायक राम हैं, वे निर्विवाद नायक है, लेकिन वे सामान्य नायक नहीं है जिसे आप रोजमर्रा के जीवन में देखते हैं। हमारी संस्कृति में वीर या नायक की अवधारणा काफी अलग है। एक लोकप्रिय संस्कृत दोहे में राम की वीरता का वर्णन किया गया है, इसमें निम्नलिखित विशेषताओं को दर्शाया गया है –
- त्यागवीर: अपने बलिदान के लिए प्रसिद्ध
- दयावीर: अपनी करुणा के लिए प्रसिद्ध
- विद्यावीर: अपने ज्ञान के लिए प्रसिद्ध
- धर्मवीरः अपनी न्यायप्रियता के लिए प्रसिद्ध
- पराक्रमवीर: अपने साहस के लिए प्रसिद्ध
भगवान् ने शायद जिस वीर को बनाया था वो कार के पीछे शीशे पर चिपकी क्रोधित हनुमान की तस्वीर जैसा नहीं था। वो राम थे – जिन्होंने बलिदानी, दयालु, बुद्धिमान, न्यायप्रिय और जब जरुरत हुई तो पराक्रमी थे। इसलिये क्रोध, अहंकार, उन्माद, झूठ और लालच रूपी बुराई पर बलिदान, करुणा, ज्ञान, धार्मिकता और बहादुरी रूपी अच्छाई की जीत थी।
अंत में, हमारे पूर्वजों ने जिस भारत के विचार की परिकल्पना की और जिस विचार को भारत के संविधान में गढ़ा उसमें राम की छवि प्रतिबिंबित होती है। ‘भारत का विचार’ विविधता में एकता की भावना में निहित है, यानी हम इसलिये एकजुट होंगे क्योंकि हमारे यहां विविधता है। क्यों? इस विचार की परिकल्पना उन लोगों ने की थी जो राम को समझते थे। वो मौजूदा पीढ़ी के उलट राम की तस्वीर को आकार देने की कोशिश कर रहे हैं। वे राम को चाहते हैं, लेकिन ऐसा राम चाहते हैं जो उनके उद्देश्य को पूरा करे, क्योंकि असली राम उनके एजेंडे को मिटा देगा। भारत का विचार यह है कि लोगों को एक साथ होना चाहिए, भारत का विचार अतीत में जीने की बजाय भविष्य की सोच के साथ सच्चाई के रास्ते पर आगे बढ़ना सिखाता है।
याद रखिये, रामायण न केवल हर युग में बल्कि हर साल, हर महीने और हर दिन खुद को दोहरा रही है। रामायण हर राज्य, हर शहर, हर परिवार और हर व्यक्ति में समाई हुई है। हम सभी के अंदर एक राम और एक रावण है। यहां तक कि रावण के अंदर भी राम हैं और एक प्रसिद्ध गीत में लिखा गया था कि ‘‘देख तज के पाप रावण, राम तेरे मन में हैं।’’ इसी प्रकार, रामायण भारतीय राजनीति में भी उभर रही है। एक तरफ विभाजनकारी, संकीर्ण सोच, अहंकारी और दुष्टात्माएं हैं तो दूसरी तरफ भारत का विचार या राम हैं। आज भारत के लोग देख रहे हैं कि सीता रावण के चंगुल में है और ‘भारत का विचार’ या राम अकेले ही इससे लड़ रहे हैं जैसा कि सदियों पहले हुआ था। हमें इसको महसूस करना चाहिए और पहचानना चाहिए और इसके खिलाफ रुख तय करना चाहिए क्योंकि समय आने पर मौन रहना धोखे के समान है। कांग्रेस पार्टी ने फैसला कर लिया है और सच्चाई और शांति के मार्ग पर कांग्रेस पार्टी ने सत्य के लिए बलिदान दिया है, यह पिछले 132 वर्षों से चल रहा है।
कांग्रेस पार्टी इस शुभ अवसर पर सभी भारतीयों, पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई देती है। हम पार्टी कार्यकर्ताओं को बताना चाहते हैं कि जब रावण मारा गया और सीता को बंधनमुक्त करा लिया गया तो पूरी दुनिया में राम की महिमा का गुणगान हुआ। जहां एक रामायण समाप्त होती है तो दूसरी शुरु होती है। आगे की लड़ाई के लिए हमें अपनी सेनाओं को फिर से संगठित करना होगा, क्योंकि हम सच्चाई और भलाई के लिए संघर्ष करना जारी रखेंगे। हमें भारत की विचारधारा को बनाए रखने के लिए लगातार संघर्ष करना है।
रावण के जीवन से सीखें …..
राम ने रावण को मारकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया था, लेकिन रावण के जीवन को देखें तो कई ऐसे सबक सीखने को मिलते हैं जो हमें जीवन में सफल बनाते हैं।
- अपने सारथी, दरबार, खानसामा और भाई से दुश्मनी मोल मत लीजिए, वो कभी भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- खुद को हमेशा विजेता मानने की गलती मत कीजिए, भले हर बार जीत आपकी हो।
- हमेशा उसी मंत्री अौर सारथी पर भरोसा कीजिए, जो आपकी आलोचना करता हो.
- अपने दुश्मन को कभी छोटा मत समझिए।
- ये गुमान कभी न पालिए कि आप किस्मत को हरा सकते हैं, भाग्य में जो लिखा होगा वो तो भोगना निश्चित है।
- राजा को बिना टाल-मटोल किए दूसरों की भलाई करनी चाहिए।
- जो राजा जीतना चाहता है उसे लालच से दूर रहना होगा, वरना जीत मुमकिन नहीं है।
- ईश्वर से प्रेम करो या नफरत लेकिन जो भी करो पूरी मजबूती के साथ।
- अपने करीबियों की सलाह को नजरंदाज न करें. रावण को कई बार उसकी पत्नी और नाना ने सही मार्ग पर चलने की सलाह दी, लेकिन रावण ने किसी की नहीं सुनी।
- लीडर बनिए डिक्टेटर नहीं।
























