
चुटकी भंडार बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज में जर्जर भवन पर कोर्ट सख़्त।क्या मरम्मत से जर्जर भवन में बच्चियां सुरक्षित रहेगी?
अजय सिंह
लखनऊ। चुटकी भंडार बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक एवं लोक निर्माण विभाग को मरम्मत कार्य का निरिक्षण करके विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश। उच्च न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि, क्या मरम्मत से जर्जर भवन में बच्चियां सुरक्षित रहेगी, विस्तृत रिपोर्ट दें जिला विद्यालय निरीक्षक एवं लोक निर्माण विभाग
जिला विद्यालय निरीक्षक एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मामले की सुनवाई के समय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहें जर्जर स्कूल, सैकड़ों छात्राओं की जान जोखिम में हाईकोर्ट सख्त लखनऊ, सामाजिक कार्यकर्त्ता विजय कुमार पाण्डेय द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय, ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं।
मामला लखनऊ के हुसैनगंज स्थित चुटकी भंडार बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज से जुड़ा है, जहां जर्जर और असुरक्षित भवन में सैकड़ों छात्राओं की पढ़ाई जारी है। विजय कुमार पाण्डेय द्वारा दाखिल जनहित याचिका में विद्यालय भवन को खतरनाक बताते हुए इसे गिराए जाने और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है । याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वीर राघव चौबे रहे l
मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति राजन रॉय एवं माननीय न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष 7 अप्रैल को हुई। सुनवाई के दौरान प्रबंधन पक्ष ने दावा किया कि पी.डब्ल्यू.डी. और जिला विद्यालय निरीक्षक को नोटिस और तलबी आदेश के बाद विद्यालय भवन में कुछ मरम्मत/नवीनीकरण कार्य कराया गया है। इस पर न्यायालय ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह विचारणीय है कि क्या ऐसी मरम्मत से भवन वास्तव में बच्चियों की पढ़ाई के लिए सुरक्षित हो सकता है। न्यायालय ने जिला विद्यालय निरीक्षक लखनऊ एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पुनः विद्यालय का निरीक्षण कर ताजा स्थिति की रिपोर्ट 28 अप्रैल 2026 तक प्रस्तुत करें।
साथ ही आदेश दिया गया कि अगली सुनवाई में संबंधित अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहें और आदेश के अनुपालन को राज्य सरकार के अधिवक्ता द्वारा सुनिश्चित किया जाए। यह भी उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 09 जनवरी 2026 को न्यायालय ने DIOS को शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया था, जिसका पालन न होने पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबदेही तय करने की चेतावनी दी थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर छात्राओं की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा है।























