Tuesday, January 27, 2026
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घायल बंदीरक्षक की मौत

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घायल बंदीरक्षक की मौत
घायल बंदीरक्षक की मौत

घायल बंदीरक्षक की मौत

बंदियों के हमले में घायल बंदीरक्षक की मौत। लखनऊ जेल अधीक्षक ने किया था घटना से इनकार। अस्पताल ने बकाया भुगतान नहीं होने से बॉडी देने से किया मना।

राकेश यादव

लखनऊ। राजधानी की जिला जेल में बंदीरक्षक पर हुए जानलेवा हमले की घटना से अधीक्षक ने इनकार किया था। हमले में घायल बंदीरक्षक की मौत होने ने जेल अधिकारियों को बोलती बंद कर दी है। बंदीरक्षक के उपचार में हुए खर्च का भुगतान नहीं होने पर अस्पताल प्रशासन ने बॉडी देने से इनकार कर दिया। इससे बंदीरक्षक संवर्ग के कर्मियों में खासा आक्रोश व्याप्त है।

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बीती 11 जनवरी को लखनऊ जेल में सुबह जेल खुलवाने के समय बैरेक खुलते ही कुछ बंदियों ने बंदीरक्षक कृष्ण कुमार पांडेय पर हमला बोल दिया। बंदियों ने ईंट पत्थर से बंदीरक्षक को लहूलुहान कर दिया। इस पिटाई में बंदीरक्षक का सिर फट गया। गंभीर रूप से घायल बंदीरक्षक को जेल में प्राथमिक उपचार देने के बाद राजधानी के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इस घटना के संबंध में जब लखनऊ जेल के वरिष्ठ अधीक्षक आशीष तिवारी से गोसाईंगंज संवाददाता ने घटना के संबंध में बात की तो उन्होंने ऐसी किसी घटना को सिरे से ही नकारते हुए कहा था ऐसी कोई घटना जेल में हुई ही नहीं।

राजधानी लखनऊ के जिला जेल में बंदियों द्वारा बंदी रक्षक पर हमला करने का मामला सामने आया था। जानकारी के मुताबिक 11 जनवरी को बंदियों ने एक बंदी रक्षक की जबरदस्त तरीके से पिटाई कर दी थी। जिससे बंदी रक्षक को गंभीर चोटें आई थी। जानकारी के अनुसार, लखनऊ के जिला कारागार में तैनात बंदी रक्षक कृष्णकांत पांडे जेल खुलवाने के लिए जेल गए थे।


घटना के बाद 28 दिनों तक जिंदगी मौत से जूझ रहे बंदीरक्षक कृष्ण कुमार पांडेय की रविवार को मेदांता हॉस्पिटल में मौत हो गई। सूत्रों का कहना है कि बंदीरक्षक के उपचार में करीब दो लाख रुपए खर्च हुए। इस धनराशि का भुगतान नहीं होने की वजह से अस्पताल प्रशासन ने मृतक बंदीरक्षक की बॉडी देने से यह कहकर इनकार कर दिया की भुगतान होने के बाद ही बॉडी परिजनों के सुपुर्द की जाएगी। उधर इस संबंध में जब विभागीय अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया तो वह इस मसले पर कुछ भी कहने से बचते नजर आए। खबर लिखे जाने तक बंदीरक्षकों का अस्पताल में जमावड़ा लगा हुआ था।

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