
उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल की छवि धूमिल करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई। चेयरमैन बोले, संस्थान की गरिमा से समझौता नहीं।
त्रिनाथ शर्मा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल ने सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार और साक्ष्यहीन बताते हुए कड़ा रुख अपनाया है। काउंसिल के अध्यक्ष संदीप बडोला तथा रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने गुरुवार को एक प्रेसवार्ता कर स्पष्ट किया है कि संस्थान की छवि खराब करने का प्रयास करने वालों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
काउंसिल द्वारा जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि संजय मिश्रा, जो पूर्व में संविदा पर गार्ड के रूप में तैनात थे, 14 जुलाई 2025 को कार्यालय में हुई चोरी की घटना में पुलिस जांच के दौरान संलिप्त पाए गए थे। इस प्रकरण में उन्हें छह माह तक कारागार में निरुद्ध रहना पड़ा। बाद में उच्च न्यायालय से जमानत पर रिहा होने के पश्चात वे सोशल मीडिया के माध्यम से काउंसिल और उसके कर्मचारियों पर विभिन्न प्रकार के निराधार आरोप लगा रहे हैं।
काउंसिल के अनुसार, जेल से रिहाई के बाद संबंधित व्यक्ति द्वारा कर्मचारियों पर धन उगाही तथा पुनः सेवा में रखे जाने के लिए दबाव बनाया गया। काउंसिल का दावा है कि कर्मचारियों के पास इस संबंध में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं।
बता दें है कि काउंसिल का पुनर्गठन मई 2025 में हुआ था। इससे पूर्व काउंसिल के अध्यक्ष महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, लखनऊ तथा रजिस्ट्रार निदेशक पैरामेडिकल हुआ करते थे। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण सहित सभी सेवाएं अब पूरी तरह ऑनलाइन संचालित की जा रही हैं और किसी भी आवेदक को कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है।
अध्यक्ष संदीप बडोला और रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने कहा कि मामले में कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श लिया जा रहा है और शीघ्र ही विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आमजन से अपील की गई है कि वे अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करें और किसी भी समाचार के प्रकाशन से पूर्व अधिकृत स्रोत से पुष्टि अवश्य करें। काउंसिल ने दोहराया कि वह पारदर्शिता, विधिसम्मत कार्यवाही और संस्थागत गरिमा बनाए रखने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।























