
शहीद को नमन कर अयोध्या जेल से फरार हुए दो कैदी! तन्हाई बैरक की दीवार में सेंध लगाकर मेनवाल फांदकर भागे बंदी। सुरक्षा में लापरवाही के लिए वरिष्ठ अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर समेत सात निलंबित।
राकेश यादव
लखनऊ। अयोध्या मंडलीय कारागार से बुधवार की रात सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर दो बंदी फरार हो गए। शहीद स्थल की तन्हाई बैरक में बंद यह दोनों बंदी शहीद अशफाक उल्ला को नमन करते हुए बांस के सहारे मेनवॉल फांदकर भाग गए। सुबह गिनती के बाद हुईं जानकारी से जेल में हड़कम मच गया। मौके पर पहुंचकर अधिकारियों ने पहले बंदियों को खोजबीन की। बंदियों के नहीं मिलने पर इसकी सूचना जिला प्रशासन और पुलिस के साथ कारागार मुख्यालय को दी। फरार हुए बंदियों की पहचान अमेठी निवासी गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज व सुल्तानपुर का शेर अली हुई है। शेरअली हत्या और गोलू बलात्कार के मामले में जेल में बंद थे। बंदियों की फरारी में हुई लापरवाही के मामले में अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर, एक हेड वार्डर और तीन वार्डर को निलंबित करने काव्य विभागीय जांच के आदेश दिए गए है।
मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस ने अमेठी निवासी गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज अग्रहरी को बलात्कार और सुल्तानपुर निवासी शेर अली को हत्या के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जेल प्रशासन के अधिकारियों ने इन बंदियों को शहीद स्थल पर बनी तन्हाई बैरक में निरुद्ध किया था। सूत्रों का कहना है कि शहीद स्थल के निकट छह नंबर बैरक में मेंटिनेंस का काम चल रहा था। इस निर्माण कार्य की वजह से निर्माण सामग्री के साथ कुछ बांस के डंडे रखे हुए थे। बताया गया है कि वर्ष 1960 में बनी जेल की हालत काफी जर्जर हो चुकी है। शहीद स्थल पर बनी तन्हाई बैरक में लगे अड़गड़ के नीचे बनी जर्जर दीवार के कुछ ईंटे निकालकर दोनों बंदी शहीद स्थल पर पहुंच गए। इसके बाद यह बंदी निर्माण कार्य के लिए रखे बांस के सहारे मेनवॉल फांदकर फरार हो गए।
ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को इसको भनक तक नहीं लगी। बताया गया है कि सुबह गिनती के समय जब यह जानकारी हुई कि दो बंदी कम है। तो इनकी खोजबीन शुरू की गई। नहीं मिलने पर इसकी सूचना उच्चाधिकारियों, पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों को दी गई। फरार कैदियों की तलाश में कई टीमें बनाकर गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है। उधर अयोध्या परिक्षेत्र डीआईजी शैलेन्द्र मैत्रेय ने मौके पर पहुंचकर घटना की पड़ताल की। पड़ताल में सुरक्षा में लापरवाही की बात सामने आने पर महानिदेशक कारागार के निर्देश पर जेल अधीक्षक यूपी मिश्रा, जेलर जे के यादव, डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी, एक हेड वार्डर और तीन वार्डरों को निलंबित कर दिया गया। इनके खिलाफ विभागीय जांच का भी आदेश दिया गया है।
कार्यवाहक डीजी ने कई प्रयासों के बाद भी नहीं उठाया फोन
विभाग में वसूली कर कमाऊ जेलों पर विशेष ड्यूटी लगाने के लिए चर्चित अपर महानिरीक्षक (एआईजी) कारागार प्रशासन एवं प्रभारी डीजी जेल धर्मेंद्र सिंह से की गई कार्यवाही की पुष्टि करने के लिए जब उनके सीयूजी नंबर (9454418152) और (9454418153) पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा। बताया गया है कि महानिदेशक कारागार पीसी मीणा इन दिनों विभागीय सेमिनार में भाग लेने के लिए विशाखापटनम गए है। तीन दिन अवकाश पर रहने के दौरान एक बार फिर फरारी की घटना हो गई। वर्तमान समय में डीजी जेल का प्रभार एआईजी जेल प्रशासन धर्मेंद्र सिंह के पास है। ऐसे समय में फोन नहीं उठाना अनुशासनहीनता कि श्रेणी में आता है। परिक्षेत्र डीआईजी ने कार्यवाही की पुष्टि की है।
























