
अनारक्षित का मतलब सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित नहीं। आरक्षण कोटा के सम्बन्ध में शीर्ष अदालत का निर्णय ऐतिहासिक व स्वागत योग्य।
लखनऊ। भारतीय ओबीसी महासमा के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ.लौटनराम निषाद ने माननीय उच्चतम न्यायालय के 5 जनवरी के आरक्षण व समायोजन के सम्बन्ध में दिये गए ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया है।नौकरियों में आरक्षण और मेरिट को लेकर लंबे समय से चल रही बहस अब सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के साथ समाप्त हो गई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरक्षित वर्ग (ओबीसी,एससी,एसटी और ईडब्ल्यूएस) के उम्मीदवार भी सामान्य श्रेणी (अनारक्षित कोटा ) की सीटों पर नौकरी पाने के हकदार हैं, बशर्ते वे उस श्रेणी के कटऑफ अंक हासिल करें।
इस फैसले से न केवल आरक्षित वर्ग के मेधावी उम्मीदवारों को बड़ा अवसर मिला है, बल्कि यह नियम भर्ती प्रक्रिया में ‘ओपन’ या ‘अनारक्षित’ सीटों की व्याख्या को भी नए सिरे से परिभाषित करता है।निषाद ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय 3 स्तम्भों पर आधारित है-आरक्षण आर्थिक विकास का नहीं,प्रतिनिधित्व व सशक्तिकरण का माध्यम है,स्क्रीनिंग परीक्षा भी खुला मैदान है और योग्यता को दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
निषाद ने बताया कि यह विवाद राजस्थान हाईकोर्ट की एक भर्ती प्रक्रिया से शुरू हुआ था। हाईकोर्ट ने नियम बनाया था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी की सीटें नहीं दी जाएंगी, भले ही उनके अंक सामान्य कटऑफ से अधिक हों। हाईकोर्ट का तर्क था कि यह डबल बेनिफिट होगा—आरक्षण का लाभ और साथ ही जनरल सीट पर चयन।
मा.सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट की दलील को कल 5 जनवरी को खारिज कर दिया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जी मसीह की पीठ ने कहा कि मेरिट का सम्मान सबसे महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने 1992 के इंदिरा साहनी फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ‘ओपन’ का अर्थ है सभी के लिए खुला। आरक्षित उम्मीदवारों को अनारक्षित सीट पर मेरिट के आधार पर चयन से रोकना न्याय संगत नहीं है।मा.सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं।लिखित परीक्षा में यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार जनरल कैटेगरी के कटऑफ अंक पार करता है, तो उसे इंटरव्यू में जनरल कैटेगरी का उम्मीदवार माना जाएगा।
फाइनल मेरिट में यदि अंतिम परिणाम में कुल अंक जनरल कटऑफ से कम होते हैं, तो उम्मीदवार को वापस अपनी मूल आरक्षित श्रेणी में रखा जाएगा ताकि आरक्षण का लाभ मिल सके।विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला सरकारी नौकरियों में मेरिट और आरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा। अब मेधावी आरक्षित उम्मीदवारों के लिए हर अनारक्षित सीट समान अवसर की गारंटी देगी।
निषाद ने बताया कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ कर्मचारी सेवा चयन आयोग आदि भर्तियों मनमाने तरीके से मेरिटधारी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को चयन से बाहर कर दिया जाता रहा है।उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड की तमाम भर्तियों में सामान्य वर्ग से उच्च मेरिटधारी अभ्यर्थियों को बाहर कर संवैधानिक व नैसर्गिक न्याय के प्रतिकूल काम किया जा रहा था।भर्ती परीक्षाओं में गलत तरीके अख्तियार कर अनारक्षित कोटा को सामान्य वर्ग या सवर्ण जातियों के लिए आरक्षित कर दिया जाता रहा है,जो आरक्षण या प्रतिनिधित्व के नियम के प्रतिकूल था।उन्होंने कही कि अनारक्षित का मतलब मेरिट के आधार पर सभी के लिए खुला(ओपेन फाॅर ऑल कटेगरी) होता है,न कि सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित। अनारक्षित का मतलब सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित नहीं:लौटनराम निषाद
























